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2014 से पहले सोनोग्राफी कर रहे डॉक्टरों का मामला:रेडियाेलॉजी डिग्री के बिना सोनोग्राफी कर रहे डॉक्टरों को देनी होगी परीक्षा, प्रमाण पत्र के आधार पर ही स्टेट पीसीपीएनडीटी सेल में करा सकेंगे पंजीकरण

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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आरयूएचएस ने 16 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन मांगे, जून-2022 तक परीक्षा पास करनी होगी। - Dainik Bhaskar
आरयूएचएस ने 16 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन मांगे, जून-2022 तक परीक्षा पास करनी होगी।

प्रदेश में सालों से सोनोग्राफी कर रहे डॉक्टरों को अब परीक्षा पास करनी पड़ेगी। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। निर्धारित योग्यता रखने वाले डॉक्टर 16 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पास होने पर ही मेडिकल शिक्षा विभाग की ओर से प्रमाण पत्र दिया जाएगा। सोनोलोजिस्ट की दक्षता प्रमाणित करने के लिए परीक्षा में तीन अवसर मिलेंगे।

असफल रहने वालों को नियमानुसार छह माह का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। अब रेडियोलॉजी की डिग्री के बिना सोनोग्राफी कर रहे डॉक्टरों को परीक्षा देनी होगी। प्रदेश में करीब सोनोलोजिस्ट 800 हैं। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के पीसीपीएनडीटी एक्ट में किए गए संशोधन के तहत जून-2022 तक परीक्षा पास करना अनिवार्य है। प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही स्टेट पीसीपीएनडीटी सेल में सोनोलोजिस्ट के लिए पंजीकृत हो सकेंगे।

बुढ़ापे में परीक्षा का क्या औचित्य...सोनोलोजिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के मंत्री डॉ. मनोज जैन का कहना है कि 2014 से पहले सोनोलोजिस्ट के लिए पंजीकृत डॉक्टरों को सरकार ने मान्यता दी है। ऐसे भी डॉक्टर है, जिन्हें काम करते हुए 20 साल हो चुके हैं और जिनकी उम्र 60 से 70 साल है। अधिकतर डॉक्टर उन ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे है, जहां पर सोनोलोजिस्ट नहीं है। उन लोगों की परीक्षा लेने का क्या औचित्य है। डॉ. जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल से अधिक काम कर रहे डॉक्टरों को परीक्षा में नहीं बैठने की छूट दी है। सुुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने आदेश को मान लिया है। लेकिन राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं माना।

आरयूएचएस लेगा कंपीटेंसी बेस्ड टेस्ट
सरकार के आदेशानुसार राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ‘कंपीटेंसी बेस्ड टेस्ट’ लेगी। परीक्षा से लेकर परिणाम जारी करने तक के लिए कमेटी का गठन किया है। सिलेबस के आधार परीक्षा का आयोजन कराकर परिणाम जारी कर सरकार को भेजने की जिम्मेदारी आरयूएचएस को सौंपी गई है। परीक्षा में लेवल-1 अल्ट्रासाउंड कोर्स के तहत थ्योरी 100 अंक व प्रैक्टिकल 100 अंक के होंगे। थ्योरी में 50 फीसदी व प्रैक्टिकल में 60 फीसदी अंक लाने पर ही पास माने जाएंगे। प्रेक्टिकल के लिए रेडियोलोजिस्ट को जिम्मेदारी दी है।

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