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  • Haryana's Sports Budget Is 4 Times More, Job reward Is Also Giving From 20 Years Ago, 30 Players There In This Olympics, Only 4 Of Us

हरियाणा vs राजस्थान:हरियाणा का खेल बजट 4 गुना ज्यादा, नौकरी-इनाम भी 20 साल पहले से दे रहे, इस ओलिंपिक में वहां के 30 खिलाड़ी, हमारे सिर्फ 4

जयपुर12 दिन पहलेलेखक: संजीव गर्ग
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करीब 8.24 करोड़ की जनसंख्या वाले राजस्थान से सिर्फ 4 खिलाड़ी, जबकि 2.93 करोड़ की आबादी वाले हरियाणा के 30 खिलाड़ी ओलिंपिक में हिस्सा लेंगे। - Dainik Bhaskar
करीब 8.24 करोड़ की जनसंख्या वाले राजस्थान से सिर्फ 4 खिलाड़ी, जबकि 2.93 करोड़ की आबादी वाले हरियाणा के 30 खिलाड़ी ओलिंपिक में हिस्सा लेंगे।
  • हमारा पड़ोसी राज्य खेलों में सबसे बड़ी ताकत, हमारे बच्चे करिअर बनाने वहां बस रहे

टोक्यो में 23 जुलाई से ओलिंपिक का आगाज हो रहा है। ओलिंपिक के शुभंकर यानी मैस्काॅट काे मिराइतोवा और सोमाइटी नाम दिया है। मिराइताेवा एक जापानी कहावत से प्रेरित है, जिसका अर्थ होता है- अतीत से सीखो और नए विचारों को विकसित करो। राजस्थान काे आज इसी आदर्श वाक्य को अपनाने की जरूरत है।

करीब 8.24 करोड़ की जनसंख्या वाले राजस्थान से सिर्फ 4 खिलाड़ी, जबकि 2.93 करोड़ की आबादी वाले हरियाणा के 30 खिलाड़ी ओलिंपिक में हिस्सा लेंगे। राजस्थान हर लिहाज से हरियाणा से पीछे है। 12 लाख करोड़ की जीडीपी वाले राजस्थान का खेल बजट मात्र 100 करोड़ रुपए है, जबकि 9 लाख करोड़ की जीडीपी वाले हरियाणा का खेल बजट 394 करोड़ रुपए है। यही वजह है कि खेलों में हरियाणा का दबदबा है। ओलिंपिक में हरियाणा 7 मेडल जीत चुका है, जबकि राजस्थान सिर्फ एक।

राजस्थान

  • आबादी-8.24 करोड़
  • जीडीपी-12 लाख करोड़ रु.
  • खेल बजट-100 करोड़
  • अब तक ओलिंपिक मेडल-1

हरियाणा

  • आबादी-2.93 करोड़
  • जीडीपी-9 लाख करोड़ रु.
  • खेल बजट-394 करोड़
  • अब तक ओलिंपिक मेडल-7

हरियाणा तैयारी के लिए 15 लाख रु. देता है और राजस्थान सिर्फ 5 लाख

1. हरियाणा में मेडलिस्ट को नौकरी की पहल 20 साल पहले
हरियाणा :
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाने वाले खिलाड़ी को आउट ऑफ टर्म नौकरी की पॉलिसी की शुरुआत 2001 में ही कर दी गई थी।
राजस्थान : ओलिंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले सीधे डीएसपी वगैरह बनने लगे हैं। पहले ऐसा नहीं था।

2. वहां ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को 6 करोड़, यहां 3 करोड़
हरियाणा :
2001 में ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को 3 करोड़ रु. देते थे। अब 6 करोड़ देते हैं। ओलिंपिक तैयारी के लिए 15 लाख देते हैं।
राजस्थान : 2020 के बजट में ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को 3 करोड़ रु. देने की घोषणा। ओलिंपिक तैयारी के लिए 5 लाख मिलते हैं।

