राइट टू हेल्थ को धरातल पर उतारने की कवायद:एसएमएस अस्पताल में कॉर्पोरेट कल्चर; चिरंजीवी योजना में अब मरीजों को क्लेम दिलाने के लिए मौजूद रहेंगे एक्सपर्ट

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: नरेश वशिष्ठ
  • कॉपी लिंक
अस्पताल और सरकार के माध्यम से टेंडर जारी किए गए हैं। अक्टूबर-नवम्बर से यह योजना शुरू हो जाएगी।  - Dainik Bhaskar
अस्पताल और सरकार के माध्यम से टेंडर जारी किए गए हैं। अक्टूबर-नवम्बर से यह योजना शुरू हो जाएगी। 
  • सरकारी अस्पतालों में अभी बीमा योजना के लाभार्थी 10 प्रतिशत ही हैं, इन्हें बढ़ाने की तैयारी

राज्य सरकार की ‘राइट टू हेल्थ’ को धरातल पर उतारने के लिए अब एसएमएस में कार्पोरेट कल्चर का माहौल तैयार करने में जुटी है। सरकार की योजना है कि चिरंजीवी योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए एसएमएस अस्पताल में एक्सपर्ट तैनात किए जाएंगे। एक ही जगह उन्हें सभी दस्तावेज एकत्र करने के लेकर क्लेम तक की सुविधा यही एक्सपर्ट उपलब्ध कराएंगे।

चिरंजीवी योजना को शुरू हुए चार महीने हो गए हैं लेकिन अभी तक सरकारी अस्पतालों में बीमा योजना के लाभार्थी सिर्फ 10 प्रतिशत ही हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने योजना को बढ़ावा देने के लिए निजी सर्विस प्रोवाइडर की मदद लेने की प्लानिंग बनाई है। अस्पताल और सरकार के माध्यम से टेंडर जारी किए गए हैं। अक्टूबर-नवम्बर से यह योजना शुरू हो जाएगी।

ओपीडी से अलग बनेगा ‘चिरंजीवी’ का काउंटर
ओपीडी में अलग से चिरंजीवी योजना का काउंटर बनाया जाएगा। आईपीडी में भर्ती होते वक्त ही मरीज की बीमारी, निर्धारित पैकेज और दस्तावेज की लिस्टिंग होगी। चिकित्सकों से परामर्श के बाद टीआईडी में एडिशनल पैकेज जोड़े जाएंगे। सर्विस प्रोवाइडर ही बीमा कम्पनी को क्लेम पेश करेंगे।

इसके अलावा जो भी क्वेरी होगी उसे यही एक्सपर्ट दुरुस्त करेंगे। क्लेम रिजेक्ट होने पर सर्विस प्रोवाइडर ही बीमा कंपनी में मरीज का पक्ष रखेगा। अधिकारियों का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडर इस काम के एवज में बीमा राशि का निर्धारित प्रतिशत दिया जाएगा।

फायदा क्या: चिरंजीवी योजना में सरकारी अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन बढ़ने से सरकार को दोहरा फायदा होगा। जहां मरीजों की जेब का भार खत्म होगा और पांच लाख तक का इलाज फ्री मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की आमदनी भी बढ़ेगी।

योजना को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया ने मॉनिटरिंग की कमान संभाली है। गालरिया ने पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज में योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की थी, साथ ही फील्ड में आ रही दिक्कतों पर मंथन किया। सामने आया सरकारी अस्पतालों में बीमा योजना को लेकर एक्सपर्ट नहीं हैं। साथ ही डेडिकेटेड एजेंसी की जरूरत है। ऐसे में तय किया गया कि पायलट प्रोजेक्ट का जिम्मा किसी थर्ड पार्टी को दिया जाए।

खबरें और भी हैं...