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इस्तीफा देने वाले पायलट समर्थक MLA को स्पीकर का बुलावा:हेमाराम चौधरी को विधानसभा स्पीकर ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद पेश होने को कहा, ई-मेल और डाक से भेजा इस्तीफा मंजूर नहीं होगा

जयपुर5 महीने पहले
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हेमाराम चौधरी और स्पीकर सीपी जोशी। - Dainik Bhaskar
हेमाराम चौधरी और स्पीकर सीपी जोशी।

सचिन पायलट कैंप के वरिष्ठ नेता और असंतुष्ट विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे पर फैसला होने में अभी वक्त लगेगा, यह मामला कुछ समय के लिए आगे खिसक गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने हेमाराम चौधरी को लॉकडाउन खत्म होने के बाद व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद सात दिन की अवधि में पहले सूचना देकर हेमाराम चौधरी को अध्यक्ष के सामने पेश होने को कहा गया है। स्पीकर हेमाराम से उनके डाक और ईमेल से भेजे गए इस्तीफे पर उनकी राय जानेंगे। इससे यह भी साफ हो गया है कि अध्यक्ष ई मेल और डाक से भेजा गया हेमाराम का इस्तीफा बिना उनके पेश हुए मंजूर नहीं करेंगे।

असंतुष्ट विधायक हेमाराम चौधरी ने 18 मई को विधानसभा अध्यक्ष को डाक और ई मेल से इस्तीफा भेजा था। हेमाराम ने विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम 173 (3) का हवाला देते हुए इस्तीफा भेजा था। किसी विधायक के इस्तीफा देने की प्रक्रिया विधानसभा के प्रक्रिया या कार्य संचालन नियम 173 में दी हुई है। इस नियम में प्रावधान है कि कोई भी विधायक पद त्याग करना चाहे तो अध्यक्ष को लिखित सूचना देगा। अगर अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस्तीफा देता है तो अध्यक्ष उस इस्तीफे को तुरंत स्वीकार कर सकते हैं । डाक से मिले इस्तीफे पर अध्यक्ष उसकी जांच करने के लिए विधायक को पेश होने के लिए कहते हैं, हांलाकि बाध्यता नहीं है।

डाक से मिले इस्तीफे पर फैसला अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर
विधानसभा के प्रक्रिया व कार्य संचालन नियम 173 (3) के प्रावधानों के अनुसार विधायक के डाक से मिले इस्तीफे पर अध्यक्ष अपवनी संतुष्टि के लिए जांच करते हैं कि यह इस्तीफा सही है या गलत। क्या इस्तीफा दबाव में तो नहीं दिया है। इस्तीफे की सत्यश्ता की पुष्टि की जांच के लिए अध्यक्ष अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें विधायक को पेश होने के लिए कहा जाता है। अध्यक्ष विधायक से इस्तीफे के बारे में पूछते हैं, इसके बाद भी विधायक इस्तीफा देने पर अडिग रहते हैं तो अध्यक्ष के पास इस्तीफा मंजूर करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होता।

हेमाराम के मामले में अब तीन स्थितयां, हेमाराम इस्तीफे पर अड़े रहे तो मंजूर करना होगा
हेमाराम चौधरी ने 18 मई को डाक और ई मेल से इस्तीफा भेजा था। अध्यक्ष ने हेमाराम को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। अगर हेमाराम चौधरी लॉकडाउन खत्म होने के बाद अध्यक्ष के सामने पेश होकर इस्तीफा देने की बात दोहराते हैं तो अध्यक्ष को इस्तीफा स्वीकार करना होगा।
हेमाराम पेश नहीं होते हैं तो लंबित हो जाएगा इस्तीफा

दूसरा विकल्प है हेमाराम पेश ही न हो। हेमाराम अगर अध्यक्ष के सामने पेश नहीं होते हैं तो फैसला अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करता हैं आम तौर पर डाक से भेजा इस्तीफा शायद ही मंजूर हो। ऐसे में अध्यक्ष फैसले को लंबित भी रख सकते हैंं। तीसरी स्थित है- हेमाराम चौधरी इस्तीफा वापस भी नहीं लेते हैं और अध्यक्ष के सामने पेश भी नहीं होते हैं तो यह प्रकरण लंबित रहेगा। अध्यक्ष इसे लंबित रख सकते हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात में इस्तीफा लंबित रहने के ही आसार ज्यादा हैं।

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