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मावठ से राहत:ओलावृष्टि से 70 हजार हेक्टेयर में फसलों काे नुकसान, लेकिन अच्छी बारिश से 45 लाख हेक्टेयर में 15% ज्यादा होगी पैदावार

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: सौरभ भट्‌ट
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ओलावृष्टि से कुछ जगहों पर फसलों का नुकसान हुआ है, लेकिन बरसों बाद हुई अच्छी मावठ ने किसान के साथ सरकार को भी निहाल कर दिया। - Dainik Bhaskar
ओलावृष्टि से कुछ जगहों पर फसलों का नुकसान हुआ है, लेकिन बरसों बाद हुई अच्छी मावठ ने किसान के साथ सरकार को भी निहाल कर दिया।

प्रदेश में बीते दिनों ओलावृष्टि और बारिश दोनों का असर रहा। ओलावृष्टि से कुछ जगहों पर फसलों का नुकसान हुआ है, लेकिन बरसों बाद हुई अच्छी मावठ ने किसान के साथ सरकार को भी निहाल कर दिया। कृषि विभाग के विशेषज्ञों से लेकर किसान संगठनों तक का यही कहना है कि मौसम चक्र में हुए इस बदलाव से किसानों को नुकसान कम और फायदा ज्यादा हुआ है।

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामगोपाल शर्मा का कहना है कि ओलावृष्टि की वजह से प्रदेश में 70 हजार हेक्टेयर में फसलों को नुकसान हुआ है। जबकि मावठ से होने वाला फायदा इससे कहीं ज्यादा है। प्रदेश में इस रबी के सीजन में कुल बुआई 100 लाख हेक्टेयर में की गई है। इसमें से करीब 45 लाख हेक्टेयर में अच्छी मावठ हुई है। इससे क्षेत्र में फसल की पैदावार करीब 15% बढ़ने का अनुमान है।

रबी की बुआई और उत्पादन : प्रदेश में मौजूदा रबी सीजन में कुल बुआई 10084107 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बुआई से 1 करोड़ 40 लाख मेट्रिक टन फूड ग्रेन की पैदावार के एडवांस एस्टिमेट रखे गए हैं। मावठ के बाद विशेषज्ञों की राय के हिसाब से ये पैदावार करीब 1 करोड़ 60 लाख मेट्रिक टन तक बढ़ सकती है।

तीन फायदे : पाले से बचाव, सिंचाई और खाद की पूर्ति भी हुई
मावठ ने प्रदेश में फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया। कम पानी वाली फसलों के लिए तो अब सिंचाई की जरूरत ही नहीं रही है। मावट से ही जमीन में पर्याप्त नमी हो गई है। तीसरा मावठ ने रासायनिक खाद की भी आंशिक कमी को पूरा किया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है हवा में जो नाइट्रोजन घुली रहती है वह बारिश के साथ फसलों में पहुंची है, जिससे खाद की किल्लत में किसानों को राहत मिली है। कृषि विभाग के उपनिदेशक अतर सिंह का कहना है कि मावठ से प्रदेश में बंपर पैदावार होगी। उन्होंने कहा कि-पुराने जमाने में कहावत थी कि पोस बरसे तो दुगना पैदा होता है। गेहूं में करीब एक पानी का फायदा हुआ है।

सरकार को भी राहत
प्रदेश के बांधों में सिंचाई के लिए भी पानी रिजर्व रखा जाता है। अब सिंचाई की आपूर्ति मावठ से हो गई है तो बांधों में करीब 25 से 30 दिन के पानी की बचत हुई है।

मावठ से फायदा हुआ है, लेकिन ओलावृष्टि से जिनकी फसल की क्षति हुई उनको भी राहत मिलनी चाहिए। आपदा राहत कोष से सहायता की गाइडलाइन है उसमें हुड्‌डा कमेटी की सिफारिशों में एक हेक्टेयर पर 25 हजार का मुआवजा देने की बात कही गई है। वहीं राज्य और केंद्र सरकारें अब तक 8 से 9 हजार रुपए पर ही अटकी हुई हैं। -रामपाल जाट, किसान नेता