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संगठन के नए कप्तान:राजस्थान में पहली बार कांग्रेस-भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष की कमान जाट समाज को, दोनों विधायक भी

जयपुर10 महीने पहले
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जयपुर. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सीएम अशोक कहलोत के साथ। - Dainik Bhaskar
जयपुर. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सीएम अशोक कहलोत के साथ।
  • कांग्रेस में गोविंद सिंह डोटासरा 7वें जाट प्रदेशाध्यक्ष

कांग्रेस की सियासत में जारी बड़े घटनाक्रम के पार्टी नेतृत्व ने सचिन पायलट को हटा कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की कमान विधायक एवं शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को सौंप दी। इससे उन अटकलों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाएगा, जिसमें कहा जाता रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जाट समुदाय के तेजतर्रार नेताओं को तवज्जो नहीं देते हैं।

डोटासरा लक्ष्मणगढ़ विधानसभा से तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। पिछली बार जब पार्टी विपक्ष में थी तो ये पूरे पांच साल सदन में पार्टी के मुख्य सचेतक की भूमिका में रहे हैं। उधर, डोटासरा के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका है, जब दोनों ही प्रमुख पार्टियों कांग्रेस एवं भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष जाट समुदाय से हैं। दोनों ही विधायक हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं आमेर विधायक सतीश पूनियां भाजपा के अध्यक्ष हैं। वे संघ पृष्ठभूमि से है। भाजपा में अब तक बनाए गए 16 प्रदेश अध्यक्षों में पहले जाट नेता है। डोटासरा 29 वें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए हैं और सातवें जाट नेता हैं। इससे पहले नाथूराम मिर्धा, रामनारायण चौधरी, परसराम मदेरणा, नारायण सिंह एवं डॉ. चंद्रभान अध्यक्ष रह चुके हैं। मिर्धा दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

कांग्रेस में जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के मायने क्या हैं?

प्रदेश सियासत में जाटों को महत्व दिया जाना कोई तात्कालिक निर्णय नहीं है। इससे पहले भी रामनिवास मिर्धा, नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, दौलतराम सारण एवं शीशराम ओला जैसे नेताओं का पार्टी में दबदबा रहा है। लेकिन, पार्टी की तरफ से अभी तक सीएम नहीं बनाए जाने की टीस इस वर्ग में रही है। इसलिए, कांग्रेस में जाट समाज को पूरी तवज्जो मिलती रही है।

कांग्रेस जब भी विपक्ष में रही नेता प्रतिपक्ष पद पर जाट नेताओं का ही दबदबा देखने को मिला है। छठी विधानसभा में पहले परसराम मदेरणा एवं फिर रामनारायण चौधरी, दसवीं विधानसभा में परसराम मदेरणा, 12वीं विधानसभा में बी.डी. कल्ला के बाद रामनारायण चौधरी एवं हेमाराम चौधरी और 14वीं विधानसभा में रामेश्वर डूडी पार्टी नेता प्रतिपक्ष रहे।

डोटासरा का सियासी सफर

कांग्रेस के नए प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा लगातार तीन बार से विधायक हैं। वे 2008, 2013 और 2018 में लक्ष्मणगढ़ से विधानसभा चुनाव जीते हैं। इससे पहले 2005 से 2008 तक लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के प्रधान रहे हैं। डोटासरा ने चुनाव नहीं हारा है। 2016 में उन्हें बेस्ट एमएलए का अवार्ड मिला।

पेशे से वकील डोटासरा ने राजनीति की शुरुआत 1981 से की। इसके बाद वे 1984 से 1988 तक एनएसयूआई महासचिव, 1989 से 1995 तक यूथ कांग्रेस सीकर के उपाध्यक्ष, 1996 से 2000 तक विधि प्रकोष्ठ के कोर्डिनेटर, 2001 से 2003 तक सीकर जिला कांग्रेस के सचिव, 2003 से 2010 तक सीकर जिला कांग्रेस महासचिव और 2011 से 2018 तक सीकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष रहे। 2014 से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी में उपाध्यक्ष हैं।

दोनों पार्टियों में अच्छे खासे विधायक

जाट नेताओं के अनुसार वर्तमान विधानसभा के 200 सदस्यों में से तीन दर्जन विधायक जाट समुदाय से हैं। इनमें कांग्रेस, भाजपा, निर्दलीय एवं दूसरी पार्टियां शामिल हैं। वहीं, लोकसभा के 25 सांसदों में 7 सांसद जाट समुदाय से हैं।

मौजूदा सरकार में 3 कैबिनेट मंत्री

सरकार गठन के समय जाट समुदाय के 3 विधायक विश्वेंद्र सिंह, लालचंद कटारिया व हरीश चौधरी को कैबिनेट एवं गोविंद सिंह डोटासरा स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री बनाए गए। महेंद्र चौधरी को उपमुख्य सचेतक बनाया। विश्वेंद्र सिंह बर्खास्त हैं।

विरोधी गुट में 5 जाट विधायक, इसलिए यहां डोटासरा को लाए

विरोधी गुट में पांच विधायक जाट समुदाय से हैं। वहीं, युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए गए मुकेश भाकर व एनएसयूआई से इस्तीफा देने वाले अभिमन्यू पूनियां भी जाट समुदाय से हैं। कांग्रेस के पास बड़ी संख्या में इस समुदाय से विधायक हैं। उन्हें राजी रखा जा सकें या किसी तरह का असंतोष नहीं उभरे इसीलिए, डोटासरा को चुना है। अन्यथा सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व सांसद रघुवीर मीणा को लेकर थी।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जाट विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। पार्टी एवं चुने गए विधायकों में उनके समर्थकों की संख्या कम नहीं है। लेकिन कहा यह जाता है तेज तर्रार के बजाय वे थोड़े सॉफ्ट नेताओं को अधिक तवज्जों देते हैं। पार्टी में ही एक धड़ा समय-समय पर इसको लेकर नाराजगी जाहिर भी करता रहा है। अब डोटासरा को कमान मिलने से जाटों में गहलोत के प्रति जो नाराजगी रहती है उसमें कहीं राहत मिलेगी। क्योंकि, वे तेज तर्रार जाट नेता हैं।

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