रक्त संकट- खून की कमी पर स्टाफ बोला:ओ-पॉजिटिव खून चाहिए तो डोनर भी सेम ग्रुप का लाएं; जनाना अस्पताल में भर्ती थी महिला मरीज

जयपुर2 महीने पहले
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अस्पताल में भर्ती महिला। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में भर्ती महिला।

अस्पतालों में चल रही ब्लड की किल्लत से मरीज परेशान हैं, वहीं अस्पताल स्टाफ के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार की वजह से भी मरीजों को ब्लड नहीं मिल पा रहा है। जनाना अस्पताल में एक महिला मरीज को सिर्फ इसलिए ब्लड देने से मना कर दिया गया, क्योंकि उनके पास उसी ब्लड ग्रुप का डोनर नहीं था। मामले में जब भास्कर ने अस्पताल प्रशासन से बात की तो उन्होंने कहा- स्टाफ को ऐसे नहीं करना चाहिए और हस्तक्षेप पर मरीज को आठ घंटे बाद ब्लड मिल सका।

धौलुपर निवासी सरोज को धौलपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। तबीयत खराब होने से दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। इसके बाद भी महिला सही नहीं हुई तो उसे जयपुर भेज दिया गया। यहां 3 अगस्त को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद 5 अगस्त को महिला को फिर से ब्लड की जरूरत पड़ी। उसको ओ-पॉजिटिव ब्लड चाहिए था और इमरजेंसी थी तो परिजन दो यूनिट ब्लड डोनेट करने के लिए तैयार हो गए। रेजीडेंट ने कहा कि इसी ग्रुप के डोनर से डोनेट कराओगे तो ही ब्लड मिलेगा। परिजन परेशान हो गए और काफी देर मन्नत की, लेकिन फिर भी ब्लड न तो डोनेट कराया गया और ना ही महिला को चढ़ाया गया।

अधीक्षक बोलीं-किसी भी ग्रुप का व्यक्ति कर सकता है डोनेट
मामले में जब अस्पताल अधीक्षक कुसुमलता मीणा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डोनर कोई भी ग्रुप का हो, ब्लड डोनेट के बाद दिया जाता है। कई बार उसी ग्रुप का ब्लड नहीं होने से दिक्कत आती है लेकिन मरीज के
परिजन को यह नहीं कहा जा सकता कि ब्लड नहीं दिया जाएगा। करीब 8 घंटे बाद मरीज को ब्लड मिल सका।

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