भैरोसिंह शेखावत ने भेजा था गोश्त:गुलाम नबी बोले- मैं उनके खिलाफ प्रचार करने आया था, लेकिन उनका आदमी मेरे लिए गोश्त लेकर आया

जयपुरएक महीने पहले
गुलाम नबी आजाद ने सेमिनार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत से जुड़े खुलासे किए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने विधानसभा में हुए सेमिनार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत से जुड़े खुलासे किए। आजाद ने कहा कि राजनीति में कटुता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, मेरे सबसे बेहतर संबंध रहे हैं। एक बार मैं पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत के खिलाफ प्रचार करने उनके निर्वाचन क्षेत्र में जा रहा था। एयरपोर्ट पर ही शेखावत साहब मिल गए, उन्होंने मुझसे कहा कि उनका एक वर्कर निर्वाचन क्षेत्र में मिलेगा, वह आपके लिए गोश्त लेकर आएगा। तुम कश्मीरी हो, गोश्त खाने वाले हो। मैं शेखावत साहब के खिलाफ प्रचार करने आया था और उन्होंने मेरे लिए गोश्त ​भिजवाया। यह संबंधों की प्रगाढ़ता होती है।

आजाद ने कहा, 'मैं भैरोसिंह शेखावत के चुनाव क्षेत्र में गया। सभा की और उनके राज के खिलाफ बोला, लेकिन राजनीति के कारण हमने कभी व्यक्तिगत संबंधों में कटुता नहीं आने दी। चुनाव में मैंने कभी विपक्ष के उम्मीदवार का नाम नहीं पूछा क्योंकि मुझे उसके खिलाफ नहीं बोलना था, मैं उसके खिलाफ क्यों बोलूं, हमें अपने कामों पर बोलना है।'

वाजपेयी ने मदनलाल खुराना को संसद चलाने के टिप्स लेने आजाद के पास भेजा
आजाद ने कहा कि पक्ष और विपक्ष में बेहतर सामंजस्य से जनता को फायदा होता है। मैंने हमेशा इसका ध्यान रखा। मैंने वो टिप्स केवल अटल बिहारी वाजपेयी को बताए थे। नरसिम्हा राव के समय हम दो लोगों ने सदन चलाया। हर तीन दिन में वाजपेयी जी का खाना मेरे यहां होता था, तो मेरा खाना वाजपेयीजी के यहां। वाजपेयी विपक्ष के नेता थे और मैं संसदीय कार्य मंत्री था। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो पहला फोन उन्होंने मुझे किया, मैं तो विपक्ष में था और उससे पहले संसदीय कार्य मंत्री रह चुका था। वाजपेयीजी ने मुझसे कहा कि मदनलाल खुराना को भेज रहा हूं, इन्हें संसदीय कार्य मंत्री बना रहा हूं, उसे जरा समझाना कि सदन कैसे चलाना है, उस समय तक ​मंत्रियों को विभाग तक नहीं बंटे थे। खुरानाजी आए, मुझे जो बताना था, वह बताया। यह उनके विश्वास की बात थी। आजाद ने कहा कि सबसे प्रगाढ़ता रही है। पक्ष विपक्ष के नेताओं के बीच अच्छे संबंधों का फायदा सदन चलाने से लेकर बिल पास होने तक हर जगह होता है। मैंने इस बात का हमेशा ध्यान रखा। अभी भी कुछ ऐसे संबंध थे तो लोगों ने कहा कि बीजेपी में जा रहा है, जब नेताओं के बीच अंडरस्टैंडिंग नहीं होगी तो लोकतंत्र नहीं चलेगा।

आज विधायक और सांसद सबसे लाचार हैं
गुलाम नबी आजाद ने कहा- हमारे आज विधायक और सांसद सबसे लाचार हैं। विदेशों में 70 फीसदी लोगों ने सर्वे में कहा विधायकों-सांसदों का काम कानून बनाना है, क्योंकि संविधान में हमाारी पहली जिम्मेदारी कानून बनाने की हैं। आज अमेरिका, यूके विकसित देशों में यह बातें इसलिए की जाती हैं, क्योंकि वहां विधायक, सांसद के पास पानी, बिजली, सड़क बनाने की सिफारिश के लिए कोई नहीं आता। वहां सांसद विधायक के पास बुनियादी समस्याओं से जुड़े कामों के लिए कोई नहीं आता। हमारे देश में अलग दिक्कत है। हम गुलाम रहे और हमारी संपत्ति भी बाहर ले गए, इसलिए हमारे यहां संसाधनों की दिक्कत है। विधायक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की बुनियादी सुविधाओं के लिए सिफारिश करनी होती है। विकसित देशों में पानी, बिजली, सड़क तबादले के लिए लोग सांसद-विधायकों के पास नहीं जाते।

सिफारिश करवाने वाले सत्ता और विपक्ष नहीं देखते
आजाद ने कहा- हमारे यहां लोग सत्ता और विपक्ष नहीं देखते, सिफारिश करवाने आते ही रहते हैं। आप अगर किसी विभाग के मंत्री रह गए तो उससे आपका पीछा मरने के बाद ही छूटेगा। जब तक आप जीएंगे लोग उस विभाग से जुड़ी सिफारिश करवाने आएंगे। अगर कोई नेता किसी विभाग का मंत्री रह गया तो लोग उसके विपक्ष में होने के बाद भी सिफारिश करवाने आते हैं। अफसर चाहे हमें भूल गया हो, लेकिन लोग नहीं भूलने देते। कोविड के वक्त मेरे पास देश भर से अस्पतालों के लिए फोन आए, क्योंकि मैं स्वास्थ्य मंत्री रह चुका था।

राजनीति में हमारी प्राइवेसी नहीं रहती
आजाद ने कहा- राजनीति में खासकर विधायक- सांसदों की हमारी प्राइवेसी रहती ही नहीं है, जबकि कार्यपालिका और न्यायपालिका में यह दिक्कत नहीं है। हम परिवार को वक्त नहीं दे पाते। मैं एक बार मेरे बच्चों के स्कूल गया तो बेटे के दोस्तों ने कहा कि तेरे पापा जैसे लगते हैं, जबकि मैं खुद था। यह इसलिए क्योंकि हम बच्चों और परिवार को समय दे ही नहीं पाते। जब हम 70 साल के आसपास हो जाते हैं, तब इसका अहसास होता है।

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