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कुपोषित बच्चों का मिशन भीम:205 पंचायतों में कलेक्टर ने बदली फूड हैबिट, 6 हजार कुपोषित और 2 हजार अति कुपोषित निकले तो दौसा कलेक्टर ने की पहल

जयपुर15 दिन पहलेलेखक: आलोक खंडेलवाल
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राजस्थान में सालों से बच्चों में कुपोषण संबंधी समस्या को लेकर बात की जाती रही है, लेकिन फिर भी इसे कम करने के प्रयास नाकाफी ही रहे हैं। दौसा ने कुछ ऐसी शुरुआत की है, जिससे गांव-गांव के बच्चों के खान-पान की आदतों को बदला जा सका है। उनके अभिभावकों को नियमित करने में मदद मिली है। इसी साल जनवरी में कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालने के साथ ही कमर उल जमान चौधरी ने इस पर फोकस किया और पंचायतों में कुपोषण की स्क्रीनिंग शुरू करा दी।

अब तक 286 में से 205 पंचायतों के 7 माह से 5 वर्ष तक के 67,677 बच्चों की जांच की गई। इनमें 6997 कुपोषित और 2046 अतिकुपोषित मिले। इसके बाद तीन विभागों को जोड़ कलेक्टर कमर उल जमान ने गांव-गांव के परिवारों की फूड हैबिट्स बदलने का जिम्मा खुद ले लिया और प्रोजेक्ट भीम शुरू कर दिया।

रात्रि चौपाल में कुछ बच्चों की स्थिति देखी

कलेक्टर कमर उल जमान ने बताया कि मैंने कलेक्टर के रूप में जॉइन करने के कुछ दिन बाद रात्रि चौपाल के लिए एक गांव में गया। वहां कुछ बच्चे काफी कमजोर से और उनके बाल कुछ भूरे थे। शक हुआ तो अफसरों से दो पंचायतों के बच्चों की जांच को कहा। दोनों पंचायतों में 50-60 बच्चे कुपोषित व 10-12 बच्चे अति कुपोषित निकले। जो डराने वाला आंकड़ा था। फिर सभी पंचायतों को टारगेट किया गया।

तीन डिपार्टमेंट, 205 पंचायतें और हर में 12 दिन का कैंप

कलेक्टर जमान ने बताया कि जांच तो हो ही रही है, लेकिन अब स्थितियां बदलनी थीं। कुपाेषण से बच्चों को बाहर निकालना था। ऐसे में फरवरी-मार्च में शुरू किए गए स्क्रीनिंग के बाद मई में कैंप शुरू कर दिए गए। तीन डिपार्टमेंट आईसीडीएस, पंचायती राज और मेडिकल के जॉइंट कार्यक्रम भीम प्रोजेक्ट शुरू कर दिया। इसके तहत तीनों विभागों की टीम ने इन पंचायतों में 12-12 दिन का कैंप लगाया। जो अभी अनवरत जारी हैं।

इन कैंप में 5 से 6 एक्सपर्ट्स की टीम रहती है और वे कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को उनके अभिभावकों के साथ बुलाते हैं। वहां बच्चों की डि-वॉर्मिंग की जाती है, फिर उन्हें शुरू के तीन दिन दूध और मुरमुरे की डाइट दी जाती है। इसके बाद खिचड़ी आदि। इससे बच्चों की खुराक का अभिभावकों को भी पता चल जाता है। हर दिन जिंक और मल्टी विटामिन के साथ जरूरत की हर सुविधा भी।

काउंसलिंग ने बदली हैबिट
कलेक्टर चौधरी ने बताया कि वे भी कई पंचायतों में लगातार पहुंच रहे हैं। मेरे अलावा आईसीडीएस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. धर्मवीर की देखरेख में बेहतर तरीके से मेडिकल ऑफिसर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सीएचओ, बीडीओ, वीडीओ आदि की टीमें लगातार इस प्रकार के कैंप, गांव आदि में जाकर कैंप क्रियान्वित करा रहे हैं। कैंप में आने वाले कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को उनके खाने की आदतों और दवाओं के प्रति काउंसलिंग भी करा रहे हैं। जिससे सुधार हो रहा है।