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भ्रष्टाचार की खानों का सरकारी रिकॉर्ड:जिन खानों से एक टन पत्थर भी नहीं निकला था, वहां सरकारी रिकाॅर्ड में 3.71 लाख टन निकलना दिखाया

जयपुर2 दिन पहलेलेखक: आनंद चौधरी
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लीज की आड़ में लूणी नदी में अ‌वैध बजरी खनन के घाव सामने लाने के बाद राजस्थान के पहाड़ों का दंश भी भास्कर दिखा रहा है। - Dainik Bhaskar
लीज की आड़ में लूणी नदी में अ‌वैध बजरी खनन के घाव सामने लाने के बाद राजस्थान के पहाड़ों का दंश भी भास्कर दिखा रहा है।

खातेदारी लीज की आड़ में लूणी नदी में अ‌वैध बजरी खनन के घाव सामने लाने के बाद राजस्थान के पहाड़ों का दंश भी भास्कर दिखा रहा है। खनन माफिया ने रवन्नों का दुरुपयोग करते हुए कागजों में लाखों टन पत्थर निकालकर बेच दिया दिखाते हैं, हकीकत में मौके पर वहां से एक टन पत्थर भी नहीं निकाला।

कहीं पर सरकारी कागजों में महज 37 हजार टन पत्थर खोदना बताया गया, जबकि मौके पर 10 लाख टन से ज्यादा पत्थर निकाल कर बेचा जा चुका है। भास्कर टीम ने सीकर, झुंझुनूं और जयपुर में 82 चेजा पत्थर खानों की सेटेलाइट इमेजरी, एरियल फोटोग्राफी और खनन विभाग के डिस्पेच आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें वैध और अवैध खनन के अंतर की गहराई साफ दिखती है।

वैध-अवैध का खुला गणित
माइनिंग प्लान में खनन पट्‌टे का खनिज घनत्व दर्शाया जाता है। यह जियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट होती है। खान से निकले माल और डिस्पेच का सालाना एसेसमेंट रिकॉर्ड खनन विभाग में पेश होता है। रवन्ने ऑनलाइन होने के बाद अब प्रतिदिन के डिस्पेच के आकड़ें भी सरकार के पास उपलब्ध हैं। इन डिस्पेच के आंकड़ों और खनन पिट के माप की तुलना की जाए तो अवैध खनन का पूरा हिसाब सामने आ जाता है। लेकिन विभाग के नुमाइंदों ने कभी यह काम नहीं किया।

सेटेलाइट इमेज और एरियल फोटोग्राफी के जरिए दिखा रहा है अवैध चेजा पत्थर खनन की हकीकत

खनन विभाग के अफसर अपने आंकड़ों के साथ मौके की इन तस्वीरों को भी जरूर देख लें, सबूत चाहिए तो भास्कर से ले जाएं

मीणा की नांगल, नीम का थाना

फोटो : अनिल शर्मा
फोटो : अनिल शर्मा

पहाड़ को पाताल तक खोदने के बाद खनन विभाग का रिकॉर्ड बोला- 37 हजार टन खुदाई हुई है
नीम का थाना क्षेत्र के मीणा की नांगल में इस खान से रिकॉर्ड में 37 हजार टन चेजा पत्थर निकला बताया है। भास्कर ने मौके पर पिट की गहराई, लंबाई और चौड़ाई देखी। यहां से 9-10 लाख टन चेजा पत्थर निकाला गया है। इस खान से हरियाणा बॉर्डर 800 मीटर दूर है।

यहां से पत्थर निकालकर चंद मिनटों उसे बॉर्डर पार भेज दिया गया। राजस्थान के हिस्से रॉयल्टी तो नहीं आई पर अवैध खनन के दंश जरुर मिले। हाल ही में इसी खान में भरे पानी में डूबने से एक युवक की मौत हो गई जिसकी लाश 3 दिन बाद निकाली जा सकी।

420 खानें हैं नीमकाथाना में, 221 चालू हैं
221 खानों से वर्ष 20-21 में 1 .12 करोड़ टन खनिज िडस्पेच हुआ। 60 लाख टन सालाना खनिज का अवैध खनन होता है यहां।

सहयोगी : माइनिंग और सेटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट प्रदीप सिंह शेखावत और किशोर कुमावत

मोडी गोरीर गांव, खेतड़ी झुंझुनूं​​​​​​​

​​​​​​​जिम्मेदारों की जिम्मेदारी तो देखिए... अवैध को वैध बनाने में जुटे

यहां अवैध खनन को वैध बनाने की तैयारी
यहां अवैध खनन को वैध बनाने की तैयारी

झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के मोडी गोरीर गांव में चेजा पत्थर की तीन खानों के बीच के खसरा नंबर 2219 को अवैध रूप से 4063 वर्ग मीटर में खोद डाला गया। मामला सामने आया तो विभाग ने अवैध खनन को खुर्द-बुर्द करने के लिए एसटीपी जारी कर दी।

विभाग की ओर से उसका अधिशुल्क निर्धारण किया जाता इससे पहले यहां चेजा पत्थर का नया ब्लॉक आवंटित करने की तैयारी कर ली। जिम्मेदारों को इसकी जांच कर अवैध खनन करने वालों से जुर्माना वसूलना चाहिए था लेकिन वो पूरे प्रकरण को खुर्द-बुर्द करने में जुट गए। इस प्रकरण की जानकारी अधिक्षण खनन अभियंता तक को है।

भूदोली खोरा गांव, नीम का थाना

सरकारी रिकार्ड में खान संख्या 195/2005
सरकारी रिकार्ड में खान संख्या 195/2005

सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया- 2.38 लाख टन खुदाई हुई निकाला 1 टन भी नहीं, खेती हो रही है

भूदोली खोरा की 16 खानों का हमने निरीक्षण किया। सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार यहां दो खानों में आज तक 2.38 लाख टन चेजा पत्थर निकालकर बेचा गया है, जबकि मौके पर एक टन पत्थर भी नहीं निकाला गया है।

सरकारी रिकाॅर्ड में खान संख्या 195/2005 में पिछले साढ़े तीन साल में 1 लाख 20 हजार टन चेजा पत्थर निकाला गया और खान संख्या 199/2005 में 1 लाख 18 हजार टन चेजा पत्थर निकाला है जबकि हमने मौके पर जाकर देखा तो एक टन पत्थर भी खुदा हुआ नहीं मिला।

ऐसा ही मामला कोटपूतली के बेरी गांव की खान संख्या 237/05 का है। सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार 2019-20 में 16,871.89 टन पत्थर निकाला गया। 2020-21 में 1,16,553.27 टन पत्थर निकाला गया। दो वर्षों में 1,33,425 टन पत्थर निकाला गया। जबकि मौके पर हमने देखा- यहां खेती हो रही है।