एसएमएस अस्पताल:एसएमएस के 5 वार्डों के 143 ऑक्सीजन पॉइंट समेत 191 बेड पर भी कोरोना का इलाज होगा

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।

अब एसएमएस अस्पताल के 5 वार्डों में भी कोविड मरीजों को भर्ती किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी की ओर से जारी एक आदेश में लिखा है कि ऑर्थोपैडिक, सर्जरी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी व रेडियोथेरेपी विभाग के 191 बेड पर न्यूमोनाइटिस के मरीज भर्ती किए जाएंगे। इनमें से 143 बेड पर ऑक्सीजन पॉइंट वाले हैं।

इनमें ऑर्थोपैडिक विभाग के नॉर्थ विंग द्वितीय के ऑक्सीजन पॉइट वाले 36 बेड, नॉर्थ विंग एलजी (पुराना ट्रॉमा वार्ड) के ऑक्सीजन वाले 28 बेड, सर्जरी विभाग की साउथ विंग प्रथम के 43 (ऑक्सीजन वाले 33) बेड, साउथ विंग (कैंसर वार्ड) के 43 (ऑक्सीजन वाले 22) बेड और 4एफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी के 41 (ऑक्सीजन वाले 24) बेड शामिल हैं।

13 माह में 24 घंटे में सबसे ज्यादा संक्रमित: पिछले 13 माह में जयपुर में पहली बार गुरुवार को 3602 नए संक्रमित मिले हैं। 32 की मौत भी हुई है। 1201 मरीज रिकवर भी हुए हैं। दो दिन में ही 9618 संक्रमित में से 64 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक जयपुर में 107267 पॉजिटिव में से 723 की मौत हो चुकी है। रिकवर होने वालों की संख्या 70,851 और एक्टिव केसों की संख्या 35,693 तक पहुंच चुकी है। जयपुर में पिछले तीन दिन से एक-एक दिन में रोजाना 13 हजार जांचें हो रही हैं। हालांकि अधिकतर पहले वाले क्षेत्रों में ही संक्रमण का ग्राफ बढ़ा है।

बता दें कि जयपुर में कोरोना संक्रमण दर 32% पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में यह दर 50% तक पहुंचने की आशंका है।

सिस्टम को वीआई सिंड्रोम; अप्रोच वाले मरीज घर भेज दें तो दूसरे मरीजों को फायदा
अस्पतालों में कौन से मरीज ऐसे हैं, जिन्हें भर्ती किए जाने की जरूरत नहीं हैं, इसकी जांच के लिए ना तो कोई कमेटी है और ना ही कोई औचक जांच होती है। आरयूएचएस से लेकर जयपुरिया तक में ऐसे रोजाना 30 से अधिक मरीज भर्ती किए जाते हैं। रूटीन के मरीजों को छुट्टी देने के बाद भी सामान्य मरीजों को बेड नहीं मिल पाना चौंकाने वाली बात है।

वैसे भी इस मामले को लेकर अधिकारियों तक शिकायत पहुंच चुकी है और हाल ही आदेश जारी किया गया है कि अस्पतालों में जो भी सामान्य मरीज हैं, उन्हें छुट्टी दी जाए, लेकिन अस्पताल के वार्डों के अलावा कॉटेज और वीआईपी रूम में भी औचक जांच और निरीक्षण की जरूरत है ताकि आमजन को बेड मिल सकें।

आरयूएचएस; चौमूं के एक अस्पताल से मरीज विकास दीक्षित को लेकर एंबुलेंस आरयूएचएस पहुंची। वहां के डॉक्टर्स के मुताबिक उसे तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत थी। उसे निजी अस्पताल ने रेफर कर दिया। यहां पूरे 1200 बेड के अलावा 200 मरीज बरामदों और पोर्च में भर्ती हैं। गलियारों में ऑक्सीजन लगाए लोग इलाज करवा रहे हैं। यहां स्टाफ कम पड़ रहा है।

जयपुरिया; कुल 150 बेड भरे हैं। भर्ती मरीजों में 30 फीसदी एप्रोच सेे एडमिट हैं। पिछले दो दिन से यहां सुबह से रात तक 40 से अधिक एंबुलेंस को अन्यत्र जाने के लिए कहा जा रहा है।

ईएसआई हॉस्पिटल; सभी 52 बेड भरे हैं। ऑक्सीजन के लिए बेड नहीं हैं। वेंटिलेटर खराब हैं। स्टाफ के मुताबिक, इन्हें सही कराने के लिए तैयार हैं लेकिन कंपनी कर्मचारी आने को तैयार नहीं है।

बीलवा; एक दिन पहले शुरू हुए बीलवा कोविड सेंटर में सभी बेड फुल हो चुके हैं। ऑक्सीजन सिलेंडरों की जरूरत है। 5000 बेड का दावा था। अभी 40 से अधिक मरीज भर्ती हैं।

खबरें और भी हैं...