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7 महीने में 5 विवाद:शपथ लेने के दिन से ही ग्रेटर मेयर सौम्या का सरकार से होता रहा है सीधा टकराव

जयपुर9 दिन पहले
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कमिश्नर-मेयर विवाद में शहर में सफाई का बेहाल है। कमिश्नर यज्ञमित्र देव सिंह के घर के पास बने पार्क के नजदीक सड़क पर  कचरा फैला हुआ है। लोगों के साथ जानवरों के भी बीमार होने का अंदेशा बना हुआ है। यह हालात यही नहीं हैं। एसएमएस अस्पताल से लेकर कई प्रमुख स्थानों पर भी कचरा बिखरा हुआ है।
फोटो : महेंद्र शर्मा - Dainik Bhaskar
कमिश्नर-मेयर विवाद में शहर में सफाई का बेहाल है। कमिश्नर यज्ञमित्र देव सिंह के घर के पास बने पार्क के नजदीक सड़क पर कचरा फैला हुआ है। लोगों के साथ जानवरों के भी बीमार होने का अंदेशा बना हुआ है। यह हालात यही नहीं हैं। एसएमएस अस्पताल से लेकर कई प्रमुख स्थानों पर भी कचरा बिखरा हुआ है। फोटो : महेंद्र शर्मा

शहर सरकार की मुखिया बनने से बाद से ही लगातार सौम्या गुर्जर और प्रदेश सरकार में 7 महीने से हर मुद्दे को लेकर सीधा टकराव होता रहा है। चाहे मामला बंटवारे का हो या समितियों के गठन का या फिर परशुराम सर्किल से कच्ची बस्तियों को हटाने का...हर बार विवाद होते रहे। इस बार सफाई कंपनी बीवीजी को लेकर मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि सीधे-सीधे शहर सरकार और यूडीएच आमने-सामने हो गए।

विवाद कोई भी हो...हारे-जीते कोई भी पर इतना को तय है कि इस पूरे प्रकरण में शहर के विकास का ‘कचरा’ होना तय है। शुक्रवार को विवाद तब ज्यादा बढ़ गया जब मेयर ने कमिश्नर पर सीधे-सीधे बीवीजी से पैसे लेने का आरोप लगाया और कमिश्नर ने ज्योतिनगर थाने में मेयर समेत 10 पार्षदों के खिलाफ अपशब्द कहने और मारपीट का मामला दर्ज कराया था।

इस पूरे विवाद की जांच डीएलबी में तैनात आरएएस रेणू खंडेलवाल कर रही हैं। दूसरी ओर, इन सब विवादों के बीच बीवीजी कंपनी ने हड़ताल स्थगित कर सफाई शुरू कर दी है।

सफाईकर्मियों और संसाधनों के बंटवारे, कमेटियां रद्द करने, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण पर हो चुका है विवाद

  • 1. 10 नवंबर 2020 को मेयर सौम्या गुर्जर मेयर बनी। 26 नवंबर को ग्रेटर नगर निगम व हेरिटेज नगर निगम में संसाधन व कर्मचारियों के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। हेरिटेज के 113 स्क्वायर किमी एरिया में 4072 कर्मचारी रोजाना उठाएंगे 640 मीट्रिक टन कचरा, ग्रेटर निगम के 274 स्क्वायर किमी एरिया में 3217 कर्मचारी रोजाना उठाएंगे 837 मीट्रिक टन कचरा।
  • 2. ग्रेटर नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक 28 जनवरी 2021 को बुलाई गई, जिसमें समितियों की घोषणा व नए चेयरमैनों के काम का बंटवारा कर दिया गया, लेकिन 8 फरवरी को निगम कमिश्नर की ओर से कमेटियों के प्रस्ताव पर आपत्ति लगाकर राज्य सरकार को भेजा गया, जिस पर 14 फरवरी को राज्य सरकार ने कमेटियों को निरस्त कर दिया। मेयर 25 फरवरी को कोर्ट में चली गई, जब से मामला अदालत में ही विचाराधीन है।
  • 3. मार्च में ही कमिश्नर द्वारा निगम की गार्डन शाखा व सिविल वर्क के ठेकेदारों का भुगतान किया जा रहा था। उस दौरान मेयर सौम्या ने 13 मार्च को एसीबी को पत्र लिखकर भुगतान निगरानी में करने को कहा गया।
  • 4. 23 मई को ग्रेटर नगर निगम की ओर से विद्याधरनगर कि परशुराम सर्किल के पास रहने वाले करीब 100 से ज्यादा लोगों के अस्थाई निवास उजाड़ दिए गए। निगम कमिश्नर ने अतिक्रमण बताते हुए कार्रवाई किए जाने की बात कही। लॉकडाउन के बीच हुई इस कार्रवाई के लिए मेयर व कमिश्नर ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। मामला सरकार तक भी पहुंचा।
  • 5. 2 जून को बीवीजी कंपनी को भुगतान का मामला कमिश्नर के पास पहुंचा तो कमिश्नर ने फाइल मेयर के पास भेज दी। उस दौरान डोर टू डोर सफाई का कार्य कर रही कंपनी ने हड़ताल शुरू कर दी मेयर ने जांच के बाद भुगतान के निर्देश दिए तो मेयर व कमिश्नर के बीच विवाद खड़ा हो गया।

2009 में भी मेयर और कमिश्नर का विवाद गूंजता रहा

मेयर व कमिश्नर के बीच का विवाद नया नहीं है। 2009 में जनता से चुनकर आई कांग्रेस की पहली मेयर ज्योति खंडेलवाल का कार्यकाल शुरू होने के एक साल बाद ही कमिश्नर से विवाद हो गया। उस दौरान भी यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ही थे तब ज्योति खंडेलवाल और कमिश्नर जगरूप सिंह यादव में जबरदस्त विवाद चला। कांग्रेस के कई नेता कमिश्नर के पक्ष में आए।

इससे पहले भी ज्योति खंडेलवाल का तत्कालीन निगम सीईओ राजेश यादव व लोकनाथ सोनी से विवाद रहा। उस दौरान भी नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल व अन्य कांग्रेसी नेताओं ने अपनी ही पार्टी की मेयर की खिलाफत की। नतीजा यह रहा कि मेयर व कमिश्नर के झगड़े के चलते विकास कार्य ठप हो गए।

नौबत यहां तक पहुंच गई कि नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने जयपुर नगर निगम को नरक निगम तक कह दिया। जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। बाद में मंत्री की शिकायत करने ज्योति खंडेलवाल दिल्ली पहुंची और सोनिया गांधी व राहुल गांधी से उनकी शिकायत कर डाली। खंडेलवाल को पूरे कार्यकाल के दौरान विवादित ही माना गया।

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