जब कैमरे ने पहाड़ पर देखे शिवलिंग और नंदी:162 साल बाद भी फोटो क्लिक कर रहा कैमरा, साथ पानी पीते शिकार-शिकारी के फोटो की कहानी

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: रणवीर चौधरी

आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है…राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है, जिसे देश-दुनिया का हर प्रोफेशनल फोटोग्राफर एक अलग नजर से देखता है।

...और जब बात राजस्थान के फोटो की आती है तो मन में रेगिस्तान और बड़े-बड़े किलों की तस्वीर उभरती है, लेकिन आज भास्कर आपके लिए राजस्थान से जुड़े ऐसे चुनिंदा फोटो लाया है, जो इन सबसे जुदा तो हैं ही, लेकिन इन्होंने देश-दुनिया में अलग पहचान भी बनाई है। इसके साथ ही इन फोटो के क्लिक होने के पीछे एक रोमांचक कहानी भी पढ़िए।

इन फोटो के बाद हम आपको दिखाएंगे, 162 साल पुराना दुनिया का इकलौता रनिंग मिंट कैमरा, जिससे आज भी खास पलों को हमेशा के लिए यादगार बनाया जा रहा है।

देखिए- राजस्थान की सबसे खास तस्वीरें और पढ़िए- उनसे जुड़ी कहानी…

जून 2020 में स्टेट वाइल्ड लाइफ कमेटी के मेंबर धीरेंद्र के गोधा ने ये फोटो क्लिक किया। लेपर्ड और नीलगाय दोनों इतने प्यासे थे कि पानी दिखते ही सबकुछ भूल गए। न लेपर्ड ने नीलगाय को देखा, न नीलगाय ने लेपर्ड को।
जून 2020 में स्टेट वाइल्ड लाइफ कमेटी के मेंबर धीरेंद्र के गोधा ने ये फोटो क्लिक किया। लेपर्ड और नीलगाय दोनों इतने प्यासे थे कि पानी दिखते ही सबकुछ भूल गए। न लेपर्ड ने नीलगाय को देखा, न नीलगाय ने लेपर्ड को।

एक साथ पानी पीते शिकार और शिकारी
ये फोटो स्टेट वाइल्ड लाइफ कमेटी के मेंबर धीरेंद्र ने क्लिक किया है। गोधा ने बताया जून 2020 में वे एक दोस्त के साथ झालाना लेपर्ड पार्क गए थे। वहां पक्षियों की आवाज से पता चला कि लेपर्ड आ रहा है।

1 घंटे की तलाश के बाद भी लेपर्ड नहीं मिला तो वॉटर पाइंट पर लौट आए। थोड़ी देर बाद रोड क्रॉस कर लेपर्ड आया, लेकिन हमें देखकर झाड़ियों में छिप गया।

एक घंटे इंतजार के बाद लेपर्ड पानी पीने बाहर निकला। थोड़ी देर में वहां नील गाय आ गई। -हमें लगा अब एक्शन होगा, लेकिन गर्मी इतनी थी कि दोनों का ध्यान सिर्फ पानी पर था।

मैंने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया। पानी पीने के बाद दोनों अपने-अपने रास्ते निकल गए। इस फोटो को न्यूयॉर्क टाइम्स और देश के कई न्यूज पेपर ने पब्लिश किया।

1995 में शाम के समय शिवराज फोटोग्राफी कर रहे थे। तभी सूरज ढलने लगा और लाल रंग की रोशनी आसमान में बिखर रही थी। इस फोटो को ऑस्ट्रेलिया के एक कॉम्पिटिशन में फर्स्ट प्राइज मिला।
1995 में शाम के समय शिवराज फोटोग्राफी कर रहे थे। तभी सूरज ढलने लगा और लाल रंग की रोशनी आसमान में बिखर रही थी। इस फोटो को ऑस्ट्रेलिया के एक कॉम्पिटिशन में फर्स्ट प्राइज मिला।

एक किलोमीटर दूर से लिए फोटो को मिला अवॉर्ड
करौली के इनायती गांव में राव शिवराज पाल इनायती के पूर्वजों का पहाड़ी पर फोर्ट है। उसके नीचे ही उनका फार्म हाउस है।

वर्ष 1995 में फार्म हाउस पर शाम के समय शिवराज फोटोग्राफी कर रहे थे। तभी फोर्ट के पीछे से सूरज ढलने लगा और लाल रंग की रोशनी आसमान में बिखर रही थी।

शिवराज पाल ने करीब एक किलोमीटर दूर से Silhoute टेक्निक(इसमें ऑब्जेक्ट के पीछे से रोशनी आती है) से फोटो लिया था। फोटो लेने के बाद उन्होंने अपने दोस्त सुभाष अवस्थी ने जब यह फोटो भेजा। सुभाष ने ये फोटो ऑस्ट्रेलिया में एक फोटो कॉम्पिटिशन में भेज दिया। इस फोटो को फर्स्ट प्राइज मिला था।

