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  • If The Noise Pollution Is Spread, The Police Will Deduct The Pink Slip, Even Then, If You Do Not Agree, A Challan Of 1000 Rupees Will Be Deducted.

कृपया व्यर्थ हॉर्न ना बजाएं:ध्वनि प्रदूषण फैलाया तो पुलिस पिंक पर्ची काटेगी, फिर भी नहीं माने तो 1000 रुपए का चालान काटा जाएगा

जयपुर2 महीने पहले
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जयपुर पुलिस और दैनिक भास्कर का ‘नो हॉन्किंग’ पर सबसे बड़ा अभियान। - Dainik Bhaskar
जयपुर पुलिस और दैनिक भास्कर का ‘नो हॉन्किंग’ पर सबसे बड़ा अभियान।

शहर में बढ़ते वाहनों ने ध्वनि प्रदूषण का ‘डेसीबल’ बढ़ा दिया है। 70% ध्वनि प्रदूषण वाहनों के हॉर्न से हो रहा है। नई तकनीक की गाड़ियों ने ‘लग्जरी’ तो दी है लेकिन इनके हॉर्न की तीव्रता 100 डेसीबल से अधिक मापी गई है। एक्सपर्ट का कहना है कि आम आदमी के लिए 55 डेसीबल से ज्यादा की ध्वनि खतरनाक है। प्रदूषण की ध्वनि कम करने के लिए दैनिक भास्कर और ट्रैफिक पुलिस की ओर से संयुक्त पहल ‘कृपया व्यर्थ हॉर्न ना बजाएं’ की जा रही है।

ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस एक सप्ताह तक शहर में व्यापक अभियान चलाएगी। पहली बार बेवजह हॉर्न बजाने वालों की पिंक पर्ची कटेगी और मानसरोवर स्थित काउंसलिंग सेंटर में समझाइश की जाएगी। काउंसलिंग में नहीं आने पर नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 1000 रु. का चालान काटा जाएगा।

आज ओटीएस चौराहे से अभियान की शुरुआत
अभियान की शुरुआत बुधवार दोपहर एक बजे जेएलएन मार्ग पर ओटीएस चौराहे से होगी। एडिशनल कमिश्नर राहुल प्रकाश का कहना है कि शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर हॉर्न के दुष्परिणामों वाले स्लोगन लगाए जाएंगे। बुधवार को ओटीएस पर जागरूकता के लिए एक शॉर्ट फिल्म दिखाएंगे। ‘नो हॉर्न जोन’ के साइन बोर्ड लगेंगे। चौराहों पर नुक्कड़ नाटक से संदेश देंगे। कुछ दिन पहले डीजीपी एमएल लाठर ने पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव से शहर में अनावश्यक हॉर्न बजाने पर चिंता जाहिर की थी। इस पर पुलिस कमिश्नर ने अभियान की रूप-रेखा तैयार की।

बड़ी चौपड़ पर सबसे ज्यादा 55 की बजाय 71.5 डेसीबल तक वाहनों का शोर

पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि जनवरी से जून तक के सर्वे में शहर में एक भी स्थान ध्वनि प्रदूषण के तय मानक से नीचे नहीं मिला। बोर्ड ने सर्वे 6 स्थानों पर करवाया। इसके लिए 70 फीसदी तक हॉर्न बड़ा कारण हैं।

  • शांत, रिहायशी और व्यावसायिक जोन में संतोकबा दुर्लभजी, सिविल लाइन्स, गवर्नर हाउस, नगर निगम, बड़ी चाैपड़, राजापार्क व शास्त्रीनगर में दिन-रात के ध्वनि का लेवल अधिक मिला।
  • बड़ी चौपड़ पर सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण। 6 माह में 69 से 71.5 डेसीबल के बीच स्तर रहा।
  • 2019 की तुलना में कुछ स्थानों पर गिरावट भी दर्ज हुई, इनमें 18 फीसदी गिरावट शास्त्रीनगर में रही।

कान की मांसपेशियों और परदे पर सबसे ज्यादा असर

ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. सतीश जैन का कहना है कि अचानक तेज हॉर्न से कानों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं। कई महीने तक ऐसी स्थिति में बहरापन आ सकता है।

कोलेस्ट्रोल बढ़ता है, रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पृथ्वी गिरि और कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक गर्ग की मानें तो शोर से चिड़चिड़ाहट और गुस्सा आता है। लगातार शोर खून में कोलेस्ट्रोल बढ़ाता है। हार्ट बीट भी बढ़ती है।

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