स्टूडेंट्स को मिली उस्ता आर्ट की जानकारी:ईरान की कला को 15वीं शताब्दी में भारत लाया गया था, अकबर के शासन में बीकानेर में मिली जगह

जयपुर6 महीने पहले
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भारतीय विद्या भवन व इंफोसिस फाउंडेशन की ओर से कल्चरल आउट रीच प्रोग्राम के तहत 93वीं कड़ी में बीकानेर की विश्व विख्यात उस्ता आर्ट की कार्यशाला का आयोजन किया गया। - Dainik Bhaskar
भारतीय विद्या भवन व इंफोसिस फाउंडेशन की ओर से कल्चरल आउट रीच प्रोग्राम के तहत 93वीं कड़ी में बीकानेर की विश्व विख्यात उस्ता आर्ट की कार्यशाला का आयोजन किया गया।

भारतीय विद्या भवन व इंफोसिस फाउंडेशन की ओर से कल्चरल आउट रीच प्रोग्राम के तहत 93वीं कड़ी में बीकानेर की विश्व विख्यात उस्ता आर्ट की कार्यशाला का आयोजन किया गया। वीर बालिका स्कूल, जौहरी बाजार में कार्यशाल की शुरुआत हुई। इसमें उस्ता कला के उस्ताद नियाज उस्ता रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि मूलतः ईरान की इस कला को कलाकार अपने साथ 15वीं शताब्दी में भारत में लाए थे।

वीर बालिका स्कूल, जौहरी बाजार में कार्यशाल की शुरुआत हुई।
वीर बालिका स्कूल, जौहरी बाजार में कार्यशाल की शुरुआत हुई।

इनके पूर्वज ही ईरान से भारत आए थे, अकबर के समय बीकानेर के राजा इन्हे बीकानेर ले आए व वहीं बसाया।पहले ये कला पत्थरों पर की जाती थी। ब्रिटिश काल में अंग्रेज इस कला से बहुत प्रभावित हुए, वे इसके नमूने ब्रिटेन ले जाना चाहते थे। यहां तक कि वे कुछ कलाकारों को ही ले जाने को तैयार थे, लेकिन कलाकार वतन बदर नही होना चाहते थे। तब उन्होंने ऊंट की खाल से सुराही बनवाई और उस पर उस्ता कला के नमूने बना कर दिए। ऊंट की खाल से बनी सुराही पर वर्कशॉप में उस्ताद नियाज उस्ता ने प्रतिभागियों को चित्रकारी सिखाई।उनका कहना है कि वे खुद इस पक्ष में हैं कि युवा लोग अधिक से अधिक इस कला को सीखें।कार्यशाला में 22युवा छात्राएं 4 दिन तक इस कला को सीखेंगी।

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