दलित संगठनों ने खोला मोर्चा:दलित नेता बोले- एससी एसटी की योजनाओं का पैसा जानबूझकर छह माह तक खर्च नहीं करते और बाद में दूसरे कामों में लगा दिया जाता है

जयपुर2 महीने पहले
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जयपुर में मीडिया से बातचीत करते दलित अधिकार कार्यकर्ता - Dainik Bhaskar
जयपुर में मीडिया से बातचीत करते दलित अधिकार कार्यकर्ता

प्रदेश में दलित संगठनों ने एससी एसटी की योजनाओं का पैसा जानबूझकर नहीं खर्च करने का आरोप लगाते हुए ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दलित नेताओं ने ब्यूरोक्रेसी पर एससी एसटी की योजनाओं का पैसा छह माह तक खर्च नहीं करके बाद में इसे दूसरी योजनाओं में खर्च करने पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की है। दलित अधिकार नेटवर्क के प्रदेशाध्यक्ष तुलसीराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विभागों में अफसर एससी-एसटी की योजनाओं का पैसा जानबूझकर छह माह तक खर्च नहीं करते और बाद में दूसरे कामों में लगा दिया जाता है। एससी एसटी सब प्लान का बजट तें अलग से हेड है, नियम से इसका पैसा इस समुदाय के विकास पर ही खर्च होना चाहिए, लेकिन इस फंड को दूसरी जगह खर्च करने के लिए रास्ता निकाल लिया है। एससी एसटी योजनाओं के फंड को लैप्स करने का प्रावधान हटाकर अगर पैसा खर्च नहीं होता है तो अगले साल भी खर्च करने का प्रावधान होना चाहिए।

एससी एसटी के लिए अलग से बजट पेश हो
दलित संगठनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि एससी एसटी विकास के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में योजनाओं का पैसा खर्च किया जाए। दलित नेटवर्क से जुड़े नेताओं ने कहा ​कि एससी और एसटी से जुड़े विभाग को इन योजनाओं का नोडल विभाग बनाया जाना चाहिए। एएसी एसटी विकास के लिए अलग से बजट पेश किया जाना जरूरी है तभी इस वंचित तबके का सही विकास हो पाएगा। हाल ही सरकार ने कृषि बजट अलग से पेश करने की घोषणा की है, उसी तर्ज पर एससी एसटी का बजट भी अलग से बनना चाहिए। योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर अलग से सेल बनने चाहिए। इन योजनाओं में जेण्डर बजटिंग का प्रावधान शामिल करना चाहिए, एससी एसटी की महिलाओं के कल्याण पर खर्च किए बजट का अलग से प्रावधान शामिल हो।

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