भास्कर एक्सक्लूसिवजानलेवा कारोबार पर पर्दा डाल रही थी ASP दिव्या:बेकसूर युवक के नाम पर नशीली दवाओं की फर्म, शक हुआ तो मर्डर

जयपुर19 दिन पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

2 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार SOG की ASP दिव्या मित्तल के केस में एक और नाम सामने आया है…नशीली दवाओं का माफिया कमलजीत मौर्य। कमलजीत नागौर के गोटन का रहने वाला है।

दरअसल, अजमेर में 11 करोड़ की नशीली दवाओं की खेप को लेकर 2 थानों में 3 एफआईआर दर्ज की गई थी।

जयपुर में पुलिस ने कमलजीत की 5.50 करोड़ रुपए की नशीली दवाओं की खेप पकड़ी थी, जिसे मानसरोवर से अजमेर भेजा जा रहा था। अलवर गेट थाने में दर्ज हुई एफआईआर में कमलजीत भी आरोपी था।

इसके अलावा भरतपुर में हुए एक मर्डर में भी कमलजीत शामिल था। कमलजीत ने 2021 में अपने नशीली दवाओं के कारोबार को छिपाने के लिए एक युवक की 2.50 लाख रुपए की सुपारी देकर हत्या तक करा दी थी। भरतपुर की कुम्हेर पुलिस ने तीन महीने पहले ही उसे गिरफ्तार किया था। अभी वह जेल में है।

दिव्या नशीली दवाओं के जिस कारोबार पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही थी, वो कितना खतरनाक और जानलेवा है…

किसी और के नाम से फर्म बनाकर कारोबार
कमलजीत और धीरज खंडेलवाल ने हरिमोहन के साथ मिलकर एक युवक बंटी चौधरी के नाम पर मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स नाम से एक थोक दवाई विक्रेता की फर्म खोली थी। मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स के पूरे पेपर बंटी चौधरी के नाम से ही थे।

फर्म में इनके साथ कई पार्टनर जुड़े हुए थे। इसके बाद इन्होंने पूरे राजस्थान में नेटवर्क बनाना शुरू कर दिया था।

दिल्ली की दवा मैन्युफेक्चर्स कंपनी में मेसर्स न्यूटेक हेल्थ केयर नरेला से नशीली दवाइयां मंगवाने लगे। इन दवाओं को वे राजस्थान के जिलों में सप्लाई करने लगे थे। हर जिले में डिस्ट्रीब्यूटरशिप दे दी गई थी।

कमलजीत (बीच में) और धीरज खंडेलवाल (बाएं) ने हरिमोहन (दाएं) के साथ मिलकर बंटी चौधरी के नाम पर मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स नाम से एक थोक दवाई विक्रेता की फर्म खोली थी।
कमलजीत (बीच में) और धीरज खंडेलवाल (बाएं) ने हरिमोहन (दाएं) के साथ मिलकर बंटी चौधरी के नाम पर मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स नाम से एक थोक दवाई विक्रेता की फर्म खोली थी।

दो कंपनियों के नाम पर नशीली दवाएं सप्लाई करते
बंटी चौधरी की तरह ही धीरज खंडेलवाल और कमलजीत ने एक और युवक मनीष परिहार के नाम से जयपुर में मेसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स नाम से एक और फर्म खोल ली थी।

दोनों ने बंटी और मनीष के नाम की कंपनियों से ही नशीली दवाओं का कारोबार करना शुरू कर दिया था।

दोनों कंपनियों के नाम से ही नशीली दवाएं दिल्ली से मंगवाकर राजस्थान के हर जिले में सप्लाई कर दी जाती थी।

इस दौरान मनीष परिहार के नाम की कंपनी मेसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स के बारे में NCB (नेशनल नार्कोटिक्स ब्यूरो) और CNB (सेंट्रल नार्कोटिक्स ब्यूरो) को पता लगा।

एक फर्जी फर्म पकड़ी गई तो लगा डर
CNB कोटा की टीम ने मेसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रब्यूटर्स पर रेड डाल दी। रेड में सोडियम, ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम की लाखों टेबलेट जब्त की गई थी।

जयपुर में NCB की टीम ने भी दबिश दी। CNB कोटा की टीम की रेड के बाद यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स फर्म मालिक मनीष परिहार फरार हो गया।

मनीष के भागने के बाद धीरज खंडेलवाल, कमलजीत मोर्या, बंटी चौधरी और हरिमोहन भी जयपुर से फरार हो गए।

मेसर्स राजस्थान ट्रेडर्स के पेपर बंटी चौैधरी के नाम से थे और मेसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स के सारे पेपर मनीष परिहार के नाम से थे।

CNB की टीम ने तलाश करते हुए मनीष परिहार को पकड़ लिया। कमलजीत और धीरज खंडेलवाल को डर सताने लगा कि कहीं बंटी चौधरी को भी CNB ने पकड़ लिया तो पूरे खेल का खुलासा हो जाएगा। उन्होंने बंटी चौधरी को छुपाने के लिए प्लान बनाया।

मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने कमलजीत (बाएं) और धीरज (दाएं) को गिरफ्तार कर लिया।
मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने कमलजीत (बाएं) और धीरज (दाएं) को गिरफ्तार कर लिया।

