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परिवार कर्ज में दबा, चीखें भी दबीं:दोनों मासूम बच्चों और पत्नी की चीखें बाहर सुनाई न दे इसलिए चाकू से गला काटते वक्त बढ़ा दी टीवी की आवाज

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
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स्थानीय लोगों ने कहा- गिर्राज अपनी पत्नी व दोनों बच्चों से बहुत प्यार करता था, बच्चों को अक्सर सीने से चिपका कर रखता था। लेकिन तंगी और कर्ज के बोझ से दबकर उसने अपनों को मार डाला। फिर खुद भी मर गया - Dainik Bhaskar
स्थानीय लोगों ने कहा- गिर्राज अपनी पत्नी व दोनों बच्चों से बहुत प्यार करता था, बच्चों को अक्सर सीने से चिपका कर रखता था। लेकिन तंगी और कर्ज के बोझ से दबकर उसने अपनों को मार डाला। फिर खुद भी मर गया
  • वैशाली नगर इलाके में खातीपुरा स्थित बुनकर कॉलोनी की घटना
  • ब्याज और उधारी रकम से तंग होकर सुसाइड नोट, फिर वारदात

शहर के वैशाली नगर इलाके में खातीपुरा स्थित बुनकर कॉलोनी में आर्थिक कर्ज, उधारी रकम पर मोटे ब्याज वसूली से परेशान होकर एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत ने हिलाकर रख कर दिया। सब्जी बेचकर घर में पत्नी व दो मासूम बच्चों का पेट पालने वाले व्यक्ति ने अवसाद में आकर गुरुवार को पहले सब्जी बेचने के चाकू से पत्नी, चार साल की बेटी, डेढ़ साल के बेटे की बेरहमी से हत्या कर डाली। इसके बाद खुद भी फंदा लगाकर जान दे दी।

गिर्राज ने अपनी पत्नी व दोनों बच्चों का इसी चाकू से गला रेता था। पुलिस ने चाकू को जब्त कर लिया
गिर्राज ने अपनी पत्नी व दोनों बच्चों का इसी चाकू से गला रेता था। पुलिस ने चाकू को जब्त कर लिया

घटनास्थल पर प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि मृतक गिर्राज राणा ने वारदात से पहले कमरे का दरवाजा बंद किया। उसने कमरे में ही रखे टेलीविजन को चालू कर उसकी आवाज तेज कर दी। इससे पत्नी व दोनों बच्चों की चीखें बंद कमरे में टीवी की तेज आवाज में दबकर रह गई। आसपास के लोगों और इसी मकान में दूसरे कमरों में किराए से रहने वाले लोगों को भनक तक नहीं लगी।

अंतिम वक्त में भी मां के हाथों पर ही मिला बेटा कानू, इससे लगता है कि मां ने अपने बच्चों को बचाने की कोशिश की होगी। लेकिन फिर उसे भी गिर्राज ने मार डाला
अंतिम वक्त में भी मां के हाथों पर ही मिला बेटा कानू, इससे लगता है कि मां ने अपने बच्चों को बचाने की कोशिश की होगी। लेकिन फिर उसे भी गिर्राज ने मार डाला

सुबह 10 बजे तक घर में देखा था, दोपहर 1 बजे हत्या व खुदकुशी की खबर आई

सुबह 10 बजे इस परिवार को स्थानीय निवासी रामसिंह ने घर में ही बच्चों के साथ देखा था। लेकिन इसकी कल्पना भी नहीं थी कि दो घंटे बाद ही गिर्राज ऐसा जघन्य कदम उठाएगा। कॉलोनी में रहने वाली ही एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि गिर्राज अपनी पत्नी व बच्चों को प्यार से रखता था। वह बुधवार शाम को दूध लेने इसी मकान पर आई थी। तब दूध बेचने वाली सुनीता नजर नहीं आई तो गिर्राज की बेटी अनुष्का ने कहा आंटी, अब आप कल शाम को दूध लेने आना।

मकान के आंगन में खड़ा गिर्राज राणा का सब्जी का ठेला। इसी घर के बाहर वह कुछ सालों से सब्जी बेचकर परिवार चला रहा था
मकान के आंगन में खड़ा गिर्राज राणा का सब्जी का ठेला। इसी घर के बाहर वह कुछ सालों से सब्जी बेचकर परिवार चला रहा था

बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर बताया कि मुझे क्या पता था दोबारा वो बच्ची व परिवार जिंदा नहीं मिलेगा। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि लोगों ने पिछले सालों में कभी गिर्राज व उसकी पत्नी को झगड़ते नहीं देखा। उसके दोनों बच्चों का जन्म भी यहीं हुआ था। यहीं, लॉकडाउन में भी गिर्राज अपनी कॉलोनी के लोगों को सब्जी पहुंचाकर आता था। गिर्राज व उसकी पत्नी शिमला का कॉलोनी में सभी से अच्छा व्यवहार था। वह अक्सर अपने बच्चों को गोदी में लेकर रहते थे।

गिर्राज को अपने बच्चों से बेहद प्रेम था। उसने अपनी बेटी अनुष्का के नाम से ही सब्जी का व्यापार शुरु किया।
गिर्राज को अपने बच्चों से बेहद प्रेम था। उसने अपनी बेटी अनुष्का के नाम से ही सब्जी का व्यापार शुरु किया।

दोनों बच्चों को शुभ लाभ मानता था गिर्राज और उसकी पत्नी, जहां जन्म दिया वहीं मार डाला

स्थानीय लोगों ने बताया कि गिर्राज को अपने दोनों बच्चों से बेहद प्रेम था। उसने अपनी बेटी अनुष्का के नाम से ही सब्जी का व्यापार शुरु किया। उसी के नाम से पेटीएम अकाउंट थे। उन्हें ही अपने सब्जी के ठेले और हिसाब की कॉपी पर लगा रखा था। उसके दोनों बच्चों का जन्म इसी घर में हुआ था। वह अपने दोनों बच्चों को शुभ और लाभ ही मानता था। लेकिन सूदखोर से परेशान होकर उसने इसी घर में जिन दोनों बच्चों को जन्म दिया। उन्हें पत्नी के साथ बेरहमी से मार डाला।

रुपए उधार लेकर किसी तरह गिर्राज ने टाटा गाड़ी करीब एक साल पहले लॉकडाउन से पहले खरीदी थी, ताकि सब्जी का व्यापार कर सके। लेकिन लॉकडाउन लगने से काम धंधा बंद हो गया। करीब 10-15 दिन पहले ही दिनेश यादव नाम का व्यक्ति यह गाड़ी भी जबरन उठाकर ले गया। गिर्राज को अपनी गाड़ी से इतना लगाव था कि व्हाट्स एप पर डीपी पर भी इसी गाड़ी का फोटो लगा रखा था।
रुपए उधार लेकर किसी तरह गिर्राज ने टाटा गाड़ी करीब एक साल पहले लॉकडाउन से पहले खरीदी थी, ताकि सब्जी का व्यापार कर सके। लेकिन लॉकडाउन लगने से काम धंधा बंद हो गया। करीब 10-15 दिन पहले ही दिनेश यादव नाम का व्यक्ति यह गाड़ी भी जबरन उठाकर ले गया। गिर्राज को अपनी गाड़ी से इतना लगाव था कि व्हाट्स एप पर डीपी पर भी इसी गाड़ी का फोटो लगा रखा था।
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