हाथोना की पहाड़ियों में बसा नंद गांव:आईआईटी के इंजीनियरों ने बनाया द्वापर जैसा आत्मनिर्भर जीवन

जयपुरएक महीने पहले
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इस्कॉन संस्थापक स्वामी श्रील प्रभुपाद की प्रतिमा को परिक्रमा कराते भक्त। - Dainik Bhaskar
इस्कॉन संस्थापक स्वामी श्रील प्रभुपाद की प्रतिमा को परिक्रमा कराते भक्त।

जयपुर से 90 किमी (जिला टोंक, गांव हाथोना) दूर पहाड़ियों में 200 बीघा में नंदगांव जैसा हरे कृष्ण विलेज बसा है। यहां द्वापर युग की झलक है। इसका उद्देश्य कृष्ण भक्ति के साथ सादा जीवन, उच्च विचार। आत्मनिर्भर बनाने में 100 करोड़ रुपए सहयोग से खर्च किए जा रहे हैं। यहां ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास सहित चारों आश्रमों का वास है। यहां के निवासी गोधन और कृषि आधारित जीवन जीते हैं। गांव के निर्माण में जयपुर, टोंक, निवाई, सवाई माधोपुर के 500 श्रद्धालु सक्रिय हैं। ईंधन, अनाज, दूध, दही, तेल, फल सब यहीं होता है। तेल निकालने, गेहूं पीसने, गो-काष्ठ बनाने के लिए बैल चालित प्रणालियां हैं। आईआईटीयन ने द्वापर युग जैसा आत्मनिर्भर जीवन बनाया दिया है।

कपड़ा और मकान के लिए 100 बीघा भूमि लेने की तैयारी
हरे कृष्ण कम्युनिटी के अध्यक्ष दयालु निताई दास (धर्मेश शर्मा) बताते हैं कि गांव के लिए 100 बीघा भूमि और लेनी है। आईआईटी कानपुर से बीटेक अध्यक्ष दास ने गांव की परिकल्पना की थी। विदेश में थे तब इस्कॉन मंदिर के संपर्क में आए थे और वहीं से ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा ली थी।

हर काम हरे कृष्ण से शुरू, संबोधन भी हरि बोल से ही
यहां हर काम की शुरुआत हरे कृष्ण से की जाती है। काम का समापन भी हरे कृष्ण से ही होता है। कोई भी काम के लिए एक-दूसरे को हरि बोल से संबोधित करते हैं। यहां रहने वाला हर व्यक्ति सुबह 2 घंटे हरे कृष्ण महामंत्र का जाप जरूर करता है।

गोशाला में है 300 गोधन
गोशाला में 300 गोधन हैं। सौ दुधारू गाय हैं। गोबर से खेती के लिए जैविक खाद बनाई जाती है।

जयपुर के प्रमुख सहयोगी बीएल सोनी, डीजी, एसीबी
ओपी मोदी, निदेशक ओके प्लस बिल्डर्स, {सुरजाराम मील, अध्यक्ष, स्किट, {एमएल स्वर्णकार, एमडी- महात्मा गांधी हॉस्पिटल {पंकज सोमानी, महाराजा साबुन, एमपी गुप्ता, ऑटो पल ग्रुप {केशव शर्मा, मेटाक्यूब, जेआर गुप्ता, रिटायर्ड मैनेजर, रीको

इन संस्थाओं ने की मदद
कई कंपनियों ने सीएसआर के तहत गांव बनाने में मदद की है। इनमें आवास फाउंडेशन, एयू स्मॉल बैंक, एसबीबीजे, पोद्दार पिगमेंट हंै।

जयपुर से 90 किमी बाद बनास पुलिया के नीचे हाइवे से बाईं तरफ उतर कर तकरीबन 7 किमी अंदर हरे कृष्ण विलेज है।

  • 200 बीघा में 100 करोड़ से बसावट, आईआईटीयन करते हैं गोपालन, आत्मनिर्भर है पूरा गांव
  • 50 भक्त, अधिकांश इंजीनियर यहां 50 भक्त रहते हैं। अधिकांश इंजीनियर हैं, जो आईआईटी संस्थानों से इंजीनियरिंग करके आए हैं।