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  • Gangajal Is Kept In A 1.5 Kg Gold Urn For 107 Years, In 11 Years Rs 5.73 Crore Has Been Spent On The Security Of The Urn.

स्वर्ण कलश की सुरक्षा:107 साल से 1.5 किलो के स्वर्ण कलश में रखा है गंगाजल, 11 साल में कलश की सुरक्षा पर ही 5.73 करोड़ रुपए खर्च

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: लता खंडेलवाल
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कलश की सुरक्षा पर हर साल 90 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। - Dainik Bhaskar
कलश की सुरक्षा पर हर साल 90 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं।
  • महाराजा माधव सिंह द्वितीय ने 1100 स्वर्ण मोहरें गलवा कर बनवाया था कलश

गोविंद देव जी मंदिर के पीछे देवस्थान विभाग के राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी मंदिर श्री गंगा जी में 107 साल से 1.50 किलो के स्वर्ण कलश में गंगाजल रखा है। स्वर्ण कलश की सुरक्षा में 1 इंस्पेक्टर और 3 सिपाही 24 घंटे तैनात रहते हैं। कलश की सुरक्षा पर हर साल 90 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं।

देवस्थान विभाग जुलाई 2010 से 31 मार्च 2021 तक 5.73 करोड़ खर्च कर चुका है। 10 जुलाई 2009 में संयुक्त शासन सचिव के आदेश पर देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ने राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी मंदिर एवं आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिरों के आभूषणों व अन्य कीमती सामान ट्रेजरी में रखवा दिए थे लेकिन जन आस्था को देखते हुए इस स्वर्ण कलश को मंदिर में ही रख दिया गया।

हालांकि ऑडिट ने सवाल खड़े किए कि कलश को स्ट्रांग रूम में क्यों नहीं रखवाया गया? साथ ही भुगतान बिलों के साथ गार्डों की उपस्थिति प्रमाण पत्र भी नहीं दिए गए। अगस्त 2020 को आयुक्त देवस्थान विभाग ने प्रशासनिक स्वीकृति की अनुमति मांगी, तब संयुक्त शासन सचिव अजय सिंह राठौड़ ने 19 नवंबर 2020 को पुलिस सुरक्षा के पिछले बिलों की स्वीकृति देते हुए 31 मार्च 2021 तक पुलिस गार्ड लगे रहने की अनुमति दी।

1915 में मंदिर के निर्माण पर 35000 रुपए खर्च किए गए थे

महाराजा सवाई माधव सिंह द्वितीय ने मंदिर श्री गंगा जी का निर्माण संवत 1971 और सन् 1915 में करवाया था। मंदिर का पाटोत्सव गंगा दशमी पर हुआ था। मंदिर को बनवाने पर ₹35000 रु. खर्च हुए थे। इतिहासकार डॉ. आनंद शर्मा बताते हैं महाराजा माधव सिंह के संतान नहीं थी तब उनकी पासवान से गंगा सिंह और गोपाल सिंह दो पुत्र पैदा हुए। महाराजा के इन दोनों पुत्रों की चेचक से मौत हो गई। इन दोनों पुत्रों की याद में उन्होंने इनके नाम से मंदिर श्री गंगा जी और मंदिर श्री गोपाल जी का निर्माण करवाया।

गंगामाता मंदिर के निर्माण पर गंगोत्री से लाया गया था जल

महाराजा माधव सिंह ने जब गंगोत्री में गंगा माता मंदिर निर्माण कराया था, उस समय से ही वहां से लाया गया जल ही इस स्वर्ण कलश में सुरक्षित है। स्वर्ण कलश को 1100 मोहरें गलवा कर बनवाया गया था। इसके मुंह पर देवस्थान विभाग ने मोहर लगवा कर गंगाजल को सुरक्षित रखा हुआ है। कलश के नीचे रखी चांदी और सोने की छोटी कलात्मक शीशियों में भी उसी समय का गंगाजल सुरक्षित है। इन्हें भी विभाग ने सील बंद किया हुआ है।