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राजस्थान के राज्यपाल का इंटरव्यू:सत्र को लेकर सरकार से खींचतान पर गवर्नर बोले- 1200 लोगों की सुरक्षा का सवाल था, इसलिए 3 पॉइंट पर जवाब मांगा; नियमों के तहत प्रस्ताव भेजा तो मंजूरी दी

जयपुर2 वर्ष पहले
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राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव 3 बार लौटाने के बाद चौथी बार प्रस्ताव को मंजूरी दी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव 3 बार लौटाने के बाद चौथी बार प्रस्ताव को मंजूरी दी। (फाइल फोटो)
  • सरकार से 7 दिन टकराव के बाद राज्यपाल ने 14 अगस्त से सत्र बुलाने की मंजूरी दी
  • गवर्नर ने सत्र बुलाने से पहले 21 दिन का नोटिस देने की शर्त रखी थी

(प्रेम प्रताप सिंह). विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर राजभवन और सरकार के बीच 7 दिन टकराव की स्थिति रही। राज्यपाल कलराज मिश्र कांग्रेस के निशाने पर रहे। राजभवन में धरना-प्रदर्शन किया तो सीएम अशोक गहलोत समेत दूसरे नेताओं ने राज्यपाल पर कमेंट किए। केंद्र सरकार और भाजपा के दबाव में काम करने के आरोप, सत्र के प्रस्ताव लौटाने समेत दूसरे अहम मुद्दों पर पहली बार राज्यपाल मिश्र ने भास्कर से बातचीत की।

सवालः सरकार ने 31 जुलाई से सत्र बुलाए जाने को लेकर तीन बार प्रस्ताव भेजा, आखिर आपने अनुमति क्यों नहीं दी?
जवाबः मैंने कभी मना नहीं किया। संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत कैबिनेट की सलाह पर राज्यपाल के रूप में मेरे संवैधानिक दायित्व हैं। सरकार ने नियमों के मुताबिक प्रस्ताव नहीं भेजे। इस वजह से हर बार लौटाए गए।

सवालः आपने अब प्रस्ताव कैसे मंजूर कर लिया?
जवाबः नियम के मुताबिक प्रस्ताव मिलते ही 14 अगस्त से सत्र की मंजूरी दी है। कोरोना का संक्रमण काफी ज्यादा है। एक महीने में एक्टिव केस तीन गुना से ज्यादा बढ़ गए। ऐसे में बिना वजह सत्र बुलाकर 1200 से ज्यादा लोगों की जिंदगी को खतरे में क्यों डाला जाए? इसलिए सरकार से 3 पॉइंट पर कार्यवाही की उम्मीद की जा रही थी।

सवालः क्या संवैधानिक तौर पर सत्र बुलाने के लिए अनुमति की जरूरत है या सरकार अपने स्तर पर भी सत्र बुला सकती है?
जवाबः संविधान के तहत कैबिनेट की सलाह पर राज्यपाल ही सत्र बुला सकते हैं। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सत्र के लिए वारंट राज्यपाल ही जारी करते हैं।

सवालः आरोप लग रहा है कि आप केंद्र और भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। सच क्या है?
जवाबः आरोप निराधार है। संविधान और नियमों के तहत काम किया जा रहा है।

सवालः आपकी 1995 की एक तस्वीर वायरल हो रही है। उस समय आप राजभवन में विधायकों के साथ धरने पर हैं। क्या भूमिका बदलने के साथ चीजें बदल जाती हैं?
जवाबः 1995 में बसपा नेता मायावती पर मीराबाई गेस्ट हाउस में तत्कालीन सीएम की शह पर कुछ आपराधिक तत्वों ने हमला किया। उस समय मैं उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष था। मायावती को न्याय दिलाने के लिए शांतिपूर्वक, मर्यादित तरीके से हम तात्कालिक राज्यपाल मोतीलाल वोरा से निवेदन के लिए राजभवन के बाहर इकट्ठे हुए थे। जहां तक चीजें बदलने का सवाल है तो मैंने राजस्थान के राज्यपाल के तौर पर विधायकों को सम्मान के साथ राजभवन में एंट्री दी, लेकिन उन्होंने नारेबाजी की।

सवालः पहले सीएम ने कहा कि जनता राजभवन का घेराव करेगी तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी, फिर विधायकों ने राजभवन में धरना-प्रदर्शन किया? इसे आपने किस रूप में लिया?
जवाबः किसी भी राज्य के सीएम के तौर पर इस तरह का बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे मैं आहत हुआ, इसलिए मैंने उन्हें पत्र भी भेजा।

सवालः राजस्थान में कांग्रेस के विधायक जिस तरह से बाड़ेबंदी में फंसे हैं? इसे लेकर क्या आपने केंद्रीय गृह मंत्रालय को कोई रिपोर्ट भेजी है?
जवाबः केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजनी है या नहीं, यह सार्वजनिक विषय नहीं है।

सवालः राजस्थान में मौजूदा सियासी संकट को आप किस तरह से देख रहे हैं?
जवाबः प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। इससे आम आदमी के हित प्रभावित होते हैं।

सवालः इस टकराव का राज्यपाल और सीएम के बीच संबंधों पर कुछ असर पड़ेगा?
जवाबः टकराव जैसी कोई बात नहीं है। अशोक गहलोत जी से मेरे संबंध अच्छे हैं। वे समय-समय पर राजभवन आते रहते हैं। मेरा उनके प्रति स्नेह है।

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