दिवाकर पब्लिक स्कूल की ताले-तोड़ शुरू हुई जांच:शिक्षा विभाग ने जब्त किए स्टूडेंट्स से जुड़े रिकॉर्ड, 3 दिन में दूसरी करवाई

जयपुर6 महीने पहले
दिवाकर स्कूल के ताले तोड़ दस्तावजों की जांच करते शिक्षा विभाग के अधिकारी।

कॉन्स्टेबल पेपर लीक प्रकरण के बाद सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। दिवाकर पब्लिक स्कूल की मान्यता रद्द करने के बाद सरकार स्कूल पेपर लीक से जुड़े दस्तावेज खंगालने में जुटी है। गुरुवार को शिक्षा विभाग और पुलिस के अधिकारी जयपुर के झोटवाड़ा पहुंचे। जहां SOG द्वारा सीज स्कूल के ताले तोड़ दस्तावेज खंगाले गए। इस दौरान स्कूल की कई अनियमितताएं भी सामने आई है। जिनको लेकर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

जयपुर के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी सुमेर खटाणा ने बताया कि स्कूल में RTE एडमिशन के साथ ही फीस से संबंधित कई गड़बड़ियां सामने आई है। इनको लेकर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही स्कूल में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में शिक्षा विभाग इन सभी मामलों की जांच कर रहा है। ताकि पेपर लीक प्रकरण के साथ ही छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।

सरकार ने नकल के खिलाफ करवाई कर 2 दिन पहले ही दिवाकर स्कूल को किया था सीज।
सरकार ने नकल के खिलाफ करवाई कर 2 दिन पहले ही दिवाकर स्कूल को किया था सीज।

दरअसल, 14 मई को 4588 पदों के लिए कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का दूसरा दिन था। जयपुर के झोटवाड़ा के दिवाकर पब्लिक स्कूल में समय से पहले ही पेपर को खोल दिया गया था। इसके बाद स्कूल से ही पेपर आउट हो गया। जिसके कुछ हिंदर ने सोशल मीडिया पर पेपर वायरल हो गया। छात्रों ने जब इस पूरे मामले पर विरोध किया और सोशल मीडिया के वायरल पेपर की जांच हुई। तो पुलिस प्रशासन ने 14 मई के पेपर को रद्द कर दिया।

नया कानून बनने के बाद पहली कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने हाल ही विधानसभा सत्र के दौरान नकल के खिलाफ कानून लागू किया था। ऐसे में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान हुई धांधली के बाद प्रदेश में पहली बार नए कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। एक और जहां शिक्षा विभाग ने दिवाकर पब्लिक स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों को सीज कर उनके खिलाफ 10 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है।