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पंजाब के बाद प्रदेश की सियासत पर निगाहें:बगावत-बाड़ाबंदी की सियासी उथल-पुथल झेल चुकी राजस्थान कांग्रेस में अब गहलोत-पायलट खेमे के सियासी भविष्य पर नजरें

जयपुर8 महीने पहले
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गहलोत सरकार से बगावत के बाद पायलट समर्थकों की कांग्रेस में वापसी तो हो गई, लेकिन रिश्तों में खटास कम नहीं हुई बल्कि और ज्यादा बढ़ गई। - Dainik Bhaskar
गहलोत सरकार से बगावत के बाद पायलट समर्थकों की कांग्रेस में वापसी तो हो गई, लेकिन रिश्तों में खटास कम नहीं हुई बल्कि और ज्यादा बढ़ गई।

पंजाब में लंबे समय तक चले सियासी घमासान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पंजाब की तरह राजस्थान कांग्रेस भी बीते डेढ़ साल से सियासी उथल-पुथल के दौर से गुजरी है...जहां पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थकों में जबरदस्त भिड़ंत चल रही है।

गहलोत सरकार से बगावत के बाद पायलट समर्थकों की कांग्रेस में वापसी तो हो गई, लेकिन रिश्तों में खटास कम नहीं हुई बल्कि और ज्यादा बढ़ गई। इस कलह को शांत करने के लिए राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले। इस मुलाकात के बाद माना जा रहा था कि राजस्थान कांग्रेस और गहलोत सरकार में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का स्वास्थ्य खराब हो गया।

  • सियासी सूचकांक- कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब का कैप्टन बदला; अब राजस्थान को लेकर दिल्ली के फैसले का इंतजार
  • कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अजय माकन पंजाब के सियासी विवाद को सुलझाने के बाद अब पहुंच सकते हैं जयपुर

पायलट समर्थकों की आस

सरकार रिपीट करने के लिए पंजाब में हुआ बदलाव, राजस्थान में भी रिपीट नहीं होती
हालांकि पंजाब के मामले में पायलट समर्थकों में से भी कोई खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है। पायलट समर्थकों का कहना है कि सारा मुद्दा इस पर टिका है कि पंजाब में सरकार रिपीट नहीं हो रही थी। पायलट समर्थक एक नेता का कहना है कि अगले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को कम से कम 100 सीटें मिलें इसके लिए जरूरी है कि राजस्थान में हमारी सरकार रिपीट हो।

खुद सचिन पायलट भी राजस्थान के मामले में कई बार यह बयान दे चुके हैं कि यहां सरकार रिपीट नहीं होती। पायलट समर्थक विधायक वेद सोलंकी तो सरकार पर फोन टैपिंग और हनी ट्रैप जैसे गंभीर आरोप लगा चुके हैं।

गहलोत समर्थकों को विश्वास

दिल्ली की पसंद नहीं थे अमरिंदर, जबकि राजस्थान में सीएम दिल्ली ने ही बनाया था
इधर गहलोत समर्थकों का कहना है कि अमरिंदर सिंह और अशोक गहलोत में 2 बड़े अंतर हैं। पहला यह कि अमरिंदर सिंह दिल्ली की च्वाइस से मुख्यमंत्री नहीं बने थे, जबकि गहलोत को सोनियां गांधी ने दिल्ली बुलाकर ही मुख्यमंत्री घोषित किया था। दूसरा यह कि गहलोत आलाकमान और 100 से ज्यादा समर्थक विधायक का कॉन्फिडेंस एंज्वाय कर रहे हैं।

गहलोत समर्थक एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जब राजस्थान में कांग्रेस जीत गई तब राहुल गांधी ने सभी कांग्रेसी विधायकों को ऑडियो मैसेज भेजकर मुख्यमंत्री के लिए एक नाम मांगा था। इसमें गहलोत के पक्ष में फैसला हुआ। इसके बाद गहलोत को मुख्यमंत्री घोषित किया गया।

ऑपरेशन पंजाब: लीड राेल में रहे हरीश, तीन महीने पहले लगे थे सियासी सेंधमारी के आरोप
पंजाब कांग्रेस के सियासी विवाद में राजस्थान के मंत्री हरीश चौधरी का नाम सामने आया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरीश चौधरी की भूमिका को लेकर नाखुशी जाहिर की थी। तब हरीश चौधरी ने कहा था कि सियासी विवाद को लेकर पंजाब के किसी भी विधायक से उन्होंने संपर्क नहीं किया, लेकिन शनिवार को पंजाब विवाद निपटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान प्रभारी अजय माकन और राजस्थान के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को ऑब्जर्वर बनाकर भेजा।

हरीश चौधरी पंजाब के प्रभारी सचिव रहे हैं इसलिए पंजाब की सियासी नब्ज पर उनकी पकड़ काफी अच्छी है। पंजाब के प्रभारी हरीश रावत के साथ अजय माकन और हरीश चौधरी चंडीगढ़ में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मौजूद रहे। चौधरी एआईसीसी सचिव रहते हुए पंजाब के प्रभारी रह चुके हैं।

सीएम के ओएसडी लाेकेश शर्मा का तंज
सीएम गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा का ट्वीट भी चर्चाओं में रहा। इस ट्वीट में शर्मा ने पंजाब विवाद का जिक्र नहीं किया। शर्मा ने लिखा-मजबूत को मजबूर, मामूली को मगरूर किया जाए.. बाड़ ही खेत को खाए, उस फसल को कौन बचाए! इस पर पायलट समर्थकाें ने शर्मा पर पलटवार किया।