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साइंटिस्ट सुनीता जाखड़ का इंटरव्यू:अंग्रेजी नहीं आती थी तो विदेश जाने का पहला प्रयास ही फेल हो गया, फिर कैम्ब्रिज की प्रोफेसर बनीं, अब सिंगापुर में मेडिसिन रिसर्च कर रही हैं

जयपुर9 महीने पहले
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सिंगापुर में रह कर स्टार्टअप के लिए युवाओं को फंडिंग करा रही हैं साइंटिस्ट सुनीता जाखड़। - Dainik Bhaskar
सिंगापुर में रह कर स्टार्टअप के लिए युवाओं को फंडिंग करा रही हैं साइंटिस्ट सुनीता जाखड़।

एक समय था जब खुद की पढ़ाई के लिए पैसे मुश्किल से जुट पाते थे, अब सिंगापुर में रह कर स्टार्टअप के लिए युवाओं को फंडिंग करा रही हैं साइंटिस्ट सुनीता जाखड़.....

आप शेखावाटी के उस गांव में पढ़ीं जहां शिक्षा गौण थी, फिर कैम्ब्रिज में वैज्ञानिक कैसे बन पाईं?
जवाब:
हमारा परिवार गरीब था। पापा वकील थे लेकिन उनके पास आने वाले ज्यादातर क्लाइंट इतने गरीब थे कि कई केस बिना पैसे लड़ते थे। मैं शुरू से होशियार थी तो सब चीजों में स्कूल में टॉप रहती थी। इसके लिए हर साल 1000 रुपए प्राइज मिलता, जिससे पढ़ाई खर्च निकल पाता था। पांचवीं से पीएचडी तक पढ़ाई देशी-विदेशी स्कॉलरशिप की मदद से ही चली।

बिना किसी मजबूत मेंटर के आप सही-गलत को लेकर शुरू से जागरूक रहीं?
जवाब:
मम्मी-पापा के संस्कारों की बदौलत मैं सही-गलत को तौलती थी। मम्मी पढ़ना-लिखना नहीं जानती थीं लेकिन हमें दिशा देना जानती थीं। इसीलिए कॉलेज पहंुची तो देखकर परेशान हो उठी कि छात्रसंघ का सारा काम लड़के करते हैं। पहली बार मैंने चैलेंज लिया। कॉलेज की पहली सांस्कृतिक मंत्री बनी।

आपको जब कैम्ब्रिज जाना था, प्रतिभावान होने पर भी इंटरव्यू में रिजेक्ट कर दिया गया, क्यों?
जवाब:
अकेडमिक बेसिस पर तो सलेक्ट हो गई थी लेकिन इंटरव्यू भारत में होना था। इंटरव्यू लेने कई महारथी आए थे। उन्होंने प्रतिभा, तेज दिमाग...कुछ नहीं देखा। अंग्रेजी नहीं आती थी तो बेरुखी से कह दिया...तुम गांव से आई हो? तुम्हें अंग्रेजी नहीं आती? जाओ गांव ही जाओ, पहले अंग्रेजी सीखो, फिर आना। मुझे धक्का लगा कि प्रतिभा क्यों नहीं देखी गई? लैंग्वेज का क्या है, वह तो कोई भी छह महीने में सीख सकता है। फिर ठान लिया और कैम्ब्रिज से पहले लंदन गई। वहां स्कॉलरशिप पर एक साल का मास्टर कोर्स किया। वहां मेरी प्रतिभा को समझा गया।

शादी के लिए आपने एक के बाद एक कई लड़के देखे, आपकी कुछ शर्तें थीं?
जवाब:
उन सबको दहेज चाहिए था, जो हमारे पास था नहीं। फिर राजपाल चौधरी ने 5 मिनट की मुलाकात में ही साफ कर दिया कि मुझे दहेज नहीं चाहिए। हमें गलत परिपाटी को बढ़ाने की जरूरत नहीं है। इसके बाद हमारी शादी एक रुपए में सम्पन्न हुई।

आपने कैम्ब्रिज या अपनी काबिलियत से जुड़ी दूसरी जॉब छोड़कर बिजनेस की राह क्यों चुनी?
जवाब:
मैं और मेरे पति ऐसे युवाओं की मदद करना चाहते थे, जो दुनिया को फिर से हरी-भरी बनाने, साइंस, तकनीक और पर्यावरण से जुड़े आइडियाज रखते हैं। उनके पास पैसे नहीं होते। इसलिए हमने अपनी कम्पनी बनाई। हम उन्हें फंडिंग में मदद करते हैं, जब तक कि वे पैरों पर खड़े नहीं हो जाएं।