पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • In The Name Of Sampling, Vaccination, Oxygen Cylinders And Home Delivery Of A Concentrator, A Cyber Fraud Of Rs 40 Crore From 40 Thousand People Of The State In A Year

काेरोना के बीच साइबर फंगस:सैंपलिंग-वैक्सीनेशन, ऑक्सीजन सिलेंडर और कन्संट्रेटर की होम डिलीवरी के नाम पर एक साल में प्रदेश के 40 हजार लोगों से 40 करोड़ रुपए की साइबर ठगी

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: राजेंद्र गौतम/इमरान खान
  • कॉपी लिंक
प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

काेराेनाकाल में साेशल मीडिया के सहारे लाेगाें काे मदद पहुंचाने की कई कहानियां सामने आईं, लेकिन इसी के जरिये एक बड़ी आबादी साइबर ठगी का भी शिकार हुई। खासकर कोरोना की दूसरी लहर में। बीते एक साल में ही वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन, सैंपलिंग, ऑक्सीजन सिलेंडर, कन्संट्रेटर और दवा की हाेम डिलीवरी के नाम पर प्रदेश के 40 हजार लाेगों से 35-40 करोड़ रु. की ठगी हुई है।

जयपुर में ही 11 हजार लोगों ने ऐसी ठगी हुई है। ये ठग सैंपलिंग और वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक पर बायोडाटा अपडेट करवाने के बहाने ओटीपी ले रहे हैं। या सोशल मीडिया पर दवा के नाम पर मदद का झांसा देकर लाखाें ठग रहे हैं।

साइबर स्पेस फर्म नार्टन लाइफ लाॅक की साइबर सेफ्टी रिपाेर्ट के अनुसार देश में फरवरी 2020 से फरवरी 2021 तक 12 कराेड़ लाेग इस तरह की ठगी के शिकार हाे चुके हैं। हालांकि इसमें डेटा चोरी भी शामिल है।

वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट सोशल मीडिया पर डाला, एयरफोर्स इंजीनियर से 74 हजार ठगे

  • जयपुर के सीतापुरा स्थित औद्याेगिक क्षेत्र निवासी गाेकुल चंद के पास कोरोना टेस्ट कराने के लिए कॉल आया। उन्हें 450 रु. में घर पर सैंपलिंग की स्कीम बताई। रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक भेजा। खाते से 20 हजार रु. साफ हो गए।
  • जयपुर के ही आगरा रोड पर जामडाेली निवासी ऑटाे चालक सुरेश जांगिड़ के पास कॉल आया। कॉल करने वाले ने पूछा कि आपके परिवार में काेई काेराेना संक्रमित है? नाम, पता, आधार और रजिस्ट्रेशन के लिए ओटीपी पूछा। खाते से 10 हजार रु. निकल गए।
  • सीआरपीएस अफसर काे मां के लिए कन्संट्रेटर चाहिए था। किसी परिचित ने वाॅट्सएप पर फाॅरवर्ड नंबर भेजा। ठग ने 20 हजार रु. एडवांस लेकर होम डिलीवरी का झांसा दिया। डिलीवरी नहीं की।
  • ब्लैक फंगस की दवा की होम डिलीवरी के नाम पर ठग ने जयपुर के सरीश से 95 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद भी दवा नहीं पहुंची तो पीड़ित ने मानसरोवर थाने में केस दर्ज करवाया।
  • उदयपुर में एयर फाेर्स इंजीनियर और एक अन्य युवक ने अपने वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट साेशल मीडिया पर पाेस्ट किए थे। ठगाें ने आधार कार्ड नंबर पता कर फोन पर झांसे में लिया। अन्य जानकारी ली और खाते से 74 हजार रुपए ठग लिए।

भास्कर एक्सपर्ट- मदद लेने-देने से पहले नंबर वैरिफाई करें-

ध्यान रखें; कोरोना मरीजों के सर्वे या वैक्सीनेशन के लिए कॉल नहीं आता
साइबर एक्सपर्ट राजशेखर राजहरिया का कहना है कि वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन या काेराना संक्रमितों के सर्वे के लिए किसी तरह की कॉल नहीं आती। सर्वे हाेगा भी ताे संबंधित कर्मचारी घर आएगा। ऐसे में वैक्सीनेशन या सैंपलिंग के नाम पर अपना माेबाइल नंबर, आधार, ओटीपी या बैंक की जानकारी न बताएं।किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी पूरी जानकारी करें। अपने खाताें में टू फेक्टर ऑथेंटिकेशन जाेड़ें और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ शेयर न करें।

सोशल मीडिया पर मदद के नाम पर अपना नंबर वायरल करा रहे हैं ठग
सायबर एक्सपर्ट और पुलिस कमिश्नरेट में साइबर एडवाइजर मुकेश चाैधरी के अनुसार, साइबर ठग मदद कराने का झांसा देकर अपने नंबर साेशल मीडिया पर वायरल करते हैं। लोग इन्हें बिना वैरिफाई किए फाॅरवर्ड कर देते हैं। जरूरतमंद तब परेशान रहता है, इसलिए बिना साेचे समझे पैसे गंवा देता है। मदद की गुहरार के साथ लोग महिलाओं के नंबर भी शेयर कर देते हैं। ठग ऐसे नंबर्स को ट्रेस कर महिलाओं काे अश्लील मैसेज भेजकर परेशान करते हैं।

खबरें और भी हैं...