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भाजपा विधायक दल की बैठक में जुबानी जंग:गुलाबचंद कटारिया- कैलाश मेघवाल के बीच जमकर बहस, मेघवाल ने चिट्ठी विवाद पर कटारिया को निशाने पर लिया, नाराज कटारिया ने इस्तीफे की धमकी दी

जयपुर2 महीने पहले
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  • कैलाश मेघवाल कटारिया से बोले, दो साल से पार्टी का सचेतक नहीं, जब शिकायत की तो पार्टी विरोध से जोड़ दिया
  • कटारिया का पलटवार, कहा, विधानसभा में बोलने के लिए रात काली करनी पड़ती है, आपकी तरह आधे घंटे पर्यटन स्थल की तरह बैठकर चले जाने से काम नहीं चलता

भाजपा विधायक दल की बैठक में वरिष्ठ नेताओं के बीच उभरे मतभेद खुलकर सामने आ गए। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल और नेता प्रतिपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित चिट्‌ठी लिखने वाले विधायक भी मौजूद थे। बैठक में राजे खेमे से कैलाश मेघवाल के अलावा कोई नहीं बोला। मेघवाल और कटारिया की तकरार में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी शरीक हुए लेकिन वसुंधरा राजे पूरी बैठक में कुछ नहीं बोलीं, केवल सुनती रहीं। विधानसभा में भाजपा विधायक दल की बैठक शुरू होते ही मेघवाल ने चिट्ठी विवाद पर बोलना शुरू किया। मेघवाल ने कटारिया पर निशाना साधते हुए चिट्ठी को विवाद बनाने,अब तक सचेतक नहीं होने, पर्ची सिस्टम बंद होने पर चुप रहने सहित कई मामलो पर गुलाबचंद कटारिया पर सवाल उठाए। मेघवाल के आरोपों का कटारिया ने भी तल्खी से जवाब दिया और यहां तक कह दिया कि मुझे बनाने वाले से कहलवा दो, दो मिनट में इस्तीफा दे दूंगा।

कटारिया से बोले कैलाश मेघवाल, दो साल से पार्टी का सचेतक क्यों नहीं है, फ्लोर संभालना आपका नहीं सचेतक का काम
गुलाबंचद कटारिया पर निशाना साधते हुए कैलाश मेघवाल बोले, विधानसभा के फ्लोर को संभालना और सदन में कौन बोले यह तय करना सचेतक का काम है आपका नहीं, आपने अब तक सचेतक क्यों नहीं बनाया? राजेंद्र राठौड़ को आपने तत्काल उपनेता बना दिया लेकिन आज दो साल से ज्यादा हो गए सचेतक ही नहीं है। सचेतक के अभाव में अव्यवस्था हुई और जब विधायकों ने पीड़ा जताते हुए इसकी शिकायत की तो उसे पार्टी की खिलाफत से जोड़ दिया। जब स्पीकर ने पर्ची सिस्टम खत्म किया उस वक्त नेता प्रतिपक्ष के नाते आपने विरोध क्यों नहीं किया, चुपचाप उस गलत फैसले को मान कैसे लिया?

कटारिया बोले, जिसने मुझे जिम्मेदारी दी है उससे कहलवा दीजिए इस्तीफा देने में दो मिनट नहीं लगेंगे

कैलाश मेघवाल के आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया तैश में आ गए। कटारिया ने कहा, जिन 20 विधायकों को सदन में बोलने का मौका नहीं देने का बतंगड़ बनाकर चिट्ठी लिखी गई उसकी हकीकत भी सुन लीजिए। 20 में से 13 विधायकों ने तो स्थगन ही नहीं ​लगाया, 4 का स्थगन उस स्तर का था नहीं और बचे हुए तीन विधायक जिनमें प्रतापसिंह सिंघवी भी शामिल हैं वे सदन में बोले हैंं। अब इसमें भेदभाव वाली बात कहां से आ गई, कम से कम अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिए तो सही। कटारिया यही नहीं रुके और कहा, आपको मेरे से ही तकलीफ ​है तो जिसने मुझे जिम्मेदारी दी है वहां से कहलवा दीजिए, मैं इस्तीफा देने में दो मिनट नहीं लगाउंगा, लेकिन जब तक जिम्मेदारी है तब तक निष्ठा से निभाउंगा।

विधानसभा में बोलने के लिए रात काली करनी पड़ती है, आपकी तरह आधे घंटे पर्यटन स्थल की तरह बैठकर चले जाने से काम नहीं चलता
कटारिया ने कैलाश मेघवाल पर तंज कसते हुए कहा, आगे भी सुन लीजिए, विधानसभा में बोलने के लिए रात काली करनी पड़ती है,रात भर जागकर तैयारी करते हैं तब जाकर यहां सदन में बोल पाते हैं। आपकी तरह नहीं है कि आधे घंटे के लिए पर्यटक की तरह आ गए और बैठ कर चले गए। पर्यटन स्थल की तरह बैठकर चले जाने से काम नहीं चलता।

राजेंद्र राठौड़ ने कहा, बजट बहस की शुरुआत ही कैलाश मेघवाल करें,सभी 20 विधायक बजट बहस में बोलें
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा, जो विधानसभा में बोलने का मौका नहीं देने की बात कह रहे हैं उनकी शिकायत कल ही दूर कर दी जाएगी। कल शिकायत करने वाले 20 विधायक ही बजट पर बोलेंगे, बजट बहस की शुरुआत ही कैलाश मेघवाल करेंगे, फिर तो कोई शिकायत नहीं है। राठौड़ के इतना कहने के बावजूद भी कैलाश मेघवाल सहित चिट्ठी लिखने वाले विधायकों में से किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी।

विधायक दल की बैठक से साफ संकेत,चिट्ठी विवाद सुलझा नहीं, असली मुद्दा नेतृत्व की लड़ाई

प्रभारी महामंत्री अरुण सिंह के चिट्ठी विवाद के मुख्य सूत्रधारों को तलब करने के अगले ही दिन हुई विधायक दल की बैठक में नेताओं के बीच जुबानी जंग से कई तरह के राजनीतिक संकेत मिल गए हैं।। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मसला केवल विधानसभा में बोलने भर का नहीं है, चिट्‌ठी विवाद तो एक टेस्ट टूल भर है। असली मुद्दा और है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे न कोर ग्रुप की बैठक में बोलीं थीं और न विधायक दल की बैठक में। इस पूरे विवाद को नेतृत्व की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा है और विधायक दल की बैठक में इसकी साफ झलक देखने को मिल गई।

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