रजिस्ट्री में फर्जी ई-चालान बनाकर कराेड़ों रुपए हड़पने का मामला:पंजीयन शुल्क के 9 कराेड़ रुपए जमा करवाने थे, जबकि करवाए मात्र 39,900 रुपए

जयपुर10 महीने पहलेलेखक: शिव प्रकाश शर्मा
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

रजिस्ट्री में फर्जी ई-चालान बनाकर 9 कराेड़ रुपए हड़पने के मामले में जयपुर में हुई 532 रजिस्ट्रियों में पंजीयन शुल्क के 9 कराेड़ रुपए जमा करवाने थे, जबकि अपराध में शामिल गिरोह ने पृष्ठांकन शुल्क के पेटे मात्र 39,900 रुपए ही जमा करवाएं। जयपुर के सब रजिस्ट्रार ऑफिस 2,5,8 और 10 में हुई 532 रजिस्ट्रियों में सरकार के 9 कराेड़ राजस्व शुल्क के हड़प लिए।

अब सवाल है कि सब रजिस्ट्रार ने ई-चालान के जीआरएन नंबर काे बिना क्रॉस टेली किए दस्तावेजों काे साइन कर कैसे रजिस्टर्ड कर दिया? सब रजिस्ट्रार काे पहले सरकार के खाते में रुपए आने की जांच करनी हाेती है इसके बाद खरीदार काे रजिस्ट्री दस्तावजों की स्वयं रिसिविंग करवाकर देना हाेता है। सब रजिस्ट्रार के द्वारा इन मामलों में लापरवाही बरती गई।

इधर, बनीपार्क थाने में अब तक 44 पीड़ित लाेगाें ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। सभी की रिपोर्ट पहली एफआईआर में ही शामिल की जा रही है। ऐसे में सरकार के 9 कराेड़ हड़पने के मामले में पुलिस ने अब तक जांच शुरू नहीं की है। आर्थिक अपराध के मामला हाेने के कारण एसओजी काे मामले की जांच सौंपनी चाहिए।

इस उदाहरण से समझा जा सकता है मामला
पीड़िता शकुंतला ने बताया कि 16 अप्रैल 21 काे 30 लाख रुपए कीमत की रजिस्ट्री के पेटे राजस्व शुल्क के 2 लाख 25 हजार 300 रुपए जमा करवाने के लिए नीरज कुमार योगी के एसबीआई बैंक के खाते में रुपए आनॅलाइन जमा करवाए थे। नीरज ने पहला 2.25 लाख रुपए का जीआरएन नंबर 0047987385 का ई-चालान व दूसरा 75 रुपए का जीआरएन नंबर 0049652874 ई-चालान दस्तावेजों के साथ लगा 16 अप्रैल काे रजिस्ट्री के दस्तावेज पेश किए।

28 सिंतबर काे सब रजिस्ट्रार-10 के द्वारा जारी किया गया नोटिस मिला। जिसमें पृष्ठांकन शुल्क के पेटे मात्र 75 रुपए ही जमा करवाना दर्शाया गया और शेष राशि 2,25,225 रुपए की रिकवरी निकाल दी गई। शकुंतला का कहना है कि यदि सब रजिस्ट्रार ऑफिस में दस्तावेजों की जांच में लापरवाही नहीं बरती जाती ताे सरकार के रुपए से ठगी नहीं हाेती, अब शुल्क जमा करवाने वालों काे ही दोषी ठहराया जा रहा है।

अब ये सवाल
1. जिन रजिस्ट्री के मामलों में बैंक का फाइनेंस हाेता है उन रजिस्ट्रियों में रजिस्ट्री की मूल काॅपी बैंक के वकील या मैनेजर काे सौंपनी हाेती है। फाेटाे काॅपी खरीदार के पास जाती है। अब रजिस्ट्री करवाने वालों काे यह नहीं बताया जा रहा है कि दस्तावजों काे किसने प्राप्त किया है।
2. रजिस्ट्री की लिखावट के अंत में दस्तावेज तैयार करने वाले वकील या नीति पत्र लेखक का नाम लिखा हाेता है। बिना इस जानकारी के ही रजिस्ट्रियां की गई है।

इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की हुई है, जो यह पता लगा रही है कि साफ्टवेयर की गड़बड़ी या किसी कार्मिक के द्वारा सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है। -महावीर प्रसाद, आईजी पंजीयन व मुद्रांक शुल्क