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इंटीग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर गड़बड़ाया:पेमेंट नहीं मिला तो कंपनी ने बंद किया काम, रजिस्ट्रेशन से लेकर डिस्चार्ज तक सब मैनुअल

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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जेके लोन, महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट, जनाना अस्पताल चांदपोल, गणगौरी अस्पताल, प्रताप नगर स्थित स्टेट कैंसर सेन्टर समेत प्रदेश के मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल, जिला, उपजिला, सेटेलाइट और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर इंटीग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर गड़बड़ा गया है।

जिसके कारण अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन, आउटडोर, इनडोर, सैन्ट्रल स्टेराइल स्टोर और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को ऑनलाइन की बजाय मैनुअल किया जा रहा है। कोरोना महामारी में मैनुअल काम करने का भी बड़ा संकट है। प्रदेश के अस्पतालों की ओर से ऑनलाइन सिस्टम को सही करने की बजाय नेशनल हैल्थ मिशन मैनुअल काम करने के लिए कहा है।

इधर, कंपनी के बार-बार कहने के बाद भी सरकार ने पेमेंट तक नहीं दिया। जिसके कारण काम कंपनी ने काम बंद कर दिया। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही तो देखिए की 80 दिन बाद भी दुबारा से टेंडर ही नहीं किया। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि कंपनी को बार-बार पत्र लिखा है। और अस्पतालों को ऑनलाइन की बजाय मैनुअल काम करने के निर्देश दिए है। अब सवाल उठता है कि सरकार सिस्टम को दुरस्त क्यों नहीं कर रही।

क्या है इंटीग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर डिस्चार्ज होने तक वसुन्धरा सरकार के समय इंटीग्रेटेड हैल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर का शुभारंभ अप्रेल -2018 में किया था। साथ ही इसमें मरीजों का पूरा रिकार्ड, ब्लड बैंक, दवाओं की पर्ची औ मरीजों को दिए जाने वाले खाने तक का सिस्टम ऑनलाइन था।

जनाना अस्पताल की अधीक्षक डॉ.पुष्पा नागर और महिला चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ.आशा वर्मा का कहना है कि आईएचएमएस सॉफ्टवेयर में दिक्कत आ रही है। जिससे ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन काम करना पड़ रहा है। कावंटिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ.लीनेश्वर हर्षवर्धन ने बताया कि सॉफ्टवेयर को सही करवाने के लिए एसएमएस को पत्र लिखा है।

सॉफ्टवेयर में आ रही दिक्कतों को देखते हुए अस्पतालों को ऑनलाइन से ऑफलाइन के निर्देश दिए है। पुणे की कंपनी का पेमेंट का मामला अटका है। चिकित्सा सचिव और मिशन निदेशक को भी फाइल भेजी है।
-राजेन्द्र शर्मा, प्रभारी, आईएचएमएस

पिछले 10 माह से सरकार को बार-बार कहने के बावजूद हमें पेमेंट नहीं दिया। काफी सारी परेशानियों को झेलना पड़ा। फिर मजबूरन होकर हमें काम छोड़ना पड़ा।-डॉ. सुरेन शुक्ला, निदेशक, ओहम कंपनी पुणे

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