3. राजस्थान का खेल बजट 100 करोड़, हरियाणा का 394 करोड़
हरियाणा :
पिछले तीन साल का औसत खेल बजट 300 करोड़ से ज्यादा है। इस बार 394 करोड़। हरियाणा की जीडीपी 9 लाख करोड़ है।
राजस्थान : 2019-20 में खेल बजट 50 करोड़, 2020-21 में 90 करोड़ था। इस बार 100 करोड़। राजस्थान की जीडीपी 12 लाख करोड़ है।

4. वहां साई के 22 सेंटर, यहां सिर्फ 9
हरियाणा :
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के एसटीसी सेंटर, एक्सटेंशन सेंटर, सेंटर अॉफ एक्सीलेंस आिद मिलाकर 22 सेंटर हैं।
राजस्थान : 9 ही सेंटर हैं। यही कारण है कि राजस्थान के खिलाड़ी नेशनल लेवल की ट्रेनिंग के लिए हरियाणा जैसे राज्यों में जाते हैं।

5. हरियाणा में काेच काे 20 लाख इन्सेंटिव, यहां कुछ नहीं
हरियाणा :
इंटरनेशनल मेडल जीतने वाले खिलाड़ी के कोच को 2 से लेकर 20 लाख तक का इन्सेंटिव। वहां 800 से ज्यादा कोच हैं।
राजस्थान : कोच को इस तरह का कोई इन्सेंटिव नहीं दिया जाता। प्रदेश में खिलाड़ियों को तैयार करने वाले 150 से भी कम कोच।

6. स्कूल-कॉलेज नेशनल मेडलिस्ट को कैश अवाॅर्ड भी नहीं
हरियाणा :
स्कूल और कॉलेज नेशनल मेडलिस्ट को भी 20 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक कैश अवाॅर्ड दिया जाता है।
राजस्थान : इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि पिछले बजट में राजस्थान ने खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता डबल किया था।

भास्कर एक्सपर्ट पैनल: अखिल कुमार(ओलिंपियन), गोपाल सैनी (ओलिं‌पियन), सागरमल धायल (द्रोणाचार्य अवार्डी बॉक्सिंग कोच)

इसलिए हरियाणा जा रही प्रतिभाएं

आशा कुमारी : हिसार में कर रही है बॉक्सिंग की ट्रेनिंग

चूरू की आशा हिसार में बॉक्सिंग की तैयारी कर रही हैं। सात साल में जयपुर सहित कई स्थानों पर कोशिश की, लेकिन नियमित ट्रेनिंग नहीं मिली। अब हिसार में महावीर स्टेडियम में तैयारी कर रही हैं।

मुकेश ढाका : जींद में सीख रहे हैं कबड्‌डी के दांव-पेंच

सीकर के मुकेश दो साल से जींद में प्रो-कबड्‌डी टीम के खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं। मुकेश ने बताया कि सप्ताह में एक बार मैट पर तैयारी कराई जाती हैं। राजस्थान में न मैट मिलती है, न काेच।

-इनपुट : इशांत वशिष्ठ

पहले शिक्षा और खेल विभाग में कोआर्डिनेशन बढ़ाना होगा, तभी मेडल के सपने संभव होंगे

खेलों में राजस्थान को आगे लाना है तो स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट और एजुकेशन डिपार्टमेंट में कोआर्डिनेशन बढ़ाना होगा। पड़ोसी राज्यों के खेल बजट कई गुना अधिक हैं। राजस्थान को बजट और खेलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा। 8वीं और 9वीं कक्षा से ही लड़के-लड़कियों को तैयार करना होगा।

खेलों के लिए नौकरियां रिजर्व रखनी होगी ताकि खिलाड़ी खेलों में अपने जीवन को निवेश के रूप में देखें। मेडल जीते हुए खिलाड़ियों को एकेडमी खोलने के लिए मदद देनी होगी। मोदी सरकार की खेलो इंडिया से जुड़कर राज्यों को फायदा लेना होगा। खिलाड़ियों को इन्सेंटिव भी देना होगा, तभी हमारी भागीदारी बढ़ेगी।