एक फोन कॉल... और घूसखोर IAS-IPS के बुरे दिन शुरू:CM भी नहीं देते दखल, जानिए- कैसे ACB रचती है चक्रव्यूह

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

1064, वो नंबर है, जिससे राजस्थान में हर भ्रष्टाचारी खौफ खाता है। घूस लेने वाले IAS-IPS से लेकर बडे़-बड़े अफसर-कर्मचारी इन नंबरों पर शिकायत के चलते ही आज जेल की सलाखों के पीछे हैं। पिछले एक महीने में 40 ट्रैप करने वाली एसीबी 134 दिन में ताबड़तोड़ 185 घूसखोरों पर शिकंजा कस चुकी है। राजस्थान एसीबी की इस वर्किंग को फॉलो करने के लिए UP, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड सहित कई राज्यों की टीमें ट्रेनिंग ले चुकी हैं।

आखिर कैसे एक फोन कॉल से भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी की शामत आ जाती है, यही डीकोड करने के लिए भास्कर टीम ने ACB के डीजी बी.एल सोनी से पूरी प्रक्रिया को जाना। फिर एसीबी मुख्यालय के उस कमरे तक पहुंचे, जहां 1064 नंबर का कॉल सेंटर चलता है। यहां प्रवेश पाना इतना आसान नहीं था, क्योंकि परिवादी की हर कॉल को गुप्त रखा जाता है। यहां न तो किसी मंत्री-विधायक को एंट्री दी जाती है और न किसी बड़े से बड़े अधिकारी को।

यहां तक कि मुख्यमंत्री भी कामकाज में कोई दखल नहीं देते हैं। डीजी से स्पेशल परमिशन के बाद हमें अंदर जाने दिया गया। रविवार को जब भास्कर टीम उस कमरे में दाखिल हुई तो छुट्टी के बावजूद 4 अफसर 1064 पर आ रही शिकायतें नोट कर रहे थे। भास्कर टीम ने करीब 2 घंटे वहां रुककर पूरी प्रोसेस जाना। ग्राउंड पर रियलिटी चैक भी किया कि आखिर परिवादी की कॉल को ACB कैसे रिस्पॉन्स करती है। आज की इस स्पेशल स्टोरी में आप भी पढ़िए- उस बंद कमरे की वर्किंग, जहां से शुरू होता है ACB का चक्रव्यूह....। आगे चलने से पहले दैनिक भास्कर के पोल में हिस्सा जरूर लीजिए।

भास्कर टीम ने जो देखा
एसीबी हेड क्वार्टर में ही 1064 का कॉल सेंटर बनाया गया है। पूरे राजस्थान में कहीं से शिकायत के लिए कॉल करते हैं तो यहीं पर पहुंचती है। भास्कर टीम जब पहुंची तो एडीशनल एसपी ललित शर्मा एक शिकायत के बारे में इंस्पेक्टर प्रकाश चंद से फीडबैक ले रहे थे। कमरे में 3 अन्य सहयोगी कर्मचारी भी मौजूद थे।

काम करने के लिए चार डेस्कटॉप, दर्जन भर फाइलें, 4 हेडफोन और 4 कॉल रिसीवर थे। महज 2 घंटे के दौरान हमारे सामने एसीबी अधिकारियों ने 13 कॉल रिसीव किए। चूंकि एसीबी परिवादी की जानकारी लीक नहीं करती इसलिए केवल उसी पार्ट को ही हम यहां बता रहे हैं जो वर्किंग समझाने के लिए जरूरी है।

100 कॉल्स डेली आती हैं सेंटर पर
एसीबी डीजी के मुताबिक 1064 पर रोजाना करीब 100 कॉल आती हैं। करीब 90 कॉल्स आम शिकायतों की होती है। जैसे कि नगर निगम की एनओसी, जन्म प्रमाण पत्र, मूल निवास नहीं बनाने जैसी जनरल समस्याओं की शिकायत होती है। इनमें स्पष्ट रूप से किसी एक अधिकारी के रुपए मांगने की डिटेल नहीं होती है। रोजाना एवरेज 5 कॉल्स परफेक्ट होती हैं, जिनमें रुपए मांगे जाने की सही जानकारी और सबूत होते हैं। हर कॉल को ऑटो रिकॉर्ड पर लिया जाता है। कोई चूक न हो इसलिए 30 दिन का रिकॉर्डिंग बैकअप भी रखा जाता है।

तीन शिफ्ट में 24 घंटे काम करती है ACB
कॉल सेंटर पर एक एडीशनल एसपी, डीएसपी-1, इंस्पेक्टर-2, हेड कांस्टेबल-2 और 8 कांस्टेबल तीन शिफ्ट में काम करते हैं। सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे। इसके बाद दोपहर 2:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक और तीसरी शिफ्ट रात को 8:00 से सुबह 8:00 बजे तक रहती है।

एक करोड़ के बजट से रिवॉल्विंग फंड बनाया
एसीबी डीजी बीएल सोनी ने बताया कि ACB के लिए अलग से एक करोड़ के बजट का रिवॉल्विंग फंड बनाया गया है। ट्रैप होने के बाद परिवादी के रुपए कोर्ट के प्रोसेस के कारण अटक जाते है। इसलिए फंड बनाया गया है। ट्रैप का प्रोसेस होने के बाद परिवादी से एफिडेविट लेकर उसे फंड से एक महीने में ही रुपए दे दिए जाते हैं। पूरा प्रोसेस होने के बाद कोर्ट से जब भी रुपए मिलते है तो फंड में जमा करवा दिए जाते हैं।

जहां पहले ट्रैप नहीं होते, वहां भी होने लगे
एसीबी डीजीपी ने भास्कर को बातचीत में बताया कि कई जिलों और कस्बों में सालों से कोई ट्रैप नहीं हुआ था, लेकिन 1064 टोल फ्री नंबर आने से पिछले डेढ़ साल में ऐसे जिलों में भी ट्रैप होने लगे हैं। भरतपुर, श्रीगंगानगर, मकराना, कामां, सीकर, करौली सहित कई जिलों में पहले ट्रैप की कार्रवाई नहीं होती थी। अब लोग जागरूक हुए हैं। सीधे ही जयपुर हेडक्वार्टर में कॉल कर सूचना देते हैं। परिवादी के मन में ट्रैप के बाद डर रहता है। इसलिए ट्रैप की कार्रवाई भी दूसरे जिले की टीम को दी जाती है, जिससे परिवादी को एसीबी पर पूरा भरोसा रहे।

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