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  • Even If 40% Salt Is Replaced Instead Of 70% In Medicine, The Drug Company Will Be Healthy, The Medicines Which Are Considered Non standard Will Improve Their Health.

नियमों में बदलाव:दवा में 70% की जगह 40% सॉल्ट ही हुआ तो भी दवा कंपनी बेदाग, जिन दवाओं को अमानक माना, वही सुधारेंगी सेहत

जयपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • यदि किसी दवा में 35% तक भी कम साॅल्ट है तो वे अमानक नहीं होंगी
  • थर्मोस्टेबल मेडिसिन में साॅल्ट की मात्रा को 85% से घटाकर 50% किया

(संदीप शर्मा) राजस्थान के ड्रग विभाग ने नकली और कम साॅल्ट मिलाकर दवा बेचने वालों को बचाने के लिए नए नियमों की संजीवनी बूटी दी है। पहली बार देश के किसी राज्य ने ऐसे नियम जारी किए हैं, जिसमें किसी दवा के अंदर कम साॅल्ट बेचने वाली कंपनियों पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि राजस्थान के ड्रग विभाग ने सेंट्रल ड्रग्स स्टैण्डर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएसओ) को पत्र लिखकर कहा है कि यदि किसी दवा में 40 प्रतिशत तक भी साॅल्ट है तो उसे अमानक तो माना जाएगा लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकेगी।

वहीं थर्मोस्टेबल मेडिसिन (जो हीट से प्रभावित नहीं होती) में भी साॅल्ट की मात्रा को कम कर दिया गया है। अब नए नियम के तहत थर्मोस्टेबल मेडिसिन में यदि 50 प्रतिशत तक ही साॅल्ट है तो वह अमानक नहीं माना जाएगा। वहीं चौंकाने वाली बात यह है कि बनाए गए नए नियमों की जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को ही नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसे कोई नियमों के बारे में नहीं बताया गया।

समझिए, कैसे क्या नियम बदला, कैसे मिलेगा नकली दवा वालों को फायदा

अब होगा यह कि यदि ड्रग विभाग के अधिकारी किसी दवा पर कार्रवाई करते हैं और जब्त करते हैं तो कंपनियों के लिए बच निकलने का रास्ता तैयार होगा। क्योंकि नए नियम के मुताबिक वे कह सकेंगे कि विभाग ने ही कम साल्ट निर्धारित कर रखा है।

यह नियम भी बदल दिया

अभी तक ड्रग अथॉरिटी के तहत नियम था कि किसी भी दवा को शरीर में घुलने के लिए 15 मिनट की समयावधि होनी चाहिए। नए नियमों में इसे बढ़ाकर 1 घंटा कर दिया गया है।

सही तो यह है, अभी तक यही होता है
मालूम हो कि किसी भी दवा को पकड़ने सम्बन्धी मामले में राज्य सरकार की अोर से निर्देश हैं कि तीन महीने के अंदर न्यायालय में परिवाद दायर किया जाए। लेकिन अभी जाे 300 मामले लंबित हैं, उनमें से 170 से अधिक केस तो दो साल पुराने हो चुके हैं और उनमें अभी तक कोई न्यायिक कार्रवाई के निर्देश ही अधिकारियों ने नहीं दिए। करीब 25 केस तो ऐसे हैं, जिन्हें तीन साल पहले पकड़ा गया था।

^कुछ दस्तावेज विभाग संबंधी होते हैं और हम उनके तहत ही काम करते हैं। ये नियम भी कमेटी ने ही बनाए थे। इस मामले में मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।
-राजाराम शर्मा, ड्रग कंट्रोलर

^हां, इन लोगों ने कमेटी बनाकर कुछ नियम बनाए थे, लेकिन सीडीएसओ से ऐसा लेटर हमें नहीं मिला है। शिकायत भी आई थी। ऐसा क्यों किया गया है, इसका पता किया जा रहा है और मामले में ठोस कार्रवाई भी की जाएगी। -संजय शर्मा, शासन उप सचिव

अमानक दवा के 300 से ज्यादा केस, स्टेट ड्रग डिपार्टमेंट इन्हें बचा रहा है...

अभी 300 से अधिक ऐसे केस हैं, जिन्हें ड्रग विभाग ने यह कहते हुए पकड़ा और कार्रवाई की थी कि इन दवाओं में तय मानक से कम साॅल्ट हैं और इन पर न्यायिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अभी तक इन मामलों में कोई कार्रवाई शुरू ही नहीं की गई। अब जबकि नए नियम जारी कर दिए गए हैं तो निश्चित रूप से न्यायालय में ये कंपनियां इस नियम का दलील देकर बच निकलेंगी। जबकि इन कंपनियों की दवाओं को खुद ड्रग विभाग ने यह कहते हुए पकड़ा था कि इनमें कम साल्ट है और अमानक मानते हुए कार्रवाई की थी। सवाल यह भी आ रहा है कि कहीं ये नए नियम इन कंपनियों को बचाने के लिए तो नहीं बनाए गए।

आम आदमी पर मार तय
ऐसा नियम लागू किए जाने के बाद दोहरी मार पड़ना तय है। वह ऐसे कि यदि कम साल्ट की दवा लेंगे तो एक ओर तो बीमारी ठीक नहीं होगी, दूसरा उसे पूरे पैसे भी देने होंगे। वहीं गंभीर बीमारियों के मरीजों को कम साल्ट की दवाइयां मिलेंगी तो उनकी जान को भी खतरा तय है।

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