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सैंपलिंग पर विवाद:6 करोड़ की नकली-नशीली दवाओं के सैंपल नहीं लिए, केस में दिक्कत होगी

जयपुरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • ड्रग विभाग का दावा- बिना सैंपल लिए भी हम कोर्ट में अपराध साबित कर देंगे
  • एक्सपर्ट की राय- मामला भले एनडीपीएस एक्ट से सबंधित हो, सैंपल तो लेने ही थे

(संदीप शर्मा) पंजाब पुलिस के सहयोग से जयपुर शहर में पकड़ी गई करीब 6 करोड़ रुपए की नकली एवं नशीली दवाइयों की कार्रवाई में सैंपलिंग नहीं लिए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। अमूमन, नीम-हकीम या फिर झोलाछाप डॉक्टरों के यहां जब्त की गई दवाइयों तक के सैंपल भरे जाते हैं, लेकिन इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद दवाइयों के सैंपल नहीं लिए गए। ऐसे में कोर्ट में केस चलाते समय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

एक्सपर्ट भी यही मानते हैं कि भले कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों तहत की गई हो, ड्रग डिपार्टमेंट को अपना काम करते हुए जब्त दवाओं के सैंपल लेने ही चाहिए थे। कोर्ट से रिक्वेस्ट कर अब भी ले सकते हैं। उधर, ड्रग विभाग का दावा है कि बिना सैंपल के भी कोर्ट में अपराध साबित किए जाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा पूरे विश्वास के साथ कहते हैं- हमने मंगलवार को जब्त दवाओं के सैंपल नहीं लिए हैं। ये नशीली दवाएं हैं और हम कोर्ट साबित कर देंगे कि एनडीपीएस की ही दवाएं हैं। हम हमारे स्तर पर बेस्ट काम कर रहे हैं।

पंजाब पुलिस के सहयोग से ड्रग विभाग ने जयपुर के 23, मधुर विहार, अजमेर बायपास पर मंगलवार को करीब 6 करोड़ रुपए की नशीली दवाएं पकड़ी थीं। इनमें एनडीपीएस घटक वाले कोडिन सीरप, एल्प्राजोलम टेबलेट, ट्रामाडोल कैप्सूल थे। यानी कि नशे के तौर पर प्रयुक्त होने वाली दवाइयां भी थी। इनमें न केवल एनडीपीएस बल्कि, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की भी दवाएं थी, जिन पर विभाग को ही कार्रवाई करनी थी।

बड़ी कार्रवाई और छोटी चूक पर उठते सवाल

  • दवाएं किस तरह की हैं या जब पकड़ी गई तो कौनसी थी? कोर्ट में सिद्ध करना चुनौती होगा।
  • टेबलेट तो हैं लेकिन नशीली हैं या नहीं, विभाग कैसे साबित करेगा। क्योंकि लैब रिपोर्ट के बिना यह साबित करना लगभग मुश्किल होगा।
  • दवाओं की गुणवत्ता की जांच ही नहीं होगी।
  • घटक पूरे हैं या नहीं, जांच में घटक नहीं है तो आजीवन का कारावास की सजा मिल सकती है।
  • ब्रांड की चोरी हुई है तो सैंपलिंग से ही पता चलlा है। ऐसे में एनडीपीएस का एक्ट नहीं लगे तो भी ड्रग एक्ट के तहत सजा मिल सकती है।
  • बिना लाइसेंस का माल ड्रग विभाग ने जब्त किया है, ऐसे में उस पर कार्रवाई कौन करेगा।
  • एमटीपी किट व अन्य दवाएं ऐसी पकड़ी गई हैं जो एनडीपीएस में नहीं आती, इसके बावजूद सैंपलिंग नहीं की गई।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं
भले एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हो, लेकिन क्वालिटी की पुष्टि के लिए ड्रग विभाग को सैंपल लेना चाहिए था। कोर्ट तक मामले का निस्तारण होने या अन्य प्रक्रियाओं के पूरा होने तक एक्सपायरी होने का भी डर रहेगा। यह सिद्ध करना मुश्किल होगा कि ये वे ही दवाएं हैं या घटक अलग हैं। अभी भी विभाग कोर्ट से रिक्वेस्ट कर सकता है और सैंपलिंग कर सकता है। -डी के शृंगी, पूर्व ड्रग कंट्रोलर

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