इतिहासकार राव शिवराज ने 7 साल पहले ये गुजरात के एक टापू पर देसी तरीके से खाना बनाती महिलाओं की फोटो सीरीज क्लिक की थी। इस फोटो सीरीज को वर्ष 2015 में ट्रैवल फोटोग्राफी अवॉर्ड मिला।
इतिहासकार राव शिवराज ने 7 साल पहले ये गुजरात के एक टापू पर देसी तरीके से खाना बनाती महिलाओं की फोटो सीरीज क्लिक की थी। इस फोटो सीरीज को वर्ष 2015 में ट्रैवल फोटोग्राफी अवॉर्ड मिला।

टापू पर खाना बनाती महिलाओं की फोटो सीरीज
इतिहासकार राव शिवराज ने बताया कि मैं करीब सात साल पहले गुजरात के नलसरोवर में रामसर साइट गया था। वहां एक टापू पर टूरिस्ट घूमने आते हैं। वीरान टापू के पास दूर-दूर तक खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है।

ऐसे में वहां महिलाओं का एक ग्रुप टूरिस्ट को खाना बनाकर बेचता है। महिलाएं देशी तरीके से चूल्हे पर खाना बनाती हैं।

राव शिवराज ने महिलाओं के खाना बनाते हुए के कई फोटो लिए। इस फोटो सीरीज को वर्ष 2015 में ट्रैवल फोटोग्राफी अवार्ड मिला था।

उदयपुर के बिजनेसमैन सत्येंद्रसिंह ने पांच साल पहले ये फोटो क्लिक किया, जिसमें चट्‌टानें शिवलिंग के पास खडे़ नंदी की तरह दिख रही थी।
उदयपुर के बिजनेसमैन सत्येंद्रसिंह ने पांच साल पहले ये फोटो क्लिक किया, जिसमें चट्‌टानें शिवलिंग के पास खडे़ नंदी की तरह दिख रही थी।

चलती कार से लिए फोटो से मिला नया टूरिस्ट स्पॉट
उदयपुर के रहने वाले सत्येंद्रसिंह ने बताया कि वह बिजनेस करते हैं। करीब पांच साल पहले वह अपने परिवार के साथ भीलवाड़ा जा रहे थे। रास्ते में पालसन के पास एक पहाड़ी पर चट्‌टानों की एक आकृति दिखी। दूर से देखने पर चट्‌टानें शिवलिंग के पास खडे़ नंदी की तरह दिख रही थी।

पहले चलती कार से फोटो लिए फिर कार वापस बैक करके कई फोटो लिए। यह फोटो बाद में फोटो गैलरी में लगे तो लोग इस स्पॉट पर घूमने के लिए जाने लगे। कई फोटो गैलरी में इस फोटो की तारीफ हुई।

रिटायर्ड फोटोजर्नलिस्ट सुरेंद्र जैन पारस ने आजादी के 50 साल पूरे होने पर एसएमएस स्टेडियम में ये फोटो क्लिक किया था, जो बाद में कई पोस्टर और वेबसाइट का हिस्सा बना।
रिटायर्ड फोटोजर्नलिस्ट सुरेंद्र जैन पारस ने आजादी के 50 साल पूरे होने पर एसएमएस स्टेडियम में ये फोटो क्लिक किया था, जो बाद में कई पोस्टर और वेबसाइट का हिस्सा बना।

15 अगस्त का फोटो सरकार ने अपनी वेबसाइट पर लगाया
रिटायर्ड फोटोजर्नलिस्ट सुरेंद्र जैन पारस ने बताया कि करीब 25 साल पहले जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में 15 अगस्त पर फोटो ले रहे थे। उस दौरान स्वाधीनता के 50वें वर्ष के पोस्टर के पास एक शख्स म्यूजिक की प्रस्तुति दे रहा था।

इस फोटो को उन्होंने ऑन द स्पॉट क्लिक किया था। इसके बाद दिल्ली में जनसंपर्क विभाग ने डीपीआर की वेबसाइट पर कवर इमेज लगाया। गवर्नमेंट के कई प्रोग्राम में इस फोटो को पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए।

162 साल पुराना ये दुनिया का इकलौता मिंट कैमरा है, जो रनिंग कंडीशन में है। ब्लैक एंड वाइट फोटो क्लिक कर वाले इस कैमरे का वजन 20 किलो है।
162 साल पुराना ये दुनिया का इकलौता मिंट कैमरा है, जो रनिंग कंडीशन में है। ब्लैक एंड वाइट फोटो क्लिक कर वाले इस कैमरे का वजन 20 किलो है।

जयपुर में दुनिया का इकलौता मिंट कैमरा, 20 किलो वजन
जयपुर के शास्त्रीनगर में रहने वाले टीकमचंद पहाड़ी (56) के पास सन 1860 का मिंट कैमरा है, जिससे वे अब भी हवामहल के पास टूरिस्ट के ब्लैक एंड वाइट फोटो लेते हैं।

टीकमचंद का दावा है कि ये दुनिया का इकलौता मिंट कैमरा है, जो रनिंग कंडीशन में है। अधिकतर कैमरे या तो म्यूजियम में हैं या पर्सनल कलेक्शन में।

ये कैमरा उनके दादा पहाड़ी लाल ने आजादी से पहले खरीदा था। 35 साल दादाजी ने, 34 साल पिताजी ने इस कैमरे से लोगों के फोटो खींचे और अब वे ये कैमरा यूज कर रहे हैं। 20 किलो वजन के 162 साल कैमरे को रिपेयर भी टिकमचंद खुद ही करते हैं।