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सुस्ती:2 साल में 2 विभाग मिलकर भी नहीं कर सके एक हजार डेयरी बूथों का आवंटन

जयपुरएक महीने पहले
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बेरोजगारों को सहारा देने के लिए सरकार की ओर से शहर में खोले जाने वाले 1 हजार डेयरी बूथों का आवंटन डेयरी और नगर निगम अफसर दो साल में भी नहीं कर पाए। यह स्थिति तो तब है जब सरकार ने तीन महीने में बूथ आवंटन के निर्देश दिए थे। एक हजार बूथ के बदले डेयरी में 3,500 फार्म आए थे। इन्हें डेयरी अफसरों ने एनओसी के साथ संबंधित निगम जोन और मुख्यालय में भेज दिया था।

एक साल तो नगर निगम की कमेटी नहीं होने से अटके रहे। अब निगम चुनाव के बाद कमेटियां भी बन गई, तब भी आवंटन प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बूथों का जल्दी आवंटन हो, इसके लिए सरकार ने जिला प्रशासन और निगम अफसरों की कमेटी का गठन किया था। कमेटी भी कुछ नहीं कर पाई।

यह होता फायदा : बूथ आवंटित हो जाते तो एक हजार लोगों को रोजगार के साथ 10 हजार से अधिक लोगों का पालन-पोषण होता। वहीं डेयरी का करीब 50 हजार लीटर दूध बढ़ जाता। इससे हर दिन डेयरी को करीब 21 लाख रुपए का राजस्व मिलता। यह राशि पशुपालकों में वितरित होती तो उन्हें संबल मिलता। निगम को हर महीने 11 लाख रुपए का राजस्व बूथों के किराया से मिलता।

कोर्ट ने एक याचिका के तहत सख्त नियमों की पालना करते हुए आवंटन के निर्देश दिए हैं। नियमों में आने वाले आवेदनों की सूची तैयार की जा रही है। यह सूची ट्रैफिक पुलिस को भेजी जाएगी। यहां से निगम कमेटी से अप्रूवल होने के बाद आवंटन पत्र जारी किया जाएंगे। - अवधेश मीना, आयुक्त, हेरिटेज निगम

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