आखिर क्यों हुआ आमेर में आसमानी वज्रपात:ज्यादा मोबाइल एक्टिव थे, नमी और तेज गर्मी से बादलों में चार्ज डेवलप हुआ; इसलिए बिजली गिरी

जयपुर5 महीने पहले

जयपुर के आमेर के किले में आकाशीय बिजली गिरने की घटना से मौसम विभाग की भविष्यवाणी का कमजोर सिस्टम सवालों में है। विभाग का दावा है कि ग्लाेबल फोरकास्टिंग सिस्टम, यूनिफाइड माॅडल से 4 चार घंटे पहले बिजली गिरने की वार्निंग दी थी।

बड़ा सवाल... आखिर स्पेसिफिक जोन को लेकर अलर्ट क्यों नहीं जारी हो सका?
एक्सपर्ट का कहना है 20 दिन से भीषण गर्मी थी। पारा 40 डिग्री के ऊपर था। अचानक माैसम पलटा और लाे प्रेशर एरिया बनने से तेज हवा और बारिश शुरू हो गई। एक ओर ज्यादा नमी और दूसरी तरफ जमीनी सतह पर गर्मी थी। इससे निगेटिव और पाॅजिटिव चार्ज डेवलप हुआ। रडार में तीन ओर से स्ट्रांग सिस्टम था। थंडरस्टार्म के दौरान लाेग पहाड़ी पर थे और माेबाइल यूज कर रहे थे इसलिए इंटरक्लाउड बादलाें और जमीन के बीच तेज हवा ने कंडक्टर का काम किया और बिजली गिरी।

ग्लाेबल फोरकास्टिंग-यूनिफाइड माॅडल की सूचना के आधार पर वार्निंग दी
माैसम विभाग आकाशीय बिजली गिरने की वॉर्निंग जारी करने से पहले कई तरह के फोरकास्टिंग माॅडल यूज करता है। इसके लिए विभाग ग्लाेबल फोरकास्टिंग सिस्टम और यूनिफाइड माॅडल के साथ लाेकल कंडीशन के आधार पर वर्टिकल डायरेक्शन में विंड पैटर्न का प्राेफाइल यानी हवा की स्पीड, दिशा, तापमान का पता लगाकर यह तय करता है कि बिजली गिरने की आशंका है या नहीं है? या फिर कितनी है। इस घटना से पहले भी माैसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया था, लेकिन सिर्फ 4 घंटे पहले

13 जिलों के लिए जारी हुई थी चेतावनी, स्पेसिफिक एरिया के लिए नहीं
मौसम विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि हमने 4 घंटे पहले चेतानवी जारी की थी, लेकिन 13 दिन देर से आए मानसून की तरह वॉर्निंग भी देर से ही मिली। जिला प्रशासन की लापरवाही ये रही कि 4 घंटे पहले ही मिली चेतावनी को ठीक तरह से जारी नहीं किया गया। इधर, मौसम विभाग ने एक साथ 13 जिलों के लिए बारिश, बिजली गिरने और आंधी की चेतावनी दे दी थी। अगर विभाग का सिस्टम हाईटेक होता तो स्पेसिफिक जगह पर बिजली गिरने का अलर्ट मिल जाता और शायद इतनी मौतें नहीं होतीं। ऐसे में मौसम विभाग और जिला प्रशासन के बीच की कमजोर कड़ी ने कई जानें ले लीं।

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