कुम्हेर में किराए पर कमरा दिलाया, 10 हजार महीने देते
कमलजीत और धीरज खंडेलवाल ने मिलकर बंटी चौधरी से बात की। इन्होंने कुम्हेर में एक कमरा किराए पर लिया। बंटी चौधरी को कमरा दिलाकर छिपा दिया। इन्होंने बंटी को साफ बोल दिया कि कहीं भी बाहर नहीं जाना है।

जो भी काम होगा, वे करवा देंगे। बंटी को 10 हजार रुपए महीने भी देने लग गए थे। CNB की टीम बंटी की तलाश में लगी रही।

एक साल तक बंटी को इन्होंने बाहर निकलने नहीं दिया था। इसके बाद CNB ने बंटी चौधरी को पूछताछ करने के लिए नोटिस जारी कर दिया। नोटिस मिलने पर सारे पार्टनर घबरा गए।

बंटी के बुआ के बेटे को ही 2.50 लाख की सुपारी दी
कमलजीत और धीरज दोनों को खुद की गिरफ्तारी का भी डर सताने लगा था। उन्हें डर था कि बंटी पकड़ा गया तो सभी के नाम सामने आ जाएंगे।

दोनों ने बंटी के बुआ के बेटे हरिमोहन से बात की और 2.50 लाख रुपए में सुपारी दे दी। हरिमोहन अपने चचेरे भाई गोपी के साथ मामा के बेटे बंटी को बाइक पर बैठा कर शराब पार्टी करने का बहाना बनाकर जंगल में ले गया।

वहां पर बंटी की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी। बंटी कुम्हेर के सैंत गांव का रहने वाला था। वहीं 23 जून 2021 को ही खेतों में बंटी की लाश मिली थी।

पुलिस ने 14 महीने के बाद बंटी की हत्या का खुलासा किया। कुम्हेर थानाधिकारी हिमांशु सिंह राजावत ने बताया कि बंटी चौधरी की हत्या के मामले में कमलजीत के अलावा हरिमोहन जाट और धीरज खंडेलवाल को भी गिरफ्तार किया था।

बंटी चौधरी के हत्या के आरोप में गिरफ्तार हरिमोहन को ले जाते हुए पुलिस।
बंटी चौधरी के हत्या के आरोप में गिरफ्तार हरिमोहन को ले जाते हुए पुलिस।

कमलजीत ने नशे का कारोबार मूंदड़ा को सौंपा
कमलजीत ने नशीली दवाओं के काले कारोबार को श्यामसुंदर मूंदड़ा को सौंप दिया था। श्यामसुंदर मूंदडा मेडिकल स्टोर चलाता था। दोनों के बीच में 2020 में लॉकडाउन के समय में दोस्ती हो गई। तब मोर्या ने अपना काम मूंदडा को दे दिया।

जयपुर से कमलजीत ही उसे अजमेर में माल भेजता था। उसे कई डिस्ट्रीब्यूटरशिप दे दी गई। आगे मूंदडा माल की सप्लाई करता था।

कमलजीत ने ही जयपुर के मानसरोवर से पांच करोड़ की नशीली दवाओं की खेप को अजमेर में भेजा था। पूरी खेप को जयपुर पुलिस ने पकड़ लिया था।

पुलिस ने श्यामसुंदर मूंदडा को भी गिरफ्तार कर लिया था। एसओजी इस मामले में कमलजीत और श्यामसुंदर मूंदडा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस की गिरफ्त में नशीली दवाओं का कारोबारी श्यामसुंदर मूंदड़ा।
पुलिस की गिरफ्त में नशीली दवाओं का कारोबारी श्यामसुंदर मूंदड़ा।

कमलजीत व श्यामसुंदर से भी दिव्या ने की पूछताछ

एएसपी दिव्या मित्तल की जांच से पहले नशीली दवाओं के मामले की जांच तीन अधिकारियों ने की थी। क्लॉक टावर के इंस्पेक्टर दिनेश कुमावत से दो दिन में फाइल डीएसपी मुकेश सोनी के पास पहुंची थी। उन्होंने कमलजीत व श्यामसुंदर को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में एक-एक कर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया था।

एसओजी के इंस्पेक्टर भूराराम खिलेरी को भी जांच दी गई थी। उन्होंने देशभर में नशीली दवाओं के नेटवर्क को खंगाला था। जैसे ही जांच एएसपी दिव्या मित्तल को दी गई तो पकडे़ गए आरोपियों से दोबारा पूछताछ शुरू की गई।

वे पहले से पकड़े जा चुके थे, ऐसे में रुपयों की डील नहीं हो पाई थी। इसके बाद दिव्या मित्तल ने आगरा के व्यापारी को जांच में मदद करते हुए केस से निकालने की डील शुरू की थी।

दिव्या ने दो करोड़ रुपए मांगे थे और व्यापारी 50 लाख रुपए देने को तैयार हो चुका था। ज्यादा रुपए मांगने के कारण डील फाइनल नहीं हो सकी थी और व्यापारी ने ट्रेप कराने के लिए एसीबी से संपर्क किया।

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