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जयपुर में पहली बार 1430 कॉलोनियां होंगी लीगल:1.27 लाख जमीन धारकों को पट्‌टे देने की तैयारी, कॉलोनियों में रेग्यूलाइज के लिए कैंप लगेंगे, 2 अक्टूबर से चलेगा प्रशासन शहरों के साथ अभियान

जयपुर2 महीने पहले
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पृथ्वीराज नगर। - Dainik Bhaskar
पृथ्वीराज नगर।

जयपुर में भूखण्डों या मकानों के टाइटल (पट्‌टों) का इंतजार कर रहे भवन मालिकों का इंतजार खत्म होने वाला है। अशोक गहलोत सरकार राजधानी जयपुर में ही 3,300 कॉलोनियों के 1.27 लाख भूखण्डधारियों को पट्‌टे देने की योजना तैयार कर रही है। ये पट्‌टे इसी साल गांधी जयंती 2 अक्टूबर से शुरू किया जाने वाले प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत दिए जाएंगे।

प्रमुख शासन सचिव नगरीय विकास विभाग कुंजीलाल मीणा ने जयपुर JDA के आयुक्त और सभी अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें इस अभियान के तहत क्या किया जाना है इस पर चर्चा की। जानकारों का कहना है कि जयपुर में पृथ्वीराज नगर समेत सभी जगहों पर बसी 3300 से ज्यादा कॉलोनियों के भूखण्डधारियों को बड़े स्तर पर शिविर लगाकर पट्‌टे दिए जाएंगे।

1,430 कॉलोनियों का होगा नियमन
खास बात ये है कि 1,430 ऐसी कॉलोनियां हैं, जिनका नियमन कैंप पहली बार लगाया जाएगा। बैठक में बताया कि इन कॉलोनियों की 90A और 90B तो पहले हो चुकी है, लेकिन कॉलोनियों का ले-आउट प्लान अप्रूवड नहीं किया गया। इन्हीं कॉलोनियों के ले-आउट प्लान इनके नियमन कैंप लगाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इन कॉलाेनियों 41 हजार से ज्यादा भूखण्ड हैं।

भूखण्ड मालिकों को भी मिलेंगे पट्‌टे
जयपुर में जिन कॉलोनियों का नियमन हो चुका है और उन कॉलोनियों में जिन भूखण्डधारियों ने पट्‌टे नहीं लिए हैं। उनके लिए भी विशेष कैंप लगाकर पट्‌टे दिए जाएंगे। JDA से मिली जानकारी के मुताबिक जयपुर में इस तरह की करीब 1,904 कॉलोनियां हैं, जिनमें करीब 86 हजार भूखण्डधारी ऐसे हैं, जिन्होंने पट्‌टे नहीं लिए हैं।

मिल सकती है कई तरह की रियायतें
इन शिविर में पिछली बार की तरह इस बार भी छूट मिल सकती है। इसमें सबसे प्रमुख छूट ब्याज की हाे सकती है। जिन कॉलोनियों का नियमन कैंप पहले लग चुका है और जिन्होंने अब तक भूखण्डों के पट्टे नहीं लिए है। उन मामलों में ब्याज में रियायत दी जा सकती है। जब से कैंप लगा है तब से अब तक का ब्याज नियमन राशि और प्रशासनिक शुल्क पर जोड़ा जाता है। इस कारण पट्‌टा लेने पर ज्यादा पैसा देना पड़ता है। ऐसे में सरकार ऐसे प्रकरणों में ब्याज में रियायत दे सकती है।

क्या होता है 90ए और 90बी की प्रक्रिया
किसी भी कृषि भूमि पर कन्वर्जन जब अकृषि उपयोग के लिए किया जाता है तो उस प्रक्रिया को 90ए कहा जाता है। साल 2008 में जब गहलोत की सरकार सत्ता में आई थी, तब 90बी को बदलकर 90ए किया गया था। इस प्रक्रिया में कृषि भूमि को अकृषि भूमि में कन्वर्जन के बाद संबंधित स्थानीय निकाय के नाम जमीन का नामांतरण खोला जाता है।

इन एरिया में है गैर अनुमोदित कॉलोनियां
जयपुर जेडीए सूत्रों की माने तो आगरा रोड पर जामडोली, पालड़ी मीणा, खो-नागाेरियान, गोनेर रोड, टोंक रोड पर वाटिका रोड, सांगानेर, पृथ्वीराज नगर दक्षिण और उत्तर, निवारू रोड, अजमेर रोड, सिरसी, जयपुर-दिल्ली बाइपास (चंदवाजी रोड) पर बढारना, सीकर रोड पर बड़ी संख्या में सोसायटी और कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां बस चुकी है, जिन्हें इन प्रशासन शहरों के संग अभियान में नियमित करने की योजना चल रही है।

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