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राजस्थान में पर्यटकों की बेरूखी से एयरपोर्ट पर सन्नाटा:14 राज्यों में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट लाना जरूरी नहीं, लेकिन राजस्थान में महज औपचारिकता रोक रही पर्यटक

जयपुर2 महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है। प्रदेश में ज्यादातर चीजें अब नॉर्मल हो रही हैं। लेकिन अभी भी हवाई और रेल यात्रा के हाल बुरे हैं। देश का 12वां सबसे बड़ा एयरपोर्ट एक बंदिश के चलते यात्रीभार व फ्लाइट संचालन के मामले में टॉप 15 एयरपोर्ट की सूची से बाहर हो चुका है। हवाई यात्रा विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें सबसे बड़ी बाधा कोरोना की निगेटिव जांच रिपोर्ट है।

दरअसल राज्य सरकार ने राजस्थान आने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कोविड की निगेटिव जांच रिपोर्ट को अनिवार्य किया हुआ है। इसमें भी कोविड की एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट नहीं, बल्कि आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए। निगेटिव रिपोर्ट नहीं होने की स्थिति में राजस्थान आने वाले यात्रियों को डिपार्चर एयरपोर्ट पर ही रोक दिया जाता है। किसी यात्री को दिल्ली से जयपुर आना है और उसके पास निगेटिव जांच रिपोर्ट नहीं है तो उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट में ही नहीं चढ़ने दिया जाएगा।

हाल ही में राज्य सरकार ने उन यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर जांच की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है, जिनके कोरोना की दोनों डोज लग चुकी हों। लेकिन इसमें एक शर्त जोड़ी गई है कि दोनों टीके लगने के 28 दिन गुजरने पर ही आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट से बच सकते हैं। गौरतलब है कि कोरोना के टीके की दोनों डोज देश में करीब 5 फीसदी आबादी को ही लगी हैं। और 28 दिन बीतने वालों की संख्या और भी कम है। यात्रियों की संख्या में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो रही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट को माना जा रहा है।

पंजाब में 1 डोज के बाद भी जरुरी नहीं टेस्ट, राजस्थान में महज औचारिकता
कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे राज्यों में अभी भी कोरोना मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत रूप से ज्यादा है और वहां आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। जबकि राजस्थान में अब नए मरीजों की संख्या लगभग हर रोज 100 से कम आ रही है। ऐसे में यहां आरटी-पीसीआर की जांच रिपोर्ट में छूट दी जा सकती है। यदि जांच रिपोर्ट में पूरी तरह छूट नहीं भी दी जाए तो पंजाब मॉडल को अपनाया जा सकता है। पंजाब में कोरोना वैक्सीन का 1 डोज लगे होने के 14 दिन बीतने पर यात्री को आरटी-पीसीआर जांच से एग्जेम्प्शन दिया गया है। जयपुर रेलवे स्टेशन पर रोजाना 30 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। यहां टेस्ट रिपोर्ट की जांच के लिए महज एक टीम लगाई है। वो भी रैंडम लोगों की जांच करती है। यानि टेस्ट रिपोर्ट लाना महज एक औपचारिकता ही है।

22 राज्यों में रिपोर्ट जरुरी, 14 में नहीं…

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पुडुचेरी, दमन एंड दीव, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और बिहार में टेस्ट कराना जरूरी नहीं है। वहीं बिहार में महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल राज्यों से आने वाले यात्रियों की निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र, केरल से आने वाले यात्रियों की निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। जबकि राजस्थान, केरल, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, गोवा, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लेह, उत्तराखंड में जांच रिपोर्ट जरूरी है। असम और मेघालय में वैक्सीनेशन होने पर आरटी-पीसीआर रिपोर्ट जरूरी नहीं है। जबकि राजस्थान में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट जरूरी है या वैक्सीन की 2 डोज के बाद 28 दिन तक बिना रिपोर्ट के यात्रा नहीं की जा सकती।

दो महीने में एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति

7 मई को राजस्थान में 18231 कोरोना संक्रमित मिले थे। 2 माह बाद 5 जुलाई को मात्र 55 कोरोना संक्रमित मिले। यानी दूसरी लहर के पीक की तुलना में 331 गुना मरीज कम हुए। 7 मई को 12 फ्लाइट्स से 1730 यात्रियों का आवागमन हुआ। 2 माह बाद 5 जुलाई को 15 फ्लाइट से 3426 यात्रियों का मूमेंट हुआ। यानी कोरोना संक्रमण कम होने के बावजूद भी यात्रीभार सवा दो हजार के आंकड़े को नहीं छू सका।

रिपोर्ट : शिवांग चतुर्वेदी

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