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ट्रेंड हुआ पायलट का हाथ आमजन के साथ:समर्थकों का सोशल मीडिया पर शक्ति प्रदर्शन, सचिन के कोविड काल में किए कामों और संघर्ष का जिक्र कर सियासी हलकों में छेड़ी बहस

जयपुर4 महीने पहले
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पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट समर्थकों ने सोशल मीडिया के जरिए शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सचिन समर्थकों ने आज दिन भर ट्विटर पर शक्ति प्रदर्शन किया। सुबह आठ बजे से लेकर पूरे पायलट का हाथ आमजन के साथ हैशटैग के साथ ट्वीट करते रहे। दिन में यह टॉप ट्रेंड में शामिल रहा। इस हैशटैग के साथ पायलट समर्थक 51 हजार से ज्यादा ट्वीट कर चुके हैं। इस ऑनलाइन मुहिम में कई पायलट समर्थक विधायक भी जुटे। यह वर्चुअल शक्ति प्रदर्शन सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

आज के इस वर्चुअल शक्ति प्रदर्शन की पायलट समर्थकों ने एक दिन पहले ही तैयारी कर ली थी। इसके लिए पहले से ही हैशटैग तय कर आज सुबह आठ बजे से सबको ट्वीट करने का फैसला किया गया था। इस ऑनलाइन मुहिम के जरिए सचिन पायलट की टीम के कोविड काल में किए गए काम, पायलट के राजनीतिक संघर्ष का भी जिक्र है।

कांग्रेस के नारे को पायलट के नाम से पंचलाइन बनाया

पायलट समर्थकों ने जिस हैशटैग का इस्तेमाल किया है, वह कांग्रेस का चुनावी नारा रहा है। पायलट समर्थकों ने कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ की जगह,पायलट का हाथ आमजन के साथ नया नारा गढ़ लिया जिसे हैशटैग बनाया है।

पायलट समर्थकों के वर्चुअल शक्ति प्रदर्शन के सियासी मायने

सचिन पायलट समर्थकों के इस वर्चुअल शक्ति प्रदर्शन की सियासी हलकों में चर्चाएं हैं। पायलट के कोविड काल में लोगों को की गई सहायता को हाइलाइट करना ही इसका मकसद नहीं कहा जा सकता। राजनीतिक जानकार इसे सियासी शक्ति प्रदर्शन ही मान रहे हैं, क्योंकि कोविड काल में रैली, सभा या जन सपंर्क कर नहीं सकते। इसलिए ताकत दिखाने का जरिया ट्रेंडिंग को बनाया गया। सचिन पायलट ने कोविड काल में सहायता के लिए भी एक टीम बनाकर अलग से ट्वीटर हैंडल बनाया है, जिसके जरिए लोगों की मदद की जा रही है। अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की मदद का दावा किया है। कोविड काल में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, यूथ कांग्रस प्रदेशाध्यक्ष गणेश घोघरा सहित कई नेताओं ने जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए टीमें बना रखी हैंं।

पायलट कैंप को अब सुलह कमेटी के फैसलों को लागू करने का इंतजार

सचिन पायलट खेमा अब सत्ता संगठन में सम्मानजनक भागीदारी चाहता है। इसके लिए पायलट समर्थक मुखर भी हैं। अगस्त में बनी सुलह कमेटी की रिपोर्ट का अभी अता पता नहीं है। ऐसे में पिछले साल अगस्त में बगावत से सुलह के बाद पायलट खेमे ने जो मांगें रखी थीं, उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पायलट कैंप के नेता चाहते हैं कि अब जल्द मांगों को पूरा करने की दिशा में काम हो।

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