भास्कर एक्सक्लूसिवराजस्थानी मूर्तिकार बना रहे दुनिया की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा:3 साल से चल रहा निर्माण, 5 किलोमीटर दूर से भी हो जाएंगे दर्शन

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

जय श्री कृष्णा। आज जन्माष्टमी है। इस खास मौके पर भास्कर के साथ दुनिया की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा का दर्शन कीजिए। प्रतिमा कितनी भव्य है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मूर्ति बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि निर्माण में जितना सीमेंट और सरिया लगा, उससे एक पूरी कॉलोनी बसाई जा सकती है। ये कारीगर राजस्थान के ही हैं।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर मथुरा से 40 किलोमीटर दूर 3 साल से इस मूर्ति का निर्माण चल रहा है। निर्माण की शुरुआत हालांकि 2019 में हुई थी, लेकिन कोरोना लॉकडाउन के कारण 1 साल काम ठप रहा। मूर्ति का निर्माण यूपी के बिल्डर मनोज गौड़ करा रहे हैं। निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। फिलहाल फिनिशिंग का काम चल रहा है। वो भी 6 महीने में पूरा कर लिया जाएगा।

भगवान कृष्ण के जन्म के शुभ अवसर पर भास्कर मथुरा से आपके लिए प्रतिमा के एक्सक्लूसिव फोटो और वीडियो लाया है।

स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, दुनिया की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा की प्लानिंग से लेकर कंस्ट्रक्शन का पूरा प्रोसेस...

ये भगवान कृष्ण की 108 फीट की प्रतिमा का मॉडल है। प्रतिमा के नीचे एक मंदिर भी बनाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 6 महीने में प्रतिमा निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।
ये भगवान कृष्ण की 108 फीट की प्रतिमा का मॉडल है। प्रतिमा के नीचे एक मंदिर भी बनाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 6 महीने में प्रतिमा निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।

3 महीने में 10 डिजाइन बनाई, एक पास हुई
मूर्तिकार विष्णुप्रकाश शर्मा बताते हैं कि साल 2019 में यूपी के बिल्डर मनोज गौड़ जयपुर आए थे। उन्होंने एमएलए अमीन कागजी से बात की थी। तब अमीन कागजी उन्हें विष्णु प्रकाश के पास लेकर पहुंचे।

मनोज गौड़ ने विष्णुप्रकाश की बनाई हुई कई मूर्तियां देखीं और फिर उन्हें बताया कि भगवान कृष्ण की 108 फीट की मूर्ति बनवाना चाहते हैं। पहले तो विष्णु प्रकाश शर्मा की हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि 108 फीट की मूर्ति बनाना बड़ा चैलेंज था, लेकिन फिर उन्होंने मन में ठाना और तैयार हो गए।

इसके बाद काम शुरू हुआ। सबसे पहला चैलेंज था मूर्ति का डिजाइन कैसा होगा? 3 महीने में उन्होंने मूर्ति के 10 डिजाइन तैयार किए और बिल्डर को दिखाए। बिल्डर मनोज गौड़ को उनमें से एक डिजाइन बेहद ज्यादा पसंद आया।

प्रतिमा के निर्माण में 3 साल से राजस्थान के 40-50 कारीगर जुटे हुए हैं। एक सुपरवाइजर हमेशा वहीं पर रहता है। मुंबई के इंजीनियर्स की टीम भी कंस्ट्रक्शन के काम में जुटी है।
प्रतिमा के निर्माण में 3 साल से राजस्थान के 40-50 कारीगर जुटे हुए हैं। एक सुपरवाइजर हमेशा वहीं पर रहता है। मुंबई के इंजीनियर्स की टीम भी कंस्ट्रक्शन के काम में जुटी है।

1 साल में बनाया प्रतिमा का बेस
चूंकि 108 फीट की मूर्ति थी, ऐसे में जरूरी था कि नींव भी बेहद मजबूत हो। मूर्ति को भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए जमीन से 40 फीट नीचे तक नींव का बेस बनाया गया।

सीमेंट और सरियों के जरिए मजबूत बेस बनाया गया। बेस बनाने में 1 साल का वक्त लगा। तीन साल से जयपुर के 40-50 मजदूर मूर्ति बनाने के काम में जुटे हुए हैं।

विष्णुप्रकाश शर्मा और भतीजा देवेंद्र शर्मा हर महीने 10-15 दिन वहां रहकर मॉनिटरिंग करते हैं। एक सुपरवाइजर हमेशा वहीं पर रहता है। इसके अलावा मुंबई के इंजीनियर्स की टीम भी कंस्ट्रक्शन के काम में जुटी हुई है।

108 फीट की मूर्ति है, ऐसे में जरूरी था कि नींव बेहद मजबूत हो। मूर्ति को भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए जमीन से 40 फीट नीचे तक नींव का बेस बनाया गया।
108 फीट की मूर्ति है, ऐसे में जरूरी था कि नींव बेहद मजबूत हो। मूर्ति को भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए जमीन से 40 फीट नीचे तक नींव का बेस बनाया गया।

प्रतिमा पर धूप-बरसात का कम असर होगा
मूर्ति पर वेदर प्रूफ पेंट का प्रयोग कर इसमें रंग भरे जाएंगे, जिससे धूप, बरसात और मौसम के बदलने का कम असर होगा। साथ ही समय-समय पर इसके रखरखाव का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

कोविड के कारण अटक गया था काम
मूर्ति बनाने का काम शुरू करने के बाद कोविड शुरू हो गया था। विष्णुप्रकाश बताते हैं कि उस दौरान काफी प्रॉब्लम हुई। लॉकडाउन के कारण 1 साल तक काम रुक गया था।

कारीगरों को वहां रहने और खाने-पीने में भी परेशानी आ रही थी। ऐसे में वे कारीगरों को लेकर जयपुर आ गए। लॉकडाउन की पाबंदियों में छूट मिली तो दोबारा दोगुने जोश के साथ मूर्ति निर्माण का काम शुरू किया गया।

80 साल से मूर्ति बना रहा है परिवार
विष्णुप्रकाश शर्मा बताते है कि आजादी से पहले ही उनका परिवार मूर्ति बनाने के काम में लगा है। मूर्ति निर्माण के काम में ये उनकी चौथी पीढ़ी है। 80 साल से परिवार मूर्ति बना रहा है। वे उत्तर प्रदेश, गुजरात के अलावा दिल्ली सहित कई राज्यों में मंदिरों के लिए मूर्तियां बना चुके हैं। जयपुर में खजाने वालों के रास्ते में श्याम मूर्ति एम्पोरियम के नाम से शोरूम है।

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