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न तो कार्यालय खुला, न कोई लिंक अधिकारी नियुक्त हुआ:दो साल में भी अस्तित्व में नहीं आया आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड; सामाजिक संगठन कर चुके हैं धरना-प्रदर्शन, रैली और विधानसभा का घेराव

जयपुर5 दिन पहले
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राजस्थान राज्य आर्थिक पिछड़ा वर्ग बोर्ड के गठन के दो साल बाद भी न तो कार्यालय ही खुला है और न ही कोई लिंक अधिकारी ही नियुक्त किया गया है। उधर, ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने के बाद इस कैटेगरी के अभ्यर्थियों को व्यावहारिक रूप से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के निराकरण के लिए कोई उचित स्थान नहीं है।

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2020 के बजट में आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग (ईबीसी) के उत्थान एवं कल्याण के लिए प्रभावी नीति का निर्धारण करने के लिए इस बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। लेकिन सरकारी उदासीनता की पराकाष्ठा है कि आज तक यह बोर्ड अस्तित्व में ही नहीं आया है। बोर्ड की क्रियान्विति के लिए विप्र महासभा लगातार मुख्यमंत्री, कई मंत्रियों और मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को ज्ञापन दे चुकी है लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील उदेईया का कहना है कि यदि यह बोर्ड अपना कार्य करना शुरू कर दे तो एक निश्चित स्थान पर ईडब्ल्यूएस कैटेगरी अभ्यर्थी अपनी समस्याएं रख सकेंगे। साथ ही इस बोर्ड के माध्यम से आर्थिक कमजोर वर्ग के बच्चों के कल्याण के लिए नीतियां भी बन सकेंगी।

विप्र कल्याण बोर्ड गठन का वादा भी नहीं किया पूरा
उदेईया का कहना है कि कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में ब्राह्मण समाज से राज्य में विप्र कल्याण बोर्ड बनाने का वादा किया था। अब इस कांग्रेस सरकार का चौथा बजट पेश होने जा रहा है लेकिन आज तक विप्र कल्याण बोर्ड के गठन का इरादा भी सरकार नहीं जता रही है। जनवरी, 2020 में मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपने के बाद से लगातार इस संंबंध में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, जनघोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति अध्यक्ष व मंत्री बीडी कल्ला, कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित मुख्य सचिव को स्मरण अनुरोध कर चुकी है।

अभियान, मार्च- 2021 में विधानसभा पर धरना, अनशन और रैली निकालकर विप्र महासभा लगातार सरकार को इस ओर ध्यान दिला रही है लेकिन सरकार इसका भी गठन नहीं रही। ऐसे में फिर से ब्राह्मण समाज को आंदोलन के रास्ते पर जाने मजबूर होना पडेगा।

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