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रेमडेसिविर के डोज कम, कोरोना ओवरडोज:हे सरकार! दवा दे दो, नहीं तो दुआ की जरूरत पड़ेगी; शहर में अब तक के सबसे ज्यादा 1963 संक्रमित, संक्रमण दर सर्वाधिक 17.79%

जयपुर5 महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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ये डॉ. कुलश्रेष्ठ हैं; रेमडेसिविर के लिए 2 दिन से अस्पताल में हैं - Dainik Bhaskar
ये डॉ. कुलश्रेष्ठ हैं; रेमडेसिविर के लिए 2 दिन से अस्पताल में हैं
  • विभाग का दावा-हमारे पास 10 हजार डोज हैं... स्टॉकिस्टों के पास सिर्फ 691 ही
  • निजी अस्पतालों में बढ़ी रेमडेसिविर की डिमांड, स्टॉकिस्टों को भी सप्लाई नहीं कर रहीं कंपनियां

सरकार और चिकित्सा विभाग का दावा है कि कोरोना के गंभीर होते मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी दवा रेमडेसिविर की कमी नहीं है और अब निजी अस्पताल भी आसानी से उपलब्ध करा पा रहे हैं। मामले में जब भास्कर ने रविवार को इसकी पड़ताल की तो चौंकाने नहीं डराने वाली हकीकत सामने आई। सरकारी दावों को मानें तो उनके पास रेमडेसिविर इंजेक्शन का 10 हजार का स्टॉक है, जबकि लगभग आधा स्टॉक प्रदेश के जिलों में सप्लाई किया जा चुका है।

भास्कर ने शहर के स्टॉकिस्टों से स्टॉक के बारे में पूछा तो पता चला कि सभी के पास कुल मिलाकर महज 691 डोज ही उपलब्ध हैं। कंपनी से स्टॉक की कमी का हवाला देते हुए सप्लाई कम होनी बताई जा रही है। न केवल कोविड अस्पतालों में अब रेमडेसिविर बहुत सोच-समझकर और अतिगंभीर मरीजों को लगाई जाने लगी है। निजी अस्पताल तीमारदारों से इंजेक्शन लाने को कह रहे हैं। वहीं, मेडिकल स्टोर आउट ऑफ स्टॉक बता रहे हैं। ऐसे में मरीजों की जान पर बन आई है। मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टर्स रेमडेसिविर की जरूरत बता रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में रेमडेसिविर नहीं मिल रहा है।

राजधानी के साथ अजमेर, जोधपुर और उदयपुर में भी नहीं मिल रही रेमडेसिविर
अजमेर के एक निजी अस्पताल में भर्ती जया को रेमडेसिविर की जरूरत पड़ी। शनिवार को भर्ती जया को रविवार देर रात तक भी रेमडेसिविर नहीं मिल पाया। परिजनों ने कहीं से एक डोज की तो व्यवस्था की, लेकिन अब उन्हें कह दिया गया है कि अन्य डोज का इंतजाम पहले ही खुद से कर लें। परिजन चिंतित हैं कि 24 घंटे में दूसरी डोज कहां से लाएं। जोधपुर और उदयपुर में भी यही हाल हैं।

किसी भी अस्पताल में रेमडेसिविर नहीं है। चिकित्सा विभाग को किसी भी तरह उपलब्धता करानी चाहिए। कई बार कहने के बाद भी अस्पतालों में दवा नहीं मिल रही है।
- डॉ. विजय कपूर, सेक्रेट्री, पीएचएनएस।

मेन्युफैक्चरिंग के हिसाब से खपत अधिक है। केन्द्र से ही दवा नहीं आ रही, यहां कहां से दे सकते हैं। वैसे हमारा अस्पतालों को देने के लिए डायरेक्ट लिंक भी नहीं है।
- डॉ. हंसराज, सीएमएचओ-2, जयपुर

थोड़ी राहत की ‘सांस’ ले सकते हैं...
कलेक्टर का आदेश; ऑक्सीजन के 300 सिलेंडर का स्टॉक जरूर रखें सरकारी-निजी अस्पताल
जयपुर |
दवा के बाद अब अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ने वाली है। जिले में सरकारी व निजी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑक्सीजन गैस सिलेंडर की समय पर आपूर्ति के लिए कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने गैस सिलेंडर का बफर स्टॉक रखने के आदेश दिए है। शहर में विश्वकर्मा, झाेटवाडा, बगरू, सीतापुरा, अग्रवाल फार्म इंडस्ट्रियल एरिया में ऑक्सीजन बनाने के पांच कारखाने है। पांचों फैक्ट्रियाें काे गैस का उत्पादन बढ़ाने और नए सिलेंडर बनाने काे कहा है।

