फर्ज का ‘खून’:रक्त तस्करों को ड्रग विभाग की खुली छूट, जनवरी से अब तक 61 ब्लड बैंकों में अनियमितताएं, कार्रवाई सिर्फ 2 पर

जयपुर21 दिन पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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जनवरी से अब तक प्रदेश के कुल 180 में से 61 ब्लड बैंकों में सामान्य से लेकर गंभीर अनियमितताएं मिल चुकी हैं - Dainik Bhaskar
जनवरी से अब तक प्रदेश के कुल 180 में से 61 ब्लड बैंकों में सामान्य से लेकर गंभीर अनियमितताएं मिल चुकी हैं
  • अब तक हुई 2 कार्रवाई में भी केन्द्र की टीम की भागीदारी रही

राज्य में खून की कालाबाजारी को रोकने की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर ही दोषियों को बचाने में लगे हैं। जनवरी से अब तक प्रदेश के कुल 180 में से 61 ब्लड बैंकों में सामान्य से लेकर गंभीर अनियमितताएं मिल चुकी हैं लेकिन कार्रवाई महज 2 पर की गई। जिन 2 पर कार्रवाई हुई, उसमें केन्द्र की टीम शामिल थी। अन्यथा जयपुर के ड्रग कंट्रोलर की ओर से पिछले वर्षों में किसी भी ब्लड बैंक पर बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। गौरतलब है कि एक सप्ताह में दो बार खून तस्करी के मामले आए हैं।

एडीसी ने रिपोर्ट में लिखा था- अनियमितताएं, लाइसेंस निरस्त हो; ड्रग कंट्रोलर ने सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया

सरकार के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक 6 माह में ब्लड बैंक का पूरी तरह निरीक्षण होना चाहिए। प्रदेश में 180 से अधिक ब्लड बैंक हैं और निरीक्षणों के दौरान 61 में अनियमितताएं पाई गईं। लेकिन विभिन्न जिलों के एडीसी की रिपोर्ट के बावजूद ड्रग कंट्रोलर ने कार्रवाई नहीं की। चौंकाने वाला तथ्य यह भी कि जिन ब्लड में भारी अनियमितताएं मिलीं और स्थानीय एडीसी ने उनके लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा की, ड्रग कंट्रोलर ने उन्हें केवल नोटिस देकर इतिश्री कर ली।

एडीसी निहत्थे, प्रदेश के ब्लड बैंकों की जांच का जिम्मा

जिस जिले में भी ब्लड बैंक है, वहां क्षेत्र का एडीसी जांच कर सकता है। ड्रग कंट्रोलर ने एडीसी सीमा तनान को ही सभी ब्लड बैंकों की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में क्षेत्र के एडीसी वहां के ब्लड बैंक की जांच ही नहीं कर पाते। जांच कर भी लें तो बाद में औषधि नियंत्रण अधिकारी सीमा तनान को वहां भेजकर रिपोर्ट ली जाती है लेकिन ब्लड बैंक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।

भास्कर ने पूरे खेल को उजागर किया तो राज्य सरकार हरकत में आई, जांच करने ब्लड बैंक में अफसर को भेजा
झुंझुनूं के आरएलजेटी ब्लड बैंक के रक्तदान शिविर की जांच में ब्लड बेचने की रिपोर्ट मिलने के बाद भी ड्रग कंट्रोलर की ओर से कार्रवाई नहीं होने के खुलासे के बाद गुरुवार को सरकार हरकत में आई। ड्रग कंट्रोलर झूठ बोलकर मामला दबाने की कोशिश करते रहे कि नोटिस का ब्लड बैंक की ओर से जवाब नहीं िमला। जबकि हकीकत यह है कि ब्लड बैंक ने 6 जुलाई को ही ड्रग विभाग को जवाब भेज दिया था।

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