2 कमरों पर टीचरों का ताला:2 साइकिल बनाने वालों को दिए, अब सवाल- बचे 11 कमरों में 12 कक्षाओं के 900 बच्चे कैसे पढ़ें?

जयपुरएक वर्ष पहले
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अधिकारियों की लापरवाही के चलते विद्यार्थियों को स्कूलों में पढ़ने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। - Dainik Bhaskar
अधिकारियों की लापरवाही के चलते विद्यार्थियों को स्कूलों में पढ़ने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ोतरी को लेकर वाहवाही लूट रही है। दूसरी तरफ अधिकारियों की लापरवाही के चलते विद्यार्थियों को स्कूलों में पढ़ने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसा ही एक मामला है राजधानी जयपुर के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल फतेहटीबा का। इस स्कूल को अधिकारियों ने साइकिल वितरण का केंद्र बना दिया।

यहां अब साइकिलें तैयार हो रही हैं। जो जल्दी ही नवीं की बेटियों को वितरित की जाएंगी। साइकिल वितरण केंद्र बनने से यहां अधिकांश जगह तो साइकिल के उपकरणों ने रोक ली। दिनभर मजदूर साइकिल तैयार करने में लगे रहते हैं। इससे ना केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि उनको बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल पा रही।

दो कमरों के ताले खुल जाएं तो बच्चों को बरामदों से राहत मिले
कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी के नाम पर दो टीचरों ने दो कमरे बंद कर रखे हैं। विद्यार्थी भले ही परेशान होते रहे, लेकिन कमरों को खोलने को तैयार नहीं हैं। डीईओ से मांग की गई है दोनों टीचरों को कमरों में लगे ताले खोलने के लिए पाबंद किया जाए। शिकायत डीईओ माध्यमिक कार्यालय पहुंची है।

संस्था प्रधान ने डीईओ को पत्र लिखकर कहा है कि स्कूल में 900 का नामांकन हैं। पहले से ही कमरे कम हैं। अब साइकिल वितरण केंद्र बनने से पढ़ाई बाधित हो रही है। साइकिल तैयार करने वालों के आवास के लिए दो कमरे दिए गए हैं। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक (मुख्यालय) सुमेर खटाणा का कहना है कि इस तरह की शिकायत आई है। इस पूरे मामले की जांच की जाएगी।

क्लास में साइिकलें, बच्चे बरामदों में
राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल फतेहटीबा, आदर्शनगर नवीं की छात्राओं को वितरित की जाने वाली साइकिलों की असेंबलिंग का स्टोर बना हुआ है। हालात ये हैं कि स्कूल के हॉल में साइकिल बनाने वाले काम कर रहे हैं, वहीं बच्चे बरामदों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल के 15 कमरों में से 2 कमरों पर टीचरों ने कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी बताकर ताला लगा रखा है। वहीं, दो कमरे साइकिल बनाने वालों को रहने के लिए दिए हैं। बचे 11 कमरों में 12 कक्षाएं लग रही हैं। यहां 900 बच्चे हैं।