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नीट नहीं चीट परीक्षा:परीक्षा से एक दिन पहले पकड़े गए डमी अभ्यर्थियों का खुलासा- 1 साल पहले ही तय हो जाता है, कौन-किसकी जगह बैठेगा

जयपुर16 दिन पहलेलेखक: इशांत वशिष्ठ
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पकड़े गए आरोपी अनिल और  शार्दुल - Dainik Bhaskar
पकड़े गए आरोपी अनिल और शार्दुल

नीट परीक्षा से एक दिन पहले ही पकड़े गए डमी अभ्यर्थियों ने रविवार को पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि हमारी गैंग परीक्षा से एक साल पहले ही डमी अभ्यर्थियों की तलाश शुरू करती थी। ये ऐसे डमी अभ्यर्थियों को तलाश करते थे, जो हूबहू मुख्य अभ्यर्थी जैसे दिखते थे। गौरतलब है कि प्रताप नगर थाना पुलिस ने शनिवार शाम आठ डमी अभ्यर्थियों सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें रविवार को कोर्ट में पेश कर 15 सितंबर तक रिमांड लिया गया है।

ये सभी डमी अभ्यर्थी फर्स्ट ईयर के हैं। और 8 में से 6 तो आरयूएचएस के हैं। गैंग में शामिल एक और आरोपी भी आरयूएचएस का ही सीनियर छात्र है। थानाधिकारी बलबीर सिंह कस्वां ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जयप्रकाश बेनीवाल व रविंद्र कुमार (बीकानेर), राकेश कुमार गढ़वाल व देवांग कुमावत (सीकर), हरीश (चूरू), आशीष चौधरी (नागौर) आरयूएचएस में पढ़ते हैं।

इसके अलावा बीकानेर वैटेनरी कॉलेज के छात्र शुभम मूंदडा (कोटा) व इंदौर के वैटेनरी कॉलेज के छात्र शंभूदयाल सैनी (सीकर) को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा इस गिरोह के मुख्य आरोपी अनिल व दो अन्य को अभी पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने अनिल के पास से एक प्रिंटर भी बरामद किया है, जिसकी मदद से छात्रों के फोटो तैयार किए जाते थे।

ऐसे काम करता है गैंग; 12वीं पास उन छात्रों को चुनते थे, जो नीट करना चाहते थे, पर परीक्षा पास नहीं कर सकते थे

1. ऐसे छात्रों को चुनते थे, जो परिवार से समृद्ध हों और नीट को क्लियर नहीं कर सकते। 12वीं के बाद से ही कोचिंग एवं अन्य सोर्स के माध्यम से इनका पता लगाते थे। 2. इसके बाद हूबहू मुख्य छात्र के जैसे दिखने वाले एेसे डमी अभ्यर्थी को ढूंढते थे, जो गरीब परिवार से हो और पैसे के लालच में आ जाए। 3. इसके बाद फॉर्म भरने के दौरान ओरिजनल छात्र की फोटो आईडी लगाई जाती थी। जो काउंसलिंग के दौरान मिलान में एक जैसी दिखे। 4. परीक्षा के दौरान आने वाले एडमिट कार्ड पर डमी छात्र की स्कैन कर तैयार की गई फोटो चस्पा की जाती थी। एक फोटो साथ में दी जाती थी, जिसे परीक्षा के दौरान जमा कराना होता था। 5. जनरल के छात्र को एससीएसटी छात्र की जगह परीक्षा दिलाते थे। क्योंकि उसमें वो आसानी से पास हो जाता था। ऐसे में 1 छात्र को 1-50 हजार के बीच रैंक आने पर अधिकतम 8 लाख रु. व इससे ऊपर रैंक आने पर अधिकतम 4 लाख रु. देने होते थे। छात्र के असली दस्तावेज गैंग के पास ही रहते थे, उन्हें वह रुपए मिलने के बाद ही लौटाता था।

गिरोह के 3 बड़े किरदार; मास्टरमाइंड हरीश अभी फरार है

1. अनिल (कोटा); प्रताप नगर में किराए पर रहता है। मेडिकल का छात्र था। नीट पास नहीं कर पाया तो गैंग बना ली। हाल ही में 22 लाख की डाउन पेमेंट देकर कार खरीदी थी। हर छात्र पर करीब 3 लाख रु. कमाई होती थी

2. शार्दुल शर्मा (जयपुर); कालाडेरा में रहता है। इसका काम परीक्षा देने वाले मुन्ना भाईयों के रहने, खाने-पीने व आने-जाने की व्यवस्था करना था। रुपयाें का ट्रांजेक्शन भी देखता था। इसके लिए उसे प्रति छात्र एक लाख रुपए मिलते थे।

3. हरीश; गिरोह का मास्टर माइंड यही है, लेकिन अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। मुख्य रूप से नीट परीक्षा देने वाले छात्रों की जानकारी जुटाने व लेन-देन का मामला यही तय करता था। परीक्षा से पहले किस छात्र को कहां भेजना है, इसकी जानकारी भी केवल इसके पास ही होती थी। इसकी तलाश जारी है।

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