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नकली नोट छापने वाले की फिल्मी कहानी:भाई का इलाज नहीं करा सका तो लखपति बनने निकला, जयपुर में खोला रेस्टोरेंट बंद हुआ; छापने लगा नकली नोट

जयपुर16 दिन पहले
दो लग्जरी गाड़ियां होने के बाद भी गरीबों की तरह रहता था बृजेश मोर्या।

जयपुर में लाखों रुपए के नकली नोट छापकर बाजार में चला चुका सरगना ब्रजेश मोर्या के अपराध में उतरने की दास्तान फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। मूल रूप से मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में माधवगंज के रहने वाले ब्रजेश मोर्या का भाई गंभीर रूप से बीमार हो गया था। तब अस्पताल में आईसीयू में इलाज के लिए डॉक्टर ने 25 हजार रुपए रोजाना के हिसाब से मांगे। जेब में इतने रुपए नहीं थे तो ब्रजेश मोर्या ने इलाज के अभाव में अपने भाई को खो दिया। इसके बाद उसने लखपति बनने की ठान ली।

सपनों को पूरा करने के लिए ब्रजेश करीब आठ साल पहले जयपुर आ गया। यहां उसने छोटा मोटा काम करना शुरू कर दिया। फिर टैक्सी चलाने लगा। कई साल यह काम करने के बाद कोरोना महामारी के पहले जयपुर में एक रेस्टोरेंट भी खोला, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना की वजह से आर्थिक घाटा हुआ। रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। इसके बाद ब्रजेश नकली नोट छापने के धंधे में उतर गया।

एसओजी की गिरफ्त में मध्यप्रदेश का ब्रजेश मोर्या (दांए) और जयपुर का प्रथम शर्मा (बाएं)
एसओजी की गिरफ्त में मध्यप्रदेश का ब्रजेश मोर्या (दांए) और जयपुर का प्रथम शर्मा (बाएं)

जयपुर में गोनेर रोड पर 10 हजार रुपए महीने में एक विला किराए पर लिया। यह विला कल्पना वर्मा नाम की महिला का है। उन्होंने किराएदार का वेरिफिकेशन भी नहीं करवाया था। यहीं ब्रजेश मोर्या पुरानी बस्ती नाहरगढ़ रोड निवासी अपने साथी प्रथम शर्मा के साथ मिलकर हाई टेक स्कैनर और उपकरणों से 200 और 500 के हूबहू असली दिखने वाले नोट छापने लगा।

विला जहां छाप रहे थे नकली नोट।
विला जहां छाप रहे थे नकली नोट।

असली नोट की हूबहू नकली नोट में चिपकाते थे बारीक धागा, ताकि आसानी से पता नहीं चले

सबसे खास बात यह कि ब्रजेश को पता था कि लोग असली नकली नोट की पहचान के लिए सुरक्षा धागा चैक करते हैं। इसलिए वह नकली नोट छापते वक्त उनमें बारीक धागा भी चिपकाता था। आरोपी सफेद लाइन पर धागा चिपकाते थे। इसे नाखुन से कुरेदने पर धागा हट जाता है। जबकि असली नोट में ऐसा नहीं होता है। नकली नोट के कारोबार में काफी पैसा कमाने, मोटे किराए पर महंगा विला लेने और लाखों रुपए कीमत की लग्जरी गाड़ियां उपयोग करने के बावजूद ब्रजेश मौर्या जयपुर में खानाबदोश की तरह रहता था। वह लग्जरी लाइफ में नहीं जीता है। इससे किसी को कुछ शक भी नहीं हुआ।

ब्रजेश मोर्या के पास दो लग्जरी कार मिली
ब्रजेश मोर्या के पास दो लग्जरी कार मिली

1 लाख के नकली नोट देने के बदले लेते थे 40 हजार रुपए के असली नोट
एसओजी की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि एक लाख रुपए के नकली नोट सप्लाई करने के लिए ब्रजेश मौर्या और प्रथम शर्मा अपने ग्राहकों से 40 हजार रुपए के असली नोट लेते थे। ब्रजेश ने सबसे पहले शेखावाटी इलाके में नकली नोट सप्लाई करना शुरू किया। ग्राहकों को बताते थे कि वे यह नकली नोट बांग्लादेश से मंगवाते हैं। उन्होंने यह बात छिपाए रखी कि वे ही नकली नोट छापते हैं। इसके अलावा ग्राहकों से शर्त रखते थे कि वे सिर्फ रात को ही नकली नोट बाजार में चलाएंगे। यह कार्रवाई पुलिस इंस्पेक्टर विजय कुमार रॉय के नेतृत्व में गठित टीम ने की।

विला में 5 लाख से ज्यादा के नकली नोट मिले
विला में 5 लाख से ज्यादा के नकली नोट मिले

नागौर के तीन लड़कों को जयपुर में नकली नोट के साथ पकड़ा, तब पूछताछ में हुआ खुलासा
बता दें कि तीन दिन पहले एसओजी ने जयपुर में टोंक रोड पर रामबाग सर्किल के पास हरियाणा नंबर की एक कार में सवार चार युवकों को पकड़ा था। ये चारों युवक नागौर व झुंझुनूं के रहने वाले थे। डीआईजी शरत कविराज के नेतृत्व में गठित एसओजी की टीम ने चारों युवकों के कब्जे से करीब एक लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोट बरामद किए। तब पूछताछ में सामने आया कि वे गोनेर रोड पर एक अपार्टमेंट स्थित विला से नकली नोट लेकर आए हैं। इसके बाद 13 जुलाई को आधी रात एसओजी ने विला पर छापा मारा। वहां नकली नोट छापते हुए सरगना ब्रजेश मोर्या और प्रथम शर्मा को पकड़ा।

जयपुर में तीन दिन नकली नोट के साथ पकड़े गए चार युवकों से मिला सरगना ब्रजेश का सुराग
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