पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल:हिंदी कवि रहीम ने अफगानिस्तान से दक्कन की लड़ाईयां लड़ी, मगर कविता नहीं छोड़ी

जयपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

मुगल दरबार में बादशाह और शहजादे के बाद सबसे ऊंचे पद पर ‘अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना’ थे। वे रहीम के नाम से प्रसिद्ध हुए। ‘ख़ान -ए- ख़ाना’ का पद उन्हें मुगल दरबार में मिला। ख़ान -ए- ख़ाना दरबार में सबसे बड़ा सेनापति, दरबारी यानी अधिकारी कहलाता था। असल में रहीम के पिता बैरम खान भी इसी उपाधि से नवाजे गए थे। बड़े होकर रहीम को ये उपाधि मिली। अकबर के शासन काल में 50 सालों तक वे ख़ान -ए- ख़ाना बने रहे, लेकिन जहांगीर को वे खास पसंद नहीं थे। इसीलिए उन्होंने रहीम को इस पद से हटाकर महाबत खान को इस उपाधि से नवाजा था। ये बातें ‘अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना: काव्य सैंदर्य और सार्थकता ’ किताब के लेखक हरीश त्रिवेदी ने कही। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे दिन एक सेशन में कवि यतींद्र मिश्र भी थे। एसोसिएट प्रो. रेखा सेठी ने सेशऩ को मॉडरेट किया।

ढेरों अहम जिम्मेदारियां संभाली मगर कविता और कवि मन छोड़ा नहीं

हरीश ने कहा- महाबत खान ने इस पद पर आने के बाद जहांगीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। ऐसे में दोबारा से जहांगीर ने तंग आकर वह पद अब्दुल खान को देकर कहा -इससे पीछा छुड़ाओं। हिंदी श्रोताओं से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- हिंदी वालों के लिए उनका कवि रूप ही सामने आता है। स्कूल के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक उनका केवल कवि रूप ही सामने आता है। मुगल दरबार में 50 साल तक रहते हुए उनके पास ढेरों अहम जिम्मेदारियां थी। उसके बावजूद उन्होंने अपने अंदर के कवि को मरने नहीं दिया। अफगानिस्तान से लेकर दक्कन तक उन्होंने लड़ाइयां लड़ीं। उस दौरान वे सभी जगह भेजे गए। फिर भी उन्होंने कविता का साथ नहीं छोड़ा।

दूसरी हिंदी किताबों की तरह इसमें नीति के दोहे नहीं, समग्रता में संतुलित है ये किताब

कवि यतींद्र ने इस किताब की समीक्षा पर चर्चा करते हुए कहा- लेखक ने सिर्फ कहने भर के लिए किताब का सम्पादन नहीं किया है। किताब में अन्य हिंदी किताबों की तरह नीति के दोहे नहीं हैं। पहली बार कोई किताब समग्रता में संतुलित लगी।

किसी भी अध्याय में मुझे रिपीटेशन नहीं लगा। कोई भी लेख एक दूसरे से मिलता जुलता नहीं है। ये किताब जिज्ञासू पाठकों से लेकर नए तरीके से पढ़ने वाले पाठकों और रिसर्चर्स के लिए एक अलग तरह की नई दृष्टि दे सकती है।

रहीम हिंदी के कवि थे, अफसोस कि उन्हें ज्यादा पढ़ाया नहीं गया

रहीम हिंदी के कवि थे, मगर उन्हें हाई स्कूल के बाद यूनिवर्सिटीज में ज्यादा पढ़ाया नहीं गया। इसीलिए उनकी उस प्रकार की प्रतिष्ठा नहीं है जैसी कबीर, सूरदास, जायसी या मीरा की बनीं।

यतींद्र मिश्र ने रहीम की कविता ‘मदनाष्टक’ का किया वाचन

शरद-निशि निशीथे चाँद की रोशनाई। सघन वन निकुंजे वंशी बजाई ।।

रति, पति, सुत, निद्रा, साइयाँ छोड़ भागी। मदन-शिरसि भूय: क्‍या बला आन लागी।।

कलित ललित माला या जवाहिर जड़ा था। चपल चखन वाला चाँदनी में खड़ा था ।।

कटि-तट बिच मेला पीत सेला नवेला। अलि बन अलबेला यार मेरा अकेला .....

कंटेंट : किरन कुमारी किंडो

खबरें और भी हैं...

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज घर के कार्यों को सुव्यवस्थित करने में व्यस्तता बनी रहेगी। परिवार जनों के साथ आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने संबंधी योजनाएं भी बनेंगे। कोई पुश्तैनी जमीन-जायदाद संबंधी कार्य आपसी सहमति द्वारा ...

और पढ़ें