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साइबर अलर्ट:अपराधी रोजाना 35 लोगों से कर रहे ‌12 लाख रुपए की ठगी

जयपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर को सायबर ठगों ने इसे आपदा का अवसर बना लिया। सायबर अलग-अलग बहाने से मरीजों के परिजनों को जाल में फंसाकर सायबर ठगी करने में जुट गए। ऐसे में लोगों की सहायता के जयपुर कमिश्नरेट ने अभय कमांड सेन्टर में सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड इकाई का गठन किया है, जिसका प्रभारी एडिशनल डीसीपी मोहेश चौधरी को बनाया है।

इसके लिए कमिश्नरेट ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किए है। इसके अलावा आप 100 और 112 पर सूचित कर सकते है। अब आपको सायबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास भटकना नही पड़ेगा।

बस आप समय रहते इन नंबर तुरंत सुचित कर देंवे। ताकि पुलिस टीमें आपके पैसे रिकवर कर सकें। आप केवल cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा दें। उसके बाद सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड इकाई आपकी रिपोर्ट दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू कर देगी।

नंबर ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी

सायबर ठग जिन नंबर से ठगी करते हैं। अगर नंबर समय रहते पुलिस के पास पहुंचेंगे तो तुरंत ही उसे ब्लॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ठग के नंबर ब्लॉक कराने के साथ-साथ इस तरह से नंबर उपलब्ध कराने वाले सिम डीलर की भूमिका की भी जांच की जाएगी। ठग के एक नंबर मिलने पर तकनीकी सहायता से उसके अन्य नंबर भी तलाश करके ब्लॉक करवाएंगे।

हेल्पलाइन नंबर 155260, 100 और 112 पर तुरंत दें सूचना
एडिशनल कमिश्नर अजयपाल लांबा ने बताया कि कोरोनाकाल में सायबर ठग ज्यादा सक्रिय हो गए और अलग-अलग तरीके से ठगी शुरू कर दी। ऐसी स्थिति को देखते हुए सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड इकाई का गठन किया है।

इस हेल्पलाइन पर आने वाली सूचनाओं पर अधिकारी निगरानी रखेंगे। बस लोग जागरूक रहें और अगर उनके साथ किसी तरह की सायबर ठगी होती है तो तुरंत ही इस हेल्पलाइन पर सूचना दें। ताकि हमारी टीम संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी और कस्टमर केयर से बात करके ठगी के पेमेंट को रिकवर करवा सकें।

29.71 लाख रिकवर किए
जयुपर कमिश्नरेट के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से अब तक 2121 लोगों से 64 करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है, जिसमें से हाल में गठित हुई सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड इकाई ने 29.71 लाख रुपए रिकवर किए हैं।

एडिशनल डीसीपी नोडल अफसर
इकाई का नोडल अफसर एडिशनल डीसीपी को बनाया है, जो दिनभर शिकायतों पर निगरानी कर ठगों के नंबरों को संबंधित टेलीकॉम कंपनी से ब्लॉक करवाएगा। इकाई में सूचना मिलने के बाद पीड़ितों को कहीं भटकना नही पड़ेगा।

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