अब ‘भगवान’ भी लाचार- ये डॉ. कुलश्रेष्ठ हैं; रेमडेसिविर के लिए 2 दिन से अस्पताल में हैं
डॉ. ओपी कुलश्रेष्ठ एसएमएस में नेत्र रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद डॉ. कुलश्रेष्ठ को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स ने रेमडेसिविर की जरूरत बताई, लेकिन इंजेक्शन कहीं नहीं मिली। अन्तत: सभी डॉक्टर्स को इसकी जानकारी दी गई और सोशल मीडिया के माध्यम से रेमडेसिविर की डिमांड की गई, लेकिन रविवार देर रात तक भी उन्हें दवा नहीं मिल पाई। वे फिलहाल गंभीर हालत में हैं।

7 दिन में लगना जरूरी रेमडेसिविर
रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है। कोरोना संक्रमण के दौरान इस दवा के काफी सकारात्मक परिणाम रहे हैं। किसी भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति में लंग्स इंफेक्शन होने के सात दिन के भीतर रेमडेसिविर देनी होती है। इन दिनों रेमडेसिविर कोरोना की सबसेे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवा है और सात दिन के भीतर पांच डोज दी जाती हैैं। हर दिन लिक्विड फॉर्म में यह डोज दी जाती है और इससे इंफेक्शन काफी कम होने की उम्मीद रहती है।

डर में रहें; घर में रहें ...क्योंकि 97 इलाकाें में फैला कोरोना

अनाथ बच्चों से बचकानी हरकत...तस्वीर आरयूएचएस की है। पुलिस रविवार को एक अनाथ आश्रम से बच्चों को जांच के लिए लाई। जल्दी जांच कराने का कहकर उन्होंने बच्चों को इमरजेंसी में फर्श पर ही बिठा दिया। हालांकि बच्चों में सैचुरेशन सही था और क्लीनिकली भी सही थे। होम आइसोलेट कर दिया गया। आरयूएचएस के कोविड इंचार्ज डॉ. अजीत सिंह की मानें तो स्टाफ ने पुलिसकर्मियों को कहा भी था कि इन्हें उचित दूरी से कुर्सियों पर बिठाओ, लेकिन उन्होंने जल्दी जांच कराने को कहा और सबको वहीं बिठा दिया।
अनाथ बच्चों से बचकानी हरकत...तस्वीर आरयूएचएस की है। पुलिस रविवार को एक अनाथ आश्रम से बच्चों को जांच के लिए लाई। जल्दी जांच कराने का कहकर उन्होंने बच्चों को इमरजेंसी में फर्श पर ही बिठा दिया। हालांकि बच्चों में सैचुरेशन सही था और क्लीनिकली भी सही थे। होम आइसोलेट कर दिया गया। आरयूएचएस के कोविड इंचार्ज डॉ. अजीत सिंह की मानें तो स्टाफ ने पुलिसकर्मियों को कहा भी था कि इन्हें उचित दूरी से कुर्सियों पर बिठाओ, लेकिन उन्होंने जल्दी जांच कराने को कहा और सबको वहीं बिठा दिया।

एक दिन में रिकॉर्ड 11032 जांचों में 1963 पॉजिटिव, विधायक दीपेन्द्र सिंह व अमीन कागजी भी संक्रमित
जयपुर |
काेराेना ने रविवार काे पिछले सारे रिकॉर्ड ताेड़ दिए। एक ही दिन में सर्वाधिक 1963 पाॅजिटिव केस मिले। श्रीमाधोपुर विधायक दीपेन्द्र सिंह और किशनपोल विधायक अमीन कागजी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

रविवार को जांचें भी रिकॉर्ड 11032 स्तर पर थी। तभी 24 घंटे में संक्रमण की दर अब तक की सर्वाधिक 17.79 फीसदी रही। चार लोग दम तोड़ चुके हैं। नए मामलाें के साथ अप्रैल के 18 दिन में पाॅजिटिव केस आंकड़ा 14705 पहुंच गया। इससे पहले नवंबर 2020 में 14401 केस मिले थे। 12 अप्रैल काे 961 मामले सामने आए थे। अब तक जयपुर में 75739 संक्रमित में से 556 लोगों की मौत हो चुकी है। रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या 62153 तक पहुंच चुकी है। यही नहीं एक्टिव केसेज का ग्राफ भी बढ़कर 13030 हो गया है।

कमिश्नरेट के 52 थाना इलाके में 564 माइक्रो कंटेंटमेंट जोन बने।

  • 24 घंटे में गाइडलाइन तोड़ने पर 2017 लोगों पर 2.51 लाख जुर्माना।
  • शहर में कर्फ्यू के दौरान 378 जगह पर नाकाबंदी पॉइंट बनाए गए हैं।
  • ईस्ट के 13 थाने में 92 क्षेत्र, वेस्ट के 14 थाने में 156, नॉर्थ में 13 थाने में 172 व साउथ के 12 थाने में 144 माइक्रो कंटेंटमेंट जोन बने हुए हैं।
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