पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

आरएएस 2018:सपने साकार; बीटेक के बाद आरएस बने शिवम, सुनीता ने एसआई पद छोड़ा

जयपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • गुलाबीनगर की हिमानी सोनवाल पहले ही प्रयास में बनीं आरएएस, भाई सुभाष और बहन अमिता भी बने अफसर

आरएएस भर्ती-2018 में जयपुर के कई युवाओ का चयन हुआ है। युवाओं का कहना है कि काेराेना काल में घर बैठने के बावजूद साेशल मीडिया से दूरी और पढ़ाई के प्रति एकाग्रता ने सफलता दिलाई है। पास हाेने वालाें में गृहणियाें से लेकर भाई-बहनाें की जाेड़ी और सरकारी कर्मचारी तक शामिल हैं।

जयपुर की हिमानी ने पहले प्रयास में आरएएस परीक्षा क्रैक की है। इसी तरह गृहिणी सुनीता जेफ ने आरएएस के सपने काे पूरा करने के लिए सब इंस्पेक्टर में सलेक्शन हाेने के बावजूद जाॅइन नही किया था। तीसरी बार में अफसर बनने का सपना पूरा किया।

परिवार ने देखा मेरे लिए सपना

गरिमा शर्मा, रैंक : 14

दुर्गापुरा निवासी गरिमा शर्मा ने 14वीं रैंक हासिल की है। गरिमा शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सभी परिवारजनों और खासकर अपने दादा स्वर्गीय रामनिवास रूथला को दिया है। गरिमा वर्तमान में जल प्रबंधन पर शोध कार्य कर रही हैं। वे कहती हैं मेरा सपना मेरे परिवार ने देखा है, उन्हीं की वजह से यह सफलता मिली है।

सिविल सर्विस की कुर्सी पर बैठने का सपना था

शिवम जाेशी, रैंक : 87

दीनानाथ जी की गली में रहने वाले शिवम जोशी अभी बीकानेर सेंट्रल जेल में उपाधीक्षक कारागार है। आरएएस 2018 में शिवम ने 87वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि 2016 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करते ही आरएएस की तैयारी शुरु कर दी। एक ही सपना था सिविल सर्विस जॉइन करने का। इस बीच ग्राम सेवक में चयन हो गया।

भाई-बहन की जाेड़ी भी बनी अफसर

अमिता मान रैंक : 33

सुभाष मान रैंक : 284

आमेर तहसील के भाई-बहन की जाेड़ी ने भी सफलता हासिल की है। सुभाष मान काे 284वीं और बहन अमिता मान काे 33वीं रैंक मिली। इनके पिता जेपी जाट राजस्थान सांख्यिकी सेवा के अधिकारी थे। चाचा महेश मान आरएएस अधिकारी, भाई नरेश मान सांख्यिकी सेवा में हैं।

आरएएस के लिए SI पद जॉइन नहीं किया

सुनीता जेफ, रैंक : 449

आरएएस में 449 रैंक हासिल करने वाली सुनीता जेफ का कहना है कि अारएएस बनने का सपना देखा था। इसलिए सब इंस्पेक्टर जाॅइन नहीं किया। सुनीता जेफ ने आरएएस 2012 में भी साक्षात्कार दिया था। तीसरे प्रयास मे सफलता हासिल की है। सुनीता सफलता का श्रेय अपने पति सतीश मीना, माता-पिता और सास-ससुर काे देती हैं।

दादाजी का सपना था कि मैं अफसर बनूं

हिमानी साेनवाल, रैंक : 1105

दादाजी का सपना था कि मैं खूब पढाई करूं, मेहनत करूं और अफसर बनूं। दादाजी रामधन साेनवाल डिप्टी सेक्रेट्री के पद से रिटायर्ड थे। वे हाेते ताे खुशी दाेगुनी हाे जाती। ये कहना है हिमानी साेनवाल का। आरएएस के लिए पहला प्रयास सफल हुआ है। पिता लाेकेश साेनवाल से माेटीवेशन मिला जाे एसडीआरएफ में एडि. एसपी के पद पर हैं।

खबरें और भी हैं...