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आधार सीडिंग प्रक्रिया:दाे माह में 30 लाख नाम काटे; सियासी विराेध से बचने के लिए रिकवरी तय नहीं

जयपुर10 दिन पहलेलेखक: हर्ष खटाना
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हर महीने खा गए करोड़ों का हजारों मीट्रिक टन गेहूं - Dainik Bhaskar
हर महीने खा गए करोड़ों का हजारों मीट्रिक टन गेहूं
  • जानवरों, पक्षियों व भगवान के नाम पर भी बना दिए राशन कार्ड

पिछले दाे माह में आधार सीडिंग प्रक्रिया में 30 लाख लाेगाें के नाम राशन कार्डाें से काटे गए हैं। सरकारी सिस्टम की कमी और लापरवाही के चलते इन लाेगाें के नाम से हजारों क्विंटल गेहूं हर माह फर्जीवाड़े से उठ रहा था। ये 30 लाख लाेग या इनके नाम से डीलर कब से राशन उठा रहे थे और अब कितनी रिकवरी बनती है।

इस पर फैसला नहीं हाे पाया है। नाम काटने के मामलाें में जानवर, पंछी और धाैलपुर जिले में ताे भगवान के नाम राशन कार्ड में शामिल पाए जा चुके है। करोड़ों रुपए के गेहूं का घाेटाला सामने आने के बावजूद किसी भी जिले ने रिकवरी तय नहीं की है।

खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव नवीन जैन से सवाल-जवाब

Q. आधार सीडिंग नहीं हाेती ताे ये राशन उठता रहता, सिस्टम की वर्किंग में क्या कमियां है?
A. आधार सीडिंग मामलाें में हमने पात्र या अपात्र किसी भी व्यक्ति काे घाेषित नहीं किया। हमने आधार से जुड़ी वर्किंग कराई। इसी का नतीजा रहा कि एक व्यक्ति दाे से चार जगहाें पर पाए जाने पर नाम काटे गए। उधर बात रही सरकारी सिस्टम के वर्किंग की ताे ये बात परिवार के लाेग ही डीलर काे बताएंगे कि काेई मर गया या बेटी शादी के बाद चली गई। उधर डीलर के स्तर पर भी कमियाें से इंकार नहीं कर सकता क्याेंकि यकीनन उसे इन बाताें के बारे में पता रहा हाेगा।
Q. वसूली पर क्या करेंगे क्याेंकि दाे महीने में काेई एक्शन नहीं हाेता है? इन कमियाें और गड़बड़ियाें की जवाबदेही तय हाेगी क्या, आगे समाधान क्या?
A. बिलकुल हाेगी। ऐसे प्रकरणाें की राेकथाम के लिए जन आधार एवं पहचान पाेर्टल के जरिए राशन कार्ड अपडेशन का काम कराया जा रहा है। सूचना प्राैद्याेगिकी और संचार विभाग की वर्किंग इसमें शामिल है।

मृतक मामले, बेटियाें की शादी, पलायन के मामलाें में डीलर कैसे अनजान रहे, डीएसओ की क्या वर्किंग रही?

आधार सीडिंग कार्यक्रम के तहत राशन कार्डाें में शामिल लाेगाें की पड़ताल की गई ताे सामने आया कि मृतक मामले, शादी हाेने के बाद बेटी की विदाई आदि केसाें में राशन कार्ड अपडेट नहीं हुए थे और उनके नाम से राशन उठ रहा था। इसी तरह पलायन मामले भी सामने आए।

इसके अलावा 2-2 से लेकर 4-4 राशन कार्डाें में एक ही व्यक्ति का नाम शामिल था। ऐसे मामलाें में राशन का उठान के मामले भी मिले। ऐसे में विभाग के अफसराें ने इस तरह के मामले सामने आने के बाद कई राशन डीलराें पर भी सवाल खड़े किए है। वहीं बड़ा सवाल ये भी खड़ा हाे गया है कि डीएसओ क्या कर रहे थे।

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