टर्की में छाए भारत के डॉक्टर्स:दुनिया के डेंटिस्ट को बताया, दांतों की सर्जरी में आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटें

जयपुर10 महीने पहले
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टर्की में कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय डॉक्टर्स का दल। - Dainik Bhaskar
टर्की में कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय डॉक्टर्स का दल।

दांतों के डॉक्टर्स की टर्की के एंटालिया में आयोजित इंटरनेशनल स्विस इंप्लांट कॉन्फ्रेंस में भारत के डॉक्टर्स छाए रहे। डॉक्टर्स ने अपनी केस स्टडी से दांतों की सर्जरी में आने वाली दिक्कतों से कैसे निपटा जाए, उनकी पेचीदगियों को कैसे दूर किया जाए, इस संबंध में दुनिया के डॉक्टर्स को जानकारी दी।

भारत से गए डॉक्टर्स की टीम में राजस्थान से प्रतिनिधित्व कर रही डॉ. रिम्मी शेखावत ने टर्की से लौटकर बताया कि कॉन्फ्रेंस में दुनियाभर के डॉक्टर्स ने दांतों के ऑपरेशन के दौरान की केस स्टडी साझा की। इनके जरिए बताया गया कि किस तरह के ऑपरेशन में कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्हीं चुनौतियों के बीच भारत के डॉक्टर्स की कई केस स्टडी ऐसी थीं, जिनके जरिए दुनिया के डॉक्टर्स को काफी कुछ सीखने को मिला।

कॉन्फ्रेंस के दौरान जयपुर की डॉक्टर रिम्मी शेखावत।
कॉन्फ्रेंस के दौरान जयपुर की डॉक्टर रिम्मी शेखावत।

कार्टिकल इंप्लांट से 72 घंटे में दांत स्थिर

डॉ. रिम्मी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में कॉर्टिकल इंप्लांट की डीप स्टडी की गई। आमतौर पर कन्वेंशनल इम्प्लांट से जबड़े के सॉफ्ट हिस्से में दांत लगाया जाता है। इस प्रक्रिया से दांत को स्थिर होने में और उससे भोजन चबाने के लिए 3 से 5 माह का समय लगता ही है। अब नई तकनीक कार्टिकल इंप्लांट का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक राजस्थान में भी उपयोग की जाने लगी है। इस तकनीक से इंप्लांट के बाद केवल 72 घंटे में दात स्थिर हो जाते हैं। उनका उपयोग किया जा सकता है। कॉन्फ्रेंस में इसके तकनीकी पहलुओं के साथ उसमें आने वाली चुनौतियों का सॉल्यूशन खोजा गया। कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि इस प्रकार के इंप्लांट से बोन लॉस के केस में कमी आती है। डायबिटीज, हार्ट, केंसर आदि के मरीजों के लिए भी यह एकदम उपयुक्त तकनीक बताई गई।

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