जिंदा पशुओं को मरा बताकर भी हड़प लिया पैसा:2014 में मुकेश मोदी ने सांसद का टिकट मांगा था, ड्राइवर व चपरासी के नाम बनाई कंपनी

जयपुर2 महीने पहले

देश के सबसे बड़े आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले का संस्थापक अध्यक्ष मुकेश मोदी शुरू से ही जालसाज रहा है। सिरोही में बीमा एजेंट रहते हुए मुकेश ने जिंदा मवेशियों को मृत बताकर पैसे हड़प लिए थे। 2014 से भाजपा से सिरोही-जालोर सीट से लोकसभा का टिकट मांगा था, लेकिन नहीं मिला। आज सीरीज की दूसरी किस्त में पढ़िए मोदी बंधुओं की फ्लैशबैक की कहानी...

36 साल पहले आदर्श प्रिंटर्स एंड स्टेशनर्स से शुरुआत
36 साल पहले 1985 में आदर्श प्रिंटर्स एंड स्टेशनरी को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड से शुरुआत की। इस पर भी डीसीसीबी, माधव और आदर्श सोसायटी में बिना टेंडर के करोड़ों रुपए की स्टेशनरी सप्लाई करने के आरोप लगे थे। 2010 में हुई ऑडिट में भी खुलासा हुआ कि क्रेडिट सोसायटी स्टेशनरी कहीं और से खरीदती थी और बिल प्रिटिंग सोसायटी का पेश करती थी। इसके बाद इस पर आपत्ति जताई गई थी।

खुद प्रबंध समिति से हटा तो भाई को बनवा दिया अध्यक्ष

मुकेश के पिता प्रकाशराज ग्राम सेवक थे। 1992 में सिरोही अर्बन कॉमर्शियल बैंक के अध्यक्ष चुने गए। 1994 में उनके निधन के बाद मुकेश प्रबंध समिति का अध्यक्ष बना। मुकेश की पहल पर सिरोही अर्बन कॉमर्शियल बैंक का नाम बदलकर माधव नागरिक सहकारी बैंक रखा। 1999 में मुकेश माधव नागरिक सहकारिता बैंक की प्रबंध समिति से हटा तो भाई वीरेंद्र को प्रबंध समिति का अध्यक्ष बनवा दिया। 1999 में मुकेश ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की नींव रखी।

ललिता 8 साल एमडी रही, 14 करोड़ का वेतन उठाया
माउंट आबू की ललिता राजपुरोहित, मुकेश व वीरेंद्र मोदी की परिचित है। ललिता 2003 से 2011 तक एमडी रही। फर्जी शैल कंपनियां बना 12,414 करोड़ रुपए का लोन बांटने में भूमिका अहम थी।पांच साल में 14 करोड़ बतौर वेतन लिए। ललिता की 2006 में सालाना सीटीसी 23 लाख थी, जो 2007 में 64 लाख हो गई थी। 2008 में 78 लाख तो 2009 में 1.9 करोड़, 2010 में 3.51 करोड़ और 2011 में 7.64 करोड़ रुपए कर दी गई।

ड्राइवर को पहले अहमदाबाद, फिर पूरे ग्रुप का अध्यक्ष बनाया
सिरोही का ईश्वरसिंह सिंदल सोसायटी के संस्थापक मोदी बंधुओं की गाड़ी चलाता था। उसे सोसायटी का अहमदाबाद अध्यक्ष बनाया। 2015 में सोसायटी के पूरे ग्रुप का अध्यक्ष बनाया। ईश्वर सिंह ने भी कई फर्जी शैल कंपनियां बनाकर 387 करोड़ का लोन दिया। मुकेश मोदी की पत्नी, दामाद की फर्म को 720 करोड़ का कमीशन दिया, नोटबंदी में 223 करोड़ रु. खुर्द-बुर्द किए। ईश्वरसिंह जेल में है। सिरोही के आदर्श नगर का कमलेश चौधरी सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष वीरेंद्र व मुकेश का ममेरा भाई है, जो 2011 से मई 2015 तक सोसायटी अध्यक्ष रहा।

चपरासी को बना दिया नगर पालिका चेयरमैन

घोटाले का मास्टरमाइंड वीरेंद्र मोदी पहले कैसेट रिकॉर्डर का काम करता था। कैसेट रिकॉर्डिंग का काम बंद हाे गया ताे स्टेशनरी की दुकान खोली। लंबे समय तक टैक्सी भी चलाई। ईश्वर सिंह सिंघल और वीरेंद्र दोनों साथ में ही टैक्सी चलाते थे। 1988 में पहली बार वह डीसीसीबी का निदेशक बना। इसके बाद इसी संस्था में उसके पिता चेयरमैन बने। उनकी मौत के बाद वीरेंद्र मोदी के भाई मुकेश मोदी ने कमान संभाली।1999 में वीरेंद्र मोदी सिरोही नगर पालिका का चेयरमैन रहा। इस दौरान जमीनों में काफी घोटाले हुए। 2003 में जब ये सीट एससी की हुई तो अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुखदेव को चेयरमैन बनाया, जबकि पूरा काम खुद देखता था।

मुकेश ने 2014 में भाजपा से सांसद का टिकट मांगा, लेकिन नहीं मिला
मुकेश ने 2009 में गुजरात के घाटे में चल रहे दो सहकारी बैंक डीसा नागरिक सहकारी बैंक व सुरेन्द्र नगर का मर्केंटाइल सहकारी बैंक का विलय कर इसे आदर्श क्रेडिट सोसायटी में मिलाया। इससे मुकेश का गुजरात में भी दबदबा बढ़ गया। मुकेश ने 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा से सिरोही-जालोर संसदीय सीट से टिकट मांगा था, लेकिन 2010 में मुकेश के खिलाफ आयकर जांच चलने के कारण टिकट नहीं मिला।

महंगे शौक रखता था वीरू
सिरोही शहर में लोग वीरेंद्र मोदी को वीरू मोदी के नाम से भी जानते हैं। महंगी गाड़ियों और पालतू जानवर रखने का शौक है। खुद की काले रंग की रेंज रोवर कार है। वीरेंद्र मोदी और मुकेश मोदी में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा थी, जो कभी सामने नहीं आई। वीरेंद्र आदर्श ग्रुप के रियल एस्टेट का काम संभालता था, जबकि मुकेश मोदी सोसायटी का पूरा काम देखता था। यहां तक वीरेंद्र मोदी पहले वसुधा एग्रो टेक, डेयरी, पावर प्लांट, मेडिकल और आरओ प्लांट जैसे कई व्यापार कर चुका है।

जिस पते पर 125 कंपनियां बताईं, वहां 15 फीट की दुकान मिली
गुरुग्राम (हरियाणा) में जिस पते पर 125 कंपनी बताई, एसओजी वहां पहुंची तो एक दुकान थी। इसमें 4 कुर्सी और 1 मेज थी। देखरेख के लिए 8 हजार रुपए तनख्वाह पर वेस्ट बंगाल के युवक 21 वर्षीय मोती उल मोल हक को लगा रखा था। उसने एसओजी को बताया कि यहां कई सालों से कोई नहीं आया। उसकी ड्यूटी सुबह 10 से शाम 5 बजे तक दुकान की निगरानी की है। जांच में पता चला मुकेश की पत्नी व दामाद ने यहां का एड्रेस देकर बतौर एडवाइजर सोसायटी से 720 करोड़ उठाए। इसी पते पर सैकड़ों फर्जी शैल कंपनियां का भी रजिस्ट्रेशन किया। मगर असल में ऐसी 125 कंपनियों का कोई अस्तित्व ही नहीं है।

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