शहीद स्मारक बना अनशन का मैदान:कर्मचारी, शिक्षक, बेरोजगार नेता बैठे हैं अनशन पर

जयपुर2 महीने पहले
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शहीद स्मारक इन दिनों अनशनों का मैदान बिना हुआ है। यहां कर्मचारी, शिक्षक और बेरोजगार अपनी अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए अनशन का सहारा ले रहे हैं। गुरुवार को राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने आमरण अनशन प्रारंभ किया। वहीं एक दिन पहले प्रदेश के 85 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले की मांग को लेकर शिक्षकों ने अनशन प्रारंभ किया था।

इसी तरह से बीएसटीसी डिग्रीधारी भी लेवल-1 में अपना हक जताते हुए क्रमिक अनशन करके ही सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। राजस्थान मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ ने भी 2 अक्टूबर से यहां अनशन प्रारंभ कर रखा है। इतने दिन बाद भी सरकार का कोई नुमाइंदा कर्मचारियों से वार्ता के लिए नहीं आया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है।

बेरोजगार महासंघ अध्यक्ष बैठे अनशन पर

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने गुरुवार को शहीद स्मारक पर आमरण अनशन प्रारंभ किया। इस दौरान बड़ी संख्या में बेरोजगार मौजूद थे। यादव ने कहा कि वे सरकार के साथ 23 फरवरी को हुए समझौते को पूरा करने, रीट-एसआई पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच कराने और पेपरलीक-नकल रोकने के लिए गैर जमानती कानून सहित 21 सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग उठा रहे हैं। सरकार उनकी मांगों पर उदासीन रवैया अपना रही है। इसलिए जब तक हमारी मांगे नहीं मान ली जाती, अनशन जारी रहेगा। यादव ने बताया कि वे सरकार से लंबित भर्तियों को पूरा करने और नई भर्तियां निकालने की भी मांग कर रहे हैं।

13 दिन से अनशन, सरकार नहीं दे रही ध्यान

राजस्थान मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ की ओर से 2 अक्टूबर से प्रारंभ किया गया अनशन और महापड़ाव गुरुवार को 13वें दिन भी जारी रहा। महासंघ के अध्यक्ष मनोज सक्सेना अनशन पर बैठे हैं। आने वाले दिनों में अनशन पर बैठने वालों की संख्या बढ़ेगी। सक्सेना का कहना है कि कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। महासंघ के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शर्मा ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2013 के समझौते को आज तक लागू नहीं किया गया। महासंघ की 11 सूत्री मांगों में कनिष्ठ सहायक की ग्रेड पे 3600 करने, सचिवालय के समान वेतन भत्ते देने, वेतन कटौती आदेश को वापस लेने सहित कई मांग शामिल है।

85 हजार शिक्षकों से आवेदन ले लिए, तबादले कब होंगे... राजस्थान एकीकृत शिक्षक महासंघ की ओर से गुरुवार को दूसरे दिन भी सत्याग्रह और अनशन जारी रहा। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष हरपाल दादरवाल का कहना है कि अगस्त में तृतीय श्रेणी शिक्षकों से तबादले के लिए आवेदन भरवाए गए थे। इसमें 85 हजार शिक्षकों ने आवेदन किया था, लेकिन अब तक तबादले नहीं हुए। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सभी कैडर के तबादले हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तब तबादलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक शिक्षकों के पक्ष में परिणाम नहीं आता तब तक यह सत्याग्रह जारी रहेगा।

लेवल-1 हमारा हक, सरकार करे न्याय
बीएसटीसी संघर्ष समिति की ओर से गुरुवार को चौथे दिन अनशन जारी रहा। समिति के प्रवक्ता मुकेश रायल का कहना है कि बीएसटीसी डिग्रीधारियों के पक्ष में सरकार कोर्ट में मजबूती से पैरवी नहीं कर रही। इस कारण उनमें नाराजगी है। सरकार 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मजबूत तरीके से पैरवी करे। साथ ही एनसीटीई को पत्र लिखे है राज्य में 4 लाख बीएसटीसी डिग्रीधारी है। इसलिए लेवल-1 में बीएड वाले शामिल नहीं हो। रीट प्रथम लेवल में ही उनके लिए रोजगार का विकल्प